Monday, October 15, 2018

व्यथाएँ बहुत मेरे मन मे सजन अश्रुपूरित छलक रहे विरह में नयन

हैं व्यथाएँ बहुत मेरे मन मे सजन
अश्रुपूरित छलक रहे विरह में नयन
मृगमरीचिका सी पास आती कभी
पल में धूमिल हो जाती हो तुम्ही
बनके मुरली मनोहर की वो मधुर तान छेड़ो,,
रह ना पाए अलग तुझसे,,जो,,थकित है ये मन,,

हैं व्यथाएँ बहुत मेरे मन मे सजन
अश्रुपूरित छलक रहे विरह में नयन,,,,,

क्या सोचूँ ,,,ना पाऊँ,,
जाऊ तो,,कहाँ जाऊ,,
ये लताएँ,, ये उपवन,,
ये गऊ वे ये ग्वाले,,
विरह में सब दुःखी है,,
इक झलक तो दिखाओ,,
मेरे मुरली मनोहर,,,मेरे ,,,श्याम सुंदर
इस कालरात्रि में,,कुछ दरस तो दिखाओ,,,,
हर कही कालिया है,,

हर कही कंस है,,तो कही जरासन्ध
हैं व्यथाएँ बहुत मेरे मन मे सजन
अश्रुपूरित छलक रहे विरह में नयन

जय श्री कृष्ण,,,,,
Nirmal Earthcarefoundation Vriksharopan Ekabhiyaan
EARTHCARE FOUNDATION NGO
www.earthcarengo.org

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