मेरी,,,मृत्यु,,की मुझ पर विजय होगी
तब मेरे,,भारत,,की भी जय होगी
मेरी,,,मृत्यु,,की मुझ पर विजय होगी,,,,
नाही,,मैं,,,मैं,, हूं,,,
ना मुझमे,,,कुछ,,,भी,,मेरा है,,,
बस मिटटी,,की महक,,,से,,मुहब्बत,,,है मुझे,,
क्योकि इसीकी गोद,,,में अपना बसेरा है,,,,
ना मैं,,,शहीद,,,भगत सिंह,,,जैसा,,,पावन,,,
नाही,,,राजगुरु,,,सुखदेव,,, की तरह महान,,,
फिर भी अपनी मिटटी के लिए,,,,
न्योछावर है,,,प्रतिपल मेरे प्राण,,,,
लहू के हर कतरे,,,,में माँ भारती,,
और,,बदन,,,पे,,,बसंती,,,,चोला,,
इसी इच्छा के साथ,,,
मेरी मृत्यु भी अजेय होगी,,,
मेरी,,,मृत्यु,,की मुझ पर विजय होगी
तब मेरे,,भारत,,की भी जय होगी
जय हिंद
जय भारत
जय शहीद भगत सिंह
जय राजगुरू जी
जय सुखदेव जी
आपको सत ,,सत,, नमन,,
Nirmal kumar awasthi
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