कैसा विद्रोह है मन में,,,
क्यूँ सहमा सा है ये मन,,,
जाने क्यूँ क्रोध है मन में,,
ये किस मोड़ पर है जीवन,,
कल तक हम संग खेले थे,,,
आज क्यों बन गए दुश्मन,,,
जब तक ना पता था हमे,,
हमारा कौन सा है धर्म,,,
ना हिन्दू जानते थे हम,,
ना मुसलमाँ जानते थे हम,,,
दिलों में तब मुहब्बत थी,
जब तक था बीच में नही धर्म,,,
कल तक जो दिल हमारा था,,,
टूटा टुकड़ो सा,,हो गया बेदम,,,
कौन है माँ भारती का लाल,,
ये कोई ना कहता है
बस कुछ भीड़ का ही फैसला,,
अब सड़कों पे चलता है,,,
इससे तो अच्छे छोटे ही थे
जाने कहाँ खो गया बचपन,,,
कैसा विद्रोह है मन में,,,
क्यूँ सहमा सा है ये मन,,,
जाने क्यूँ क्रोध है मन में,,
ये किस मोड़ पर है जीवन,,
कल तक हम संग खेले थे,,,
आज क्यों बन गए दुश्मन,,,
Nirmal Earthcarefoundation Ngo
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