क्यूँ ना हम कुछ लम्हों के लिए सब कुछ भूल कर
अपनों को दिल से सुने
अपनो से बातें करें
अपनो के बीच कुछ पल बिताएं,,
अपनो से कभी रूठे,,
तो,,,अपनो को कभी मनाएं,,
क्योंकि ज़िन्दगी भी तो चार पल की ही है,,,
तो इन अमूल्य पलों को हम क्यों गवाएं,,,
नही तो ये रिश्ते धूमिल हो जाएंगे,,
इन पर समय की धूल चढ़ गई तो?????
इसलिए अपनो को समय दे,,,
अगर रिश्तों को,,
समाज को,,
शहर को ,,,
जीवंत रखना है,,,,
सभी रिश्तों को समर्पित
आपका कोई अपना
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