Wednesday, February 22, 2017

,,,क्या,,,नारी कमज़ोर होती है,,,दुर्बल होती हैं,,हमेशा उपेक्षित रहना उसकी किश्मत है ,,,

,,,क्या,,,नारी कमज़ोर होती है,,,दुर्बल होती हैं,,हमेशा उपेक्षित रहना उसकी किश्मत है ,,,

तो फिर क्यों इसी स्वरुप की हम पूजा करते हैं

चाहे माँ दुर्गा हो,,,या माता काली,,,
ऐसी सोंच रखने वालों को नारी रूप,,, किसी भी देवी देवता की पूजा नही करनी चाहिए,,,,
उन्हें कोई अधिकार नही,,

यात्रा बहुत कुछ सिखाती है,,,,संसार के बारे में भी,,,और स्वयं के बारे में भी,,,, इसलिए जिसके समक्ष ज्ञान,,,विवेक,,और धैर्य है,,,वो अवश्य ही बहुत कुछ अर्जित कर लेते है,,,एक अनुभव के रूप में

यात्रा बहुत कुछ सिखाती है,,,,संसार के बारे में भी,,,और स्वयं के बारे में भी,,,,
इसलिए जिसके समक्ष ज्ञान,,,विवेक,,और धैर्य है,,,वो अवश्य ही बहुत कुछ अर्जित कर लेते है,,,एक अनुभव के रूप में

निर्मल अवस्थी

Monday, February 20, 2017

जय हिंद,,,जय भारत

जाने कहाँ,,,गये वो सहनशील साहित्यकार,,,कलाकार,,,
जो अपने मेडल लौटाने के लिए,,,और कुछ लोग अपना देश तक छोड़ने के लिए तैय्यार थे ,,,आज जब हमारे देश पर मर मिटने वाले सैनिको को पत्थर मारते है,,,उनको जान से मारने में    आतंकियों की मदद करते है,,,उनके विरोध में कोई अपना तमगा क्यों नही लौटाना चाहता,,,,
क्या यह असहनशीलता नही,,,जब हमारे सामने ही कोई पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाता है,,,
मेरा बस इतना ही मन करता है,,,
मैं असहिष्णु नही,,,लेकिन,,
उन देशद्रोहियों के रक्त से स्नान जरूर करना चाहता हु ,,,जो हमारे वीर सैनिको की सहनशीलता की हर क्षण परीक्षा लेते है

जय हिंद
जय भारत

निर्मल अवस्थी