कुछ अनछुए से शब्द है
मेरे मन के शब्दकोश में,,
जो छूना चाहते है,,
इस असीमित आकाश को।।
इक पँछी की तरहा,,
चारों दिशाओं में,,
निर्बाध रूप से,,
उड़ना चाहते है,,
कुछ शब्द है,,,कुछ निःशब्द है,,
मेरे मन के शब्दकोश में,,
कभी ज्वार जैसे उठते है,,
कभी झकझोर देते है,,
कभी समंदर सी उठती लहरें,,
तो कभी ,,सभी सीमाएं तोड़ देते है,,,
फिर भी इनमें सब्र है
कुछ शब्द है,,,कुछ निःशब्द है,,
मेरे मन के शब्दकोश में,,
इनमे भावनाये भी,,
असीमित कल्पनाएं भी,,
अनछुये एहसास भी।।।
इक तड़पती प्यास भी,,,,
मन का ये पनघट है,,,
जो कुछ टूटा,,
तो कुछ बिखरा सा,,
इस हृदय ने समेटे,,
ना जाने कितने दर्द हैं
कुछ शब्द है,,,कुछ निःशब्द है,,
मेरे मन के शब्दकोश में,,
कुछ अनछुए से शब्द है
मेरे मन के शब्दकोश में,,
जो छूना चाहते है,,
इस असीमित आकाश को।।
© Nirmal Earthcarefoundation Vriksharopan Ekabhiyaan
EARTHCARE FOUNDATION NGO
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