Friday, May 25, 2018

झूठा दिखावा क्यों................................. . श्रीदेवी अपने समय की सबसे कामयाब हीरोइन रही हैं और वो भी बिना प्लास्टिक सर्जरी के । 👉फिर 50 पार करके उन्हें अचानक 20 साल का दिखने की धून सवार हो गई । उसके चलते उन्होंने ढेरों सर्जरी करवाई । gym,योग, डाइटिंग कुछ भी नहीं छोड़ा । 👉ये सब उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए नहीं बल्कि जवान दिखने के लिए किया । शरीर पर हर तरह के अत्याचार किये । तो एक दिन शरीर ने उन्हें धोखा दे दिया । 👉सिर्फ पतला होना ही स्वास्थ्य की निशानी नहीं है क्योंकि बहुत से मोटे लोग उम्र पूरी करके जाते हैं और पतले लोग समय से पहले । 👉अपने को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है । हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये । 👉बाल रंगने हैं तो रंगिये, वज़न कम रखना है तो रखिये, मनचाहे कपड़े पहनने हैं तो पहनिए, 👉बच्चों की तरह खिलखिलाइये, अच्छा सोचिये, अच्छा माहौल रखिये, शीशे मे दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये। 👉कोई भी क्रीम आपको गोरा नहीं बनाती, कोई 👉शैम्पू बाल झड़ने नहीं रोकता, कोई तेल बाल नहीं उगाता, 👉कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नहीं देता । 👉चाहे वो प्रॉक्टर गैम्बल हो या पतंजलि। 👉सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं। 👉ये सब कुदरती होता है। उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है । 👉पुरानी मशीन को maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं उसे नई नहीं कर सकते । ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम । 👉किसी क्रीम में केसर नहीं होती क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपये से कम की नहीं होती । जो आपकी पॉकेट allow करती है वो प्रसाधन खरीदिये क्योंकि केमिकल्स सब में हैं । 👉lux की बनियान साधारण बनियान से इसलिए महंगी है क्योंकि उसमें विज्ञापन के लिए सनी देओल और अक्षय कुमार होते हैं। 👉और वो लक्स नहीं Calvin Cline या पियरे कार्डिन पहनते हैं । 👉करीना कपूर कभी लक्स साबुन से नहीं नहाती और अमिताभ बच्चन लाल तेल नहीं लगाता। 👉कोई बात नहीं अगर आपकी नाक मोटी है तो, कोई बात नहीं, आपकी आंखें छोटी है तो, कोई बात नहीं अगर आप गोरे नहीं हैं या आपके होठों की shape perfect नहीं हैं..... 👉फिर भी सुंदर हैं, अपनी सुंदरता को पहचानिए । दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रुरी है अपनी सुंदरता को महसूस करना। 👉हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है 👉और बड़े होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं। 👉और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं। 👉मन की खूबसूरती पर ध्यान दो। 👉यह कर्तव्य हो कि अपने परिवार में अपनी पत्नी, बेटी, बहन को ये अहसास दिलायें की वो प्रकुर्तिक रुप से सुंदर हैं वरना वो केमिकल्स का सहारा लेकर अपना स्वास्थ्य खराब कर लेगी। 👉आजकल युवा लड़के बॉडी बनाने की धुन में पागल रहते हैं l ये असर है उन फ़िल्म स्टारों और मॉडल्स का जिससे ये युवा सोचते हैं कि वो अपने चहेते हीरो जैसी बॉडी बना कर हीरो जैसे दिखेंगे। 👉आपको शायद पता नहीं की एक भी हीरो naturally बॉडी नहीं बनाता । 👉इनके पीछे बहुत सी प्लास्टिक सर्जरी, steroids implants, 👉lyposuctions, body contouring का हाथ होता है। आपरेशन से 6 pack बनवाते हैं, चेहरे पर सर्जरी करवाते हैं, 👉बाल उगवाते हैं, मांसपेशियों में सिलिकॉन भरवाते हैं और ये सब वो इसलिये करते हैं l क्योंकि उन्हें इन सबका पैसा मिलता है। 👉स्क्रीन पर सुंदर दिखना उनके धंधे की मजबूरी है उसके लिये वो शरीर से भी खेलते हैं वरना उन्हें कोई काम नहीं देगा। 👉लेकिन आम जीवन मे हमें बॉडी दिखाने के पैसे नहीं मिलते काम करने के पैसे मिलते हैं तो हम हीरो जैसे दिखने से अच्छा है अपने काम मे हुनर दिखायें। हमारी तरक्की तो उसी से होगी । 👉पेट निकल गया तो कोई बात नहीं उसके लिए शर्माना ज़रुरी नहीं। आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता हैं उसे समझिये। 👉सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है, यह खाओ, वो मत खाओ ठंडा खाओं, गर्म पीओ, कपाल भाती करो, सवेरे नीम्बू पीओ, रात को दूध पीओ, ज़ोर से सांस लो, लंबी सांस लो, दाहिने से सोइए, बाहिने से उठिए, हरी सब्जी खाओ, दाल में प्रोटीन है, दाल से क्रतिनिन बढ़ जायेगा। 👉अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा ये जि़न्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को !! आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे। 👉ये सारा ऑर्गेनिक, एलोवेरा, करेला, मेथी, पतंजलि में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है। 👉अरे ! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं, कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरु नहीं हुआ। 👉हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है। 👉भोजन का संबंध मन से होता है और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है। 👉मन को मारकर खुश नहीं रहा जा सकता। 👉थोड़ा बहुत शारीरक कार्य करते रहिए, टहलने जाइये, लाइट कसरत करिये, व्यस्त रहिये, खुश रहिये, शरीर से ज्यादा मन को सुंदर रखिये। 👉अगर पैसे से सुंदरता व जीवन खरीद लिया जाता तो कोई बड़ा आदमी इस दुनिया से ना जाता और हर अमीर आदमी सुंदर होता।

झूठा दिखावा क्यों.................................

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श्रीदेवी अपने समय की सबसे कामयाब हीरोइन रही हैं और वो भी बिना प्लास्टिक सर्जरी के ।
👉फिर 50 पार करके उन्हें अचानक 20 साल का दिखने की धून सवार हो गई । उसके चलते उन्होंने ढेरों सर्जरी करवाई । gym,योग, डाइटिंग कुछ भी नहीं छोड़ा ।
👉ये सब उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए नहीं बल्कि जवान दिखने के लिए किया । शरीर पर हर तरह के अत्याचार किये । तो एक दिन शरीर ने उन्हें धोखा दे दिया ।
👉सिर्फ पतला होना ही स्वास्थ्य की निशानी नहीं है क्योंकि बहुत से मोटे लोग उम्र पूरी करके जाते हैं और पतले लोग समय से पहले ।
👉अपने को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है । हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये ।
👉बाल रंगने हैं तो रंगिये,
वज़न कम रखना है तो रखिये, मनचाहे कपड़े पहनने हैं तो पहनिए,
👉बच्चों की तरह खिलखिलाइये, अच्छा सोचिये,
अच्छा माहौल रखिये,
शीशे मे दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये।
👉कोई भी क्रीम आपको गोरा नहीं बनाती, कोई
👉शैम्पू बाल झड़ने नहीं रोकता,
कोई तेल बाल नहीं उगाता,
👉कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नहीं देता ।
👉चाहे वो प्रॉक्टर गैम्बल हो या पतंजलि।
👉सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं।
👉ये सब कुदरती होता है।
उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है ।
👉पुरानी मशीन को maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं उसे नई नहीं कर सकते ।
ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम ।
👉किसी क्रीम में केसर नहीं होती क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपये से कम की नहीं होती ।
जो आपकी पॉकेट allow करती है वो प्रसाधन खरीदिये क्योंकि केमिकल्स सब में हैं ।
👉lux की बनियान साधारण बनियान से इसलिए महंगी है क्योंकि उसमें विज्ञापन के लिए सनी देओल और अक्षय कुमार होते हैं।
👉और वो लक्स नहीं Calvin Cline या पियरे कार्डिन पहनते हैं ।
👉करीना कपूर कभी लक्स साबुन से नहीं नहाती और अमिताभ बच्चन लाल तेल नहीं लगाता।
👉कोई बात नहीं
अगर आपकी नाक मोटी है तो,
कोई बात नहीं,
आपकी आंखें छोटी है तो,
कोई बात नहीं अगर
आप गोरे नहीं हैं
या आपके होठों की shape perfect नहीं हैं.....
👉फिर भी सुंदर हैं,
अपनी सुंदरता को पहचानिए ।
दूसरों से कमेंट या वाह वाही
लूटने के लिए सुंदर दिखने
से ज्यादा ज़रुरी है अपनी
सुंदरता को महसूस करना।
👉हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है
👉और बड़े होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं।
👉और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं।
👉मन की खूबसूरती पर ध्यान दो।
👉यह कर्तव्य हो कि अपने परिवार में अपनी पत्नी, बेटी, बहन को ये अहसास दिलायें की वो प्रकुर्तिक रुप से सुंदर हैं वरना वो केमिकल्स का सहारा लेकर अपना स्वास्थ्य खराब कर लेगी।
👉आजकल युवा लड़के बॉडी बनाने की धुन में पागल रहते हैं l
ये असर है उन फ़िल्म स्टारों और मॉडल्स का जिससे ये युवा सोचते हैं कि वो अपने चहेते हीरो जैसी बॉडी बना कर हीरो जैसे दिखेंगे।
👉आपको शायद पता नहीं की एक भी हीरो naturally बॉडी नहीं बनाता ।
👉इनके पीछे बहुत सी प्लास्टिक सर्जरी, steroids implants,
👉lyposuctions, body contouring का हाथ होता है।
आपरेशन से 6 pack बनवाते हैं, चेहरे पर सर्जरी करवाते हैं,
👉बाल उगवाते हैं, मांसपेशियों में सिलिकॉन भरवाते हैं और ये सब वो इसलिये करते हैं l
क्योंकि उन्हें इन सबका पैसा मिलता है।
👉स्क्रीन पर सुंदर दिखना उनके धंधे की मजबूरी है उसके लिये वो शरीर से भी खेलते हैं वरना उन्हें कोई काम नहीं देगा।
👉लेकिन आम जीवन मे हमें बॉडी दिखाने के पैसे नहीं मिलते काम करने के पैसे मिलते हैं तो हम हीरो जैसे दिखने से अच्छा है अपने काम मे हुनर दिखायें।
हमारी तरक्की तो उसी से होगी ।
👉पेट निकल गया तो कोई बात नहीं उसके लिए शर्माना ज़रुरी नहीं।
आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता हैं उसे समझिये।
👉सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है,
यह खाओ, वो मत खाओ ठंडा खाओं,
गर्म पीओ,
कपाल भाती करो,
सवेरे नीम्बू पीओ,
रात को दूध पीओ,
ज़ोर से सांस लो,
लंबी सांस लो,
दाहिने से सोइए,
बाहिने से उठिए,
हरी सब्जी खाओ,
दाल में प्रोटीन है,
दाल से क्रतिनिन बढ़ जायेगा।
👉अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा ये जि़न्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को !! आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे।
👉ये सारा ऑर्गेनिक, एलोवेरा,
करेला, मेथी, पतंजलि में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है।
👉अरे ! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं, कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरु नहीं हुआ।
👉हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है।
👉भोजन का संबंध मन से होता है और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है।
👉मन को मारकर खुश नहीं रहा जा सकता।
👉थोड़ा बहुत शारीरक कार्य करते रहिए, टहलने जाइये, लाइट कसरत करिये,
व्यस्त रहिये, खुश रहिये, शरीर से ज्यादा मन को सुंदर रखिये।
👉अगर पैसे से सुंदरता व जीवन खरीद लिया जाता तो कोई बड़ा आदमी इस दुनिया से ना जाता और हर अमीर आदमी सुंदर होता।

Tuesday, May 22, 2018

पुरूषोत्तम मास या अधिक (मल)मास 16मई 2018से 13जून2018तक हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिकमास, मल मास या पुरूषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवद् भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है। ऐसा माना जाता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से अनेक गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालु जन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति भक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं। अब सोचने वाली बात यह है कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है? आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है? इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है? इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिकमास को गहराई से जानते हैं- हर तीन साल में क्यों आता है अधिकमास- वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है। मल मास का नाम क्यों दिया गया है? हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है। पुरूषोत्तम मास क्यों और कैसे पड़ा नाम? अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरूषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए। चूंकि अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरूषोत्तम मास भी बन गया। मास हर व्यक्ति विशेष अधिकमास को पुरूषोत्तम मास कहे जाने का एक सांकेतिक अर्थ भी है। ऐसा माना जाता है कि यह मास हर व्यक्ति विशेष के लिए तन-मन से पवित्र होने का समय होता है। इस दौरान श्रद्धालुजन व्रत, उपवास, ध्यान, योग और भजन- कीर्तन- मनन में संलग्न रहते हैं और अपने आपको भगवान के प्रति समर्पित कर देते हैं। इस तरह यह समय सामान्य पुरूष से उत्तम बनने का होता है, मन के मैल धोने का होता है। यही वजह है कि इसे पुरूषोत्तम मास का नाम दिया गया है। अधिकमास का पौराणिक आधार क्या है? अधिक मास के लिए पुराणों में बड़ी ही सुंदर कथा सुनने को मिलती है। यह कथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने एक बार ब्रह्मा जी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर लिया और उनसे अमरता का वरदान मांगा। चूंकि अमरता का वरदान देना निषिद्ध है, इसीलिए ब्रह्मा जी ने उसे कोई भी अन्य वर मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके। इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार यानि आधा पुरूष और आधे शेर के रूप में प्रकट होकर, शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीन कर उसे मृत्यु के द्वार भेज दिया। अधिकमास का महत्व क्या और क्यों है? हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी सम्मिलित हैं। अपनी प्रकृति के अनुरूप ही ये पांचों तत्व प्रत्येक जीव की प्रकृति न्यूनाधिक रूप से निश्चित करते हैं। अधिकमास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन- मनन, ध्यान, योग आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। इस पूरे मास में अपने धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयासों से प्रत्येक व्यक्ति अपनी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति और निर्मलता के लिए उद्यत होता है। इस तरह अधिकमास के दौरान किए गए प्रयासों से व्यक्ति हर तीन साल में स्वयं को बाहर से स्वच्छ कर परम निर्मलता को प्राप्त कर नई उर्जा से भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है। अधिकमास में क्या करना उचित और संपूर्ण फलदायी होता है आमतौर पर अधिकमास में हिंदू श्रद्धालु व्रत- उपवास, पूजा- पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ- हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।

पुरूषोत्तम मास या अधिक (मल)मास

16मई 2018से 13जून2018तक

हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिकमास, मल मास या पुरूषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवद् भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है। ऐसा माना जाता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से अनेक गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालु जन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति भक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं। अब सोचने वाली बात यह है कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है? आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है? इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है? इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिकमास को गहराई से जानते हैं-

हर तीन साल में क्यों आता है अधिकमास- वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है।

मल मास का नाम क्यों दिया गया है?

हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।
पुरूषोत्तम मास क्यों और कैसे पड़ा नाम?

अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरूषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए। चूंकि अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरूषोत्तम मास भी बन गया।
मास हर व्यक्ति विशेष

अधिकमास को पुरूषोत्तम मास कहे जाने का एक सांकेतिक अर्थ भी है। ऐसा माना जाता है कि यह मास हर व्यक्ति विशेष के लिए तन-मन से पवित्र होने का समय होता है। इस दौरान श्रद्धालुजन व्रत, उपवास, ध्यान, योग और भजन- कीर्तन- मनन में संलग्न रहते हैं और अपने आपको भगवान के प्रति समर्पित कर देते हैं। इस तरह यह समय सामान्य पुरूष से उत्तम बनने का होता है, मन के मैल धोने का होता है। यही वजह है कि इसे पुरूषोत्तम मास का नाम दिया गया है।

अधिकमास का पौराणिक आधार क्या है?

अधिक मास के लिए पुराणों में बड़ी ही सुंदर कथा सुनने को मिलती है। यह कथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने एक बार ब्रह्मा जी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर लिया और उनसे अमरता का वरदान मांगा। चूंकि अमरता का वरदान देना निषिद्ध है, इसीलिए ब्रह्मा जी ने उसे कोई भी अन्य वर मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके। इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार यानि आधा पुरूष और आधे शेर के रूप में प्रकट होकर, शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीन कर उसे मृत्यु के द्वार भेज दिया।

अधिकमास का महत्व क्या और क्यों है?

हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी सम्मिलित हैं। अपनी प्रकृति के अनुरूप ही ये पांचों तत्व प्रत्येक जीव की प्रकृति न्यूनाधिक रूप से निश्चित करते हैं। अधिकमास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन- मनन, ध्यान, योग आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। इस पूरे मास में अपने धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयासों से प्रत्येक व्यक्ति अपनी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति और निर्मलता के लिए उद्यत होता है। इस तरह अधिकमास के दौरान किए गए प्रयासों से व्यक्ति हर तीन साल में स्वयं को बाहर से स्वच्छ कर परम निर्मलता को प्राप्त कर नई उर्जा से भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है।

अधिकमास में क्या करना उचित और संपूर्ण फलदायी होता है

आमतौर पर अधिकमास में हिंदू श्रद्धालु व्रत- उपवास, पूजा- पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ- हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।

शाही स्नान का महात्मय..... . शाही स्नान का पर्व था। राम घाट पर भारी भीड़ लग रही थी। शिव पार्वती आकाश से गुजरे। पार्वती ने इतनी भीड़ का कारण पूछा - आशुतोष ने कहा - सिंघस्त कुम्भ पर्व पर शाही स्नान करने वाले स्वर्ग जाते है। उसी लाभ के लिए यह स्नानार्थियों की भीड़ जमा है। पार्वती का कौतूहल तो शान्त हो गया पर नया संदेह उपज पड़ा, इतनी भीड़ के लायक स्वर्ग में स्थान कहाँ है? फिर लाखों वर्षों से लाखों लाख लोग इस आधार पर स्वर्ग पहुँचते तो उनके लिए स्थान भी तो कहीं रहता? छोटे से स्वर्ग में यह कैसे बनेगा? भगवती ने अपनानया सन्देह प्रकट किया और समाधान चाहा। भगवान शिव बोले - शरीर को गीला करना एक बात है और मन की मलीनता धोने वाला स्नान जरूरी है। मन को धोने वाले ही स्वर्ग जाते हैं। वैसे लोग जो होंगे उन्हीं को स्वर्ग मिलेगा। सन्देह घटा नहीं, बढ़ गया। पार्वती बोलीं - यह कैसे पता चले कि किसने शरीर धोया किसने मन संजोया। यह कार्य से जाना जाता है। शिवजी ने इस उत्तर से भी समाधान न होते देखकर प्रत्यक्ष उदाहरण से लक्ष्य समझाने का प्रयत्न किया। मार्ग में शिव कुरूप कोढ़ी बनकर पढ़ रहे। पार्वती को और भी सुन्दर सजा दिया। दोनों बैठे थे। स्नानार्थियों की भीड़ उन्हें देखने के लिए रुकती। अनमेल स्थिति के बारे में पूछताछ करती। पार्वती जी रटाया हुआ विवरण सुनाती रहतीं। यह कोढ़ी मेरा पति है। गंगा स्नान की इच्छा से आए हैं। गरीबी के कारण इन्हें कंधे पर रखकर लाई हूँ। बहुत थक जाने के कारण थोड़े विराम के लिए हम लोग यहाँ बैठे हैं। अधिकाँश दर्शकों की नीयत डिगती दिखती। वे सुन्दरी को प्रलोभन देते और पति को छोड़कर अपने साथ चलने की बात कहते। पार्वती लज्जा से गढ़ गई। भला ऐसे भी लोग स्नान को आते हैं क्या? निराशा देखते ही बनती थी। संध्या हो चली। एक उदारचेता आए। विवरण सुना तो आँखों में आँसू भर लाए। सहायता का प्रस्ताव किया और कोढ़ी को कंधे पर लादकर तट तक पहुँचाया। जो सत्तू साथ में था उसमें से उन दोनों को भी खिलाया। साथ ही सुन्दरी को बार-बार नमन करते हुए कहा - आप जैसी देवियां ही इस धरती की स्तम्भ हैं। धन्य हैं आप जो इस प्रकार अपना धर्म निभा रही हैं। प्रयोजन पूरा हुआ। शिव पार्वती उठे और कैलाश की ओर चले गए। रास्ते में कहा - पार्वती इतनों में एक ही व्यक्ति ऐसा था, जिसने मन धोया और स्वर्ग का रास्ता बनाया। स्नान का महात्म्य तो सही है पर उसके साथ मन भी धोने की शर्त लगी है। पार्वती तो समझ गई कि स्नान महात्म्य सही होते हुए भी... क्यों लोग उसके पुण्य फल से वंचित रहते हैं?

शाही स्नान का महात्मय.....
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शाही स्नान का पर्व था। राम घाट पर भारी भीड़ लग रही थी।
शिव पार्वती आकाश से गुजरे। पार्वती ने इतनी भीड़ का कारण पूछा - आशुतोष ने कहा - सिंघस्त कुम्भ पर्व पर शाही स्नान करने वाले स्वर्ग जाते है। उसी लाभ के लिए यह स्नानार्थियों की भीड़ जमा है।
पार्वती का कौतूहल तो शान्त हो गया पर नया संदेह उपज पड़ा, इतनी भीड़ के लायक स्वर्ग में स्थान कहाँ है? फिर लाखों वर्षों से लाखों लाख लोग इस आधार पर स्वर्ग पहुँचते तो उनके लिए स्थान भी तो कहीं रहता?
छोटे से स्वर्ग में यह कैसे बनेगा? भगवती ने अपनानया सन्देह प्रकट किया और समाधान चाहा।
भगवान शिव बोले - शरीर को गीला करना एक बात है और मन की मलीनता धोने वाला स्नान जरूरी है। मन को धोने वाले ही स्वर्ग जाते हैं। वैसे लोग जो होंगे उन्हीं को स्वर्ग मिलेगा।
सन्देह घटा नहीं, बढ़ गया।
पार्वती बोलीं - यह कैसे पता चले कि किसने शरीर धोया किसने मन संजोया।
यह कार्य से जाना जाता है। शिवजी ने इस उत्तर से भी समाधान न होते देखकर प्रत्यक्ष उदाहरण से लक्ष्य समझाने का प्रयत्न किया।
मार्ग में शिव कुरूप कोढ़ी बनकर पढ़ रहे। पार्वती को और भी सुन्दर सजा दिया। दोनों बैठे थे। स्नानार्थियों की भीड़ उन्हें देखने के लिए रुकती। अनमेल स्थिति के बारे में पूछताछ करती।
पार्वती जी रटाया हुआ विवरण सुनाती रहतीं। यह कोढ़ी मेरा पति है। गंगा स्नान की इच्छा से आए हैं। गरीबी के कारण इन्हें कंधे पर रखकर लाई हूँ। बहुत थक जाने के कारण थोड़े विराम के लिए हम लोग यहाँ बैठे हैं।
अधिकाँश दर्शकों की नीयत डिगती दिखती। वे सुन्दरी को प्रलोभन देते और पति को छोड़कर अपने साथ चलने की बात कहते।
पार्वती लज्जा से गढ़ गई। भला ऐसे भी लोग स्नान को आते हैं क्या? निराशा देखते ही बनती थी।
संध्या हो चली। एक उदारचेता आए। विवरण सुना तो आँखों में आँसू भर लाए। सहायता का प्रस्ताव किया और कोढ़ी को कंधे पर लादकर तट तक पहुँचाया। जो सत्तू साथ में था उसमें से उन दोनों को भी खिलाया।
साथ ही सुन्दरी को बार-बार नमन करते हुए कहा - आप जैसी देवियां ही इस धरती की स्तम्भ हैं। धन्य हैं आप जो इस प्रकार अपना धर्म निभा रही हैं।
प्रयोजन पूरा हुआ। शिव पार्वती उठे और कैलाश की ओर चले गए। रास्ते में कहा - पार्वती इतनों में एक ही व्यक्ति ऐसा था, जिसने मन धोया और स्वर्ग का रास्ता बनाया। स्नान का महात्म्य तो सही है पर उसके साथ मन भी धोने की शर्त लगी है।
पार्वती तो समझ गई कि स्नान महात्म्य सही होते हुए भी... क्यों लोग उसके पुण्य फल से वंचित रहते हैं?

Friday, May 18, 2018

मैं का आत्मविश्लेषण अत्यंत ही जटिल है,,क्योकि मैं ही सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड पर असंतोष का कारण है जिस दिन ये हमारे मन मस्तिष्क से बाहर हो जाएगा ,,उसी क्षण इस चराचर जगत में शांति और संतोष का वास होगा,,,आइए हम जानने का प्रयास करते है कि मैं की उपज का कारण क्या है,,मेरा मानना यही है कि जहाँ पर असंतोष,,,दम्भ,,विचारों में अस्थिरता ,,इर्श्या,, कट्टरता होती है वही से मैं,,,हम से अलग होकर उपजता है,,,आखिर मैं क्या है(हम=मैं+मैं) ये सीधी सी परिभाषा है या ये इस सूत्र के आधार पर समझा जा सकता है,,लेकिन इसके दुष्परिणाम अत्यंत ही खतरनाक है,,,क्योकि उसमे हम अकेले पड़ जाते है ,,

मैं का आत्मविश्लेषण अत्यंत ही जटिल है,,क्योकि मैं ही  सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड पर असंतोष का कारण है जिस दिन ये हमारे मन मस्तिष्क से बाहर हो जाएगा ,,उसी क्षण इस चराचर जगत में शांति और संतोष का वास होगा,,,आइए हम जानने का प्रयास करते है कि मैं की उपज का कारण क्या है,,मेरा मानना यही है कि जहाँ पर असंतोष,,,दम्भ,,विचारों में अस्थिरता ,,इर्श्या,, कट्टरता होती है वही से मैं,,,हम से अलग होकर उपजता है,,,आखिर मैं क्या है(हम=मैं+मैं) ये सीधी सी परिभाषा है या ये इस सूत्र के आधार पर समझा जा सकता है,,लेकिन इसके दुष्परिणाम अत्यंत ही खतरनाक है,,,क्योकि उसमे हम अकेले पड़ जाते है ,,

Wednesday, May 16, 2018

Hi! The following items under GST require attention before close of the financial year on the 31st of March. Reconciliation 1. Reconcile all your ledgers on portal (such as cash, credit or liability) with your accounts so as complete accounting. Composition Levy 2. Decision regarding opting or withdrawal for composition. LUT 3. LUT, If not already obtained and made zero-rated supply without IGST then take LUT now before 31st March or LUT earlier obtained was for FY 17-18 and now to be reissued for FY 2018-19. Reconcile all GSTR-3B 4. Reconcile all your 3B already filed. Prepare a consolidated sheet containing correct amount of Outward and Inward Supplies. Take correct output and input tax, in comparison to earlier wrong amounts taken. Then take effect of this consolidated amount(s) in 3B to be filed in March 18. Reversal of ITC 5.1 Prepare yearly chart and determine further reversal or reduction in reversal amount. 5.2 After issuance of tax invoice, if receiver does not make the full payment of amount within 180 days then the credit taken on that invoice is to be reversed. And whenever the payment is made, the receiver can take the credit of the amount. Therefore, the aging analysis of creditors is to be done. All old invoices issued before 1st October, 2017, should be paid before 31st March 2018. GSTR 2A 6. Check GSTR-2A for matching credit claimed by you in 3B and credit passed by your suppliers in their respective GSTR1. In case of mismatch take corrective actions in the form of either reversal of credit, if not available, or ensure supplier corrects the mistake in their respective GSTR1 of next month in Table called Amended Invoices. TRAN-2 7. Filing TRAN2 so as to claim deemed credit u/s 140(3) proviso, w.r.t. traders only. 60/40 Credit, which is required to be passed to consumers in the form of Reduced Prices. Surrender of GSTIN 8. If you have obtained fresh GST registration or migrated from previous regime then can surrender the same. New Series for Tax Invoice 9. If anyone wants to change the series for billing in the new year, then he can do that from 1st April. New numbering should be started from 1st April. Monthly/ Quarterly Returns 10. Taxpayers should check the turnover for the year 2017-18. If the aggregate turnover is above Rs. 1.5 Crore then the taxpayers have to file monthly return. If the aggregate turnover is below Rs. 1.5 Crore then the taxpayers have an option to file the quarterly GST returns. GSTR 6 11. Input service distributor has to file GST return in form GSTR 6. So 31st March is the due date to file GSTR 6 from July 2017 to February 2018. Depreciation on Capital Assets 12. At the time of calculating depreciation on the capital goods (other than building), if ITC has been claimed, then the ITC claimed needs to be ignored at the time of calculating depreciation. DVAT 13 Remove DVAT mismatches and complete DVAT assessments for the year 2013-14. Hope this helps. Thanks

Hi!

The following items under GST require attention before close of the financial year on the 31st of March.

Reconciliation

1. Reconcile all your ledgers on portal (such as cash, credit or liability) with your accounts so as complete accounting.

Composition Levy

2. Decision regarding opting or withdrawal for composition.

LUT

3. LUT, If not already obtained and made zero-rated supply without IGST then take LUT now before 31st March or LUT earlier obtained was for FY 17-18 and now to be reissued for FY 2018-19.

Reconcile all GSTR-3B

4. Reconcile all your 3B already filed. Prepare a consolidated sheet containing correct amount of Outward and Inward Supplies. Take correct output and input tax, in comparison to earlier wrong amounts taken. Then take effect of this consolidated amount(s) in 3B to be filed in March 18.

Reversal of ITC

5.1 Prepare yearly chart and determine further reversal or reduction in reversal amount.

5.2 After issuance of tax invoice, if receiver does not make the full payment of amount within 180 days then the credit taken on that invoice is to be reversed. And whenever the payment is made, the receiver can take the credit of the amount. Therefore, the aging analysis of creditors is to be done. All old invoices  issued before 1st October, 2017, should be paid before 31st March 2018.

GSTR 2A

6. Check GSTR-2A for matching credit claimed by you in 3B and credit passed by your suppliers in their respective GSTR1. In case of mismatch take corrective actions in the form of either reversal of credit, if not available, or ensure supplier corrects the mistake in their respective GSTR1 of next month in Table called Amended Invoices.

TRAN-2

7. Filing TRAN2 so as to claim deemed credit u/s 140(3) proviso, w.r.t. traders only. 60/40 Credit, which is required to be passed to consumers in the form of Reduced Prices.

Surrender of GSTIN

8. If you have obtained fresh GST registration or migrated from previous regime then can surrender the same. 

New Series for Tax Invoice

9. If anyone wants to change the series for billing in the new year, then he can do that from 1st April. New numbering should be started from 1st April.

Monthly/ Quarterly Returns

10. Taxpayers should check the turnover for the year 2017-18. If the aggregate turnover is above Rs. 1.5 Crore then the taxpayers have to file monthly return. If the aggregate turnover is below Rs. 1.5 Crore then the taxpayers have an option to file the quarterly GST returns.

GSTR 6

11. Input service distributor has to file GST return in form GSTR 6. So 31st March is the due date to file GSTR 6 from July 2017 to February 2018.

Depreciation on Capital Assets

12. At the time of calculating depreciation on the capital goods (other than building), if ITC has been claimed, then the ITC claimed needs to be ignored at the time of calculating depreciation.

DVAT

13 Remove DVAT mismatches and complete DVAT assessments for the year 2013-14.

Hope this helps.

Thanks

Monday, May 14, 2018

दैनिक समसामयिकी 15 May 2018(Tuesday) 1.कश्मीरियों के विशेष अधिकार पर वार्ताकार कर रहे चर्चा • केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जम्मू-कश्मीर के लिए उसके वार्ताकार संविधान के अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाले संवेदनशील मसले पर सभी पक्षकारों के साथ र्चचा कर रहे हैं। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर विधानमंडल को अपने स्थाई निवासियों को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार देने का अधिकार प्रदान करता है। • चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानिवलकर और धनन्जय चन्द्रचूड़ की बेंच के समक्ष अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि केन्द्र द्वारा नियुक्त वार्ताकार कश्मीर मसले के समाधान के लिए सभी पक्षकारों से बात कर रहे हैं। वह इन मुद्दों पर भी र्चचा कर रहे हैं और यह प्रक्रिया चल रही है। • केन्द्र ने पिछले साल 23 अक्टूबर को गुप्तचर ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को जम्मू कश्मीर के लिए वार्ताकार नियुक्त किया था। राष्ट्रपति के एक आदेश के माध्यम से 1954 में संविधान में अनुच्छेद 35(ए) शामिल किया गया था। यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर के निवासियों को विशेष अधिकार प्रदान करता है और राज्य से बाहर के व्यक्ति से विवाह करने वाली महिलाओं को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करता है। • यह प्रावधान उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट इस अनुच्छेद की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली वी द सिटीजन्स की याचिका के साथ ही कई अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। कई समूहों ने भी इस अनुच्छेद के समर्थन में याचिकाएं दायर की हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि आप सभी ने देखा है कि कश्मीर में क्या हो रहा है। • वार्ताकार इस पर र्चचा कर रहे हैं। इस पर अदालत ने याचिकाओं पर सुनवाई छह अगस्त के लिए स्थगित कर दी। जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने सुनवाई के दौरान संविधान पीठ के दो फैसलों का हवाला दिया और कहा कि अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाली याचिकाओं में उठाए गए बिन्दु इन फैसलों के दायरे में आते हैं। • राज्य सरकार की ही ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफडे ने कहा कि 1927 से ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट है और इस तरह से इसका फैसला नहीं किया जा सकता। एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि यह बड़ी विचित्र स्थिति है कि 1947 में पाकिस्तान पलायन कर गया जम्मू कश्मीर का कोई व्यक्ति कानून के तहत यहां आकर बस सकता है परंतु पीढ़ियों से यहां रहने वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। • उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद भी छात्रों को सरकारी मेडिकल कालेज में सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं मिल सकता क्योंकि वे राज्य के स्थाई निवासी नहीं है। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मानवीय मुद्दा है क्योंकि पांच लाख लोग राज्य से पलायन कर चुके हैं और वे दिल्ली जैसी जगहों पर रह रहे हैं लेकिन वे घाटी में लौट नहीं सकते हैं। 2. पवन व सौर ऊर्जा के लिए नीति जारी • सरकार ने अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में तेजी लाने के इरादे से आज राष्ट्रीय पवन और सौर हाइब्रिड नीति जारी की। नीति का मकसद ऐसा मसौदा तैयार करना है जिससे ग्रिड से जुड़े बड़े पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों को प्रोत्साहन मिले। इससे पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचा और भूमि का अधिक अच्छे ढंग से उपयोग हो सकेगा। • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार पुन: इससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढाव कम होंगे और ग्रिड स्थिरता बढ़ेगी। मंत्रालय के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इससे ग्रिड की सुरक्षा तथा स्थिरता को लेकर कुछ चुनौतियां हैं। इससे निपटने के लिए उपयुक्त नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत है। • पवन और सौर हाइब्रिड ऊर्जा से आशय ऐसे संयंत्र से है जिसमें एक ही जगह इन दोनों स्रेतों से बिजली पैदा की जाती है। एक स्रेत की बिजली क्षमता दूसरे स्रोत की बिजली क्षमता की कम-से-कम 25 प्रतिशत होने पर उसे हाइब्रिड परियोजना कहा जाएगा।उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्रेतों से 1,75,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 1,00,000 मेगावाट सौर ऊर्जा से तथा 60,000 मेगावाट पवन ऊर्जा से सृजित करने का लक्ष्य है। • पिछले वित्त वर्ष में अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़कर 70,000 मेगावाट पहुंच गई। यहां जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार तकनीकी दृष्टि से यह नीति एसी तथा डीसी स्तर पर पवन व सौर ऊर्जा दोनों के जुड़ाव की बात करती है। • नीति नई हाइब्रिड परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पवन और सौर परियोजनाओं को हाइब्रिड बनाने को प्रोत्साहित करती है। यह नीति हाइब्रिड परियोजना में पवन और सौर कल-पुर्जों के उपयोग में लचीलापन उपलब्ध कराती है। 3. निवेश व खपत बढ़ने से आएगा इकोनामी में सुधार • औद्योगिक उत्पादन में मार्च महीने में सुस्ती रहने के बावजूद जनवरी-मार्च तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि बढ़कर 7.7 फीसद रहने की उम्मीद है। इससे पिछली तिमाही में यह 7.2 फीसद थी।वित्तीय सेवा प्रदाता नोमुरा ने एक रपट में यह अनुमान जताया है। • नोमुरा के मुताबिक, ‘‘मार्च में औद्योगिक उत्पादन में नरमी के बावजूद जनवरी-मार्च में औसत औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 6.2 फीसद रही जो कि चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसम्बर) के 5.9 फीसद से अधिक है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि औसत औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि से पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में समग्र औद्योगिक गतिविधियां मजबूत हुई हैं जो कि पहली तिमाही में जीडीपी के बढ़कर 7.7 फीसद रहने के हमारे विचार का समर्थन करती है। • निवेश और खपत के चलते देश में क्रमिक सुधार की उम्मीद है। हालांकि कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कठिन वित्तीय स्थिति जैसे कारकों के चलते वृद्धि दर में गिरावट हो सकती है। हालांकि निकट अवधि में वृद्धि परिदृश्य को लेकर हमारा नजरिया अभी भी आशावादी है, हमें उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि को सुस्त करने वाली कठिन वित्तीय स्थिति एवं कच्चे तेल में तेजी का विपरीत प्रभाव आगे चलकर फीका पड़ जाएगा। • ’आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूंजीगत सामान उत्पादन में गिरावट तथा खनन गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण मार्च महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि धीमी रहकर 4.4 फीसद पर रही जो कि पांच महीने का निचला स्तर है। 4. पुतिन के बुलावे पर रूस जाएंगे पीएम, 21 को होगी बैठक • चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वुहान में अनौपचारिक बैठक करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ इसी तरह की बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक रूस के शहर सोची में 21 मई को होगी। • माना जा रहा है कि मोदी-चिनफिंग बैठक की तरह ही यह मुलाकात भी द्विपक्षीय रिश्तों में नई सोच भरने वाली साबित होगी। पुतिन के साथ पहली बार अनौपचारिक मुलाकात का एलान कर भारत संभवत: यह संदेश भी देना चाहता है कि उसकी विदेश नीति दूसरे देश की नीतियों से प्रभावित नहीं होती। • मोदी और पुतिन की यह बैठक सिर्फ इन दोनों देशों के रिश्तों को देखते हुए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर बदलाव हुए हैं उसे देखते हुए भी इसकी अहमियत बढ़ जाती है। हाल ही में रूस और अमेरिका के बीच तल्खी बढ़ी है। अमेरिका की तरफ से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की शुरुआत हो चुकी है। • अमेरिका ने हाल ही में ईरान के साथ परमाणु करार तोड़ा है, जबकि रूस ईरान का पक्षधर है। मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात में अमेरिका के इन दोनों कदमों से उपजी स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने के आसार हैं। भारत अभी भी अपनी रक्षा जरूरत का 63 फीसद साजोसामान रूस से खरीदता है। • रूस से एस 400 मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इस पर अमेरिकी प्रतिबंध से असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रलय ने कहा है, ‘राष्ट्रपति पुतिन के आमंत्रण पर मोदी उनके साथ अनौपचारिक बैठक के लिए शहर सोची पहुंचेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक साङोदारी वाले द्विपक्षीय रिश्तों को ज्यादा प्रगाढ़ करने व राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।’ • बताते चलें कि मोदी और पुतिन की अगले महीने के मध्य में चीन में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (सीएसओ) की शीर्ष बैठक में भी मुलाकात होगी, लेकिन मोदी की उसके पहले पुतिन से होने वाली यह विशेष मुलाकात इस बात को मजबूती से बताती है कि भारत अभी किसी भी एक धुरी के साथ नहीं है। • यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका के बीच कोई शीर्ष स्तरीय बैठक नहीं हुई है। अप्रैल, 2018 में भारत व अमेरिका के रक्षा व विदेश मंत्रियों की अगुआई में अहम रणनीतिक वार्ता होनी थी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री के बदले जाने के बाद यह स्थगित हो गई। • सूत्रों का कहना है कि मोदी और पुतिन की अनौपचारिक बैठक के एजेंडे में सबसे अहम यह होगा कि दोनों के रिश्ते में हाल के वर्षो में आई शिथिलता को दूर कैसे किया जाए? ईरान पर अमेरिकी रुख का मुद्दा भी उठेगा। • भारत ने हाल के महीनों में ईरान और रूस के साथ कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं पर विचार करना शुरू किया है, लेकिन अमेरिका इसको लेकर सकारात्मक नहीं है • चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग के बाद अहम है मोदी-पुतिन की मुलाकात • sईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों को देखते हुए भारत का कदम अहम 5. इराक चुनाव में मुक्तदा अल-सद्र गठबंधन आगे • इराक में 12 मई को हुए संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी के शिया प्रतिद्वंद्वियों को बड़ी बढ़त मिली है। बीबीसी ने चुनाव अधिकारियों के हवाले से बताया, अधिकतर मतों की गणना हो गई है और शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे है।निर्वाचन आयोग का कहना है कि अल अबादी का शासकीय गठबंधन तीसरे स्थान पर है। • देश में 2017 में इस्लामिक स्टेट पर जीत के बाद से शनिवार को पहली बार देश में चुनाव हुए। चुनाव के अंतिम नतीजों की घोषणा शाम को की जाएगी। रविवार को हुए चुनाव का मतदान प्रतिशत 44.5 फीसदी था, जो पिछले चुनाव की तुलना में काफी कम है। • इराक के लोगों ने बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को वोट किया, जिनमें बड़ी संख्या में शिया और सुन्नी हैं। मतदान के शुरुआती नतीजों में ही अल-सदर के गठबंधन को बढ़त दिखाई गई थी। उनके समर्थकों ने बगदाद में जश्न मनाया। साल 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद अल-सद्र र्चचा में आए थे। • रिपोर्टों के मुताबिक, मिलिशिया नेता हादी अल-अमीरी का गठबंधन दूसरे स्थान पर है। बीबीसी के मुताबिक, अल-अबादी की शिया सरकार ने आईएस आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लेकर वाहवाही बटोरी थी। • रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा स्थिति में सुधार के बावजूद आईएस के खिलाफ चार साल के युद्ध के बाद भी इराक खुद को दोबारा खड़े करने को लेकर जूझ रहा है। 6. चीन ने माना, स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था • भारतीय अर्थव्यवस्था नई उड़ान भरने को तैयार है और वह स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाली है। ऐसे में निवेशकों को जमकर पैसा लगाना चाहिए। यह अपील किसी और की नहीं बल्कि चीन के शीर्ष सरकारी बैंक की है। भारत में निवेश की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए चीन का यह बैंक खास तैयारी कर रहा है। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चायना (आइसीबीसी) ने भारत समर्पित निवेश फंड लांच किया है। इसमें चीन के लोग निवेश कर सकेंगे। यह राशि भारत में निवेश की जाएगी। परिसंपत्तियों के लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा बैंक है। • भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए चीन के बैंक का यह कदम इस वजह से खास अहम माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अनौपचारिक वार्ता होने के महज एक सप्ताह बाद यह पहल की गई है। दोनों देशों के नेताओं ने आर्थिक संभावनाओं के दोहन के लिए द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर दिया था। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड यूरोप और अमेरिका के 20 से ज्यादा स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध उन एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में निवेश करेगा जो भारतीय बाजारों पर आधारित हैं। • चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार भारत में निवेश के लिए चीन का यह पहला पब्लिकली ऑफर्ड फंड है। यह फंड भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य में निवेश करेगा। एक फंड मैनेजर के हवाले से अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फंड भारतीय बाजार में समग्र औद्योगिक बुनियादी विकास पर नजर रखेगा। बैंक ने इंडेक्स में प्रमुख उद्योगों के महत्व के लिहाज से विभिन्न सेक्टरों को निवेश के लिए सूचीबद्ध किया है। इसमें वित्तीय क्षेत्र को सबसे ज्यादा अहमियत मिल सकती है। इसके बाद आइटी, वैकल्पिक उपभोग, एनर्जी, आवश्यक उपभोग, कच्चा माल, फार्मास्युटिकल्स, हेल्थकेयर और अन्य उद्योगों पर फोकस होगा। • दुनिया के सबसे बड़े इस चीनी बैंक आइसीबीसी की परिसंपत्तियां 3.6 लाख करोड़ डॉलर (241 लाख करोड़ रुपये) हैं। बैंक ने फंड लांच करते हुए भारत की शानदार तस्वीर पेश की है। आइसीबीसी क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड में सात मई से 25 मई के बीज निवेश किया जा सकता है। • आइसीबीसी के एक लेख के अनुसार तमाम विदेशी बाजारों में भारत दुनिया की दूसरी सबसे उभरती अर्थव्यवस्था है। वह आर्थिक विकास के अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाला है। यह एक ऐसा देश है जहां घरेलू और विदेशी पूंजी के बीच स्पर्धा है। 2017 से ग्लोबल रिकवरी के साथ उभरती अर्थव्यवस्था को फायदा मिल रहा है। इनमें भारत का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। Sorce of the News (With Regards):- compile by Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

दैनिक समसामयिकी

15 May 2018(Tuesday)

1.कश्मीरियों के विशेष अधिकार पर वार्ताकार कर रहे चर्चा
• केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जम्मू-कश्मीर के लिए उसके वार्ताकार संविधान के अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाले संवेदनशील मसले पर सभी पक्षकारों के साथ र्चचा कर रहे हैं। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर विधानमंडल को अपने स्थाई निवासियों को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार देने का अधिकार प्रदान करता है।
• चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानिवलकर और धनन्जय चन्द्रचूड़ की बेंच के समक्ष अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि केन्द्र द्वारा नियुक्त वार्ताकार कश्मीर मसले के समाधान के लिए सभी पक्षकारों से बात कर रहे हैं। वह इन मुद्दों पर भी र्चचा कर रहे हैं और यह प्रक्रिया चल रही है।
• केन्द्र ने पिछले साल 23 अक्टूबर को गुप्तचर ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को जम्मू कश्मीर के लिए वार्ताकार नियुक्त किया था। राष्ट्रपति के एक आदेश के माध्यम से 1954 में संविधान में अनुच्छेद 35(ए) शामिल किया गया था। यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर के निवासियों को विशेष अधिकार प्रदान करता है और राज्य से बाहर के व्यक्ति से विवाह करने वाली महिलाओं को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करता है।
• यह प्रावधान उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट इस अनुच्छेद की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली वी द सिटीजन्स की याचिका के साथ ही कई अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। कई समूहों ने भी इस अनुच्छेद के समर्थन में याचिकाएं दायर की हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि आप सभी ने देखा है कि कश्मीर में क्या हो रहा है।
• वार्ताकार इस पर र्चचा कर रहे हैं। इस पर अदालत ने याचिकाओं पर सुनवाई छह अगस्त के लिए स्थगित कर दी। जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने सुनवाई के दौरान संविधान पीठ के दो फैसलों का हवाला दिया और कहा कि अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाली याचिकाओं में उठाए गए बिन्दु इन फैसलों के दायरे में आते हैं।
• राज्य सरकार की ही ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफडे ने कहा कि 1927 से ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट है और इस तरह से इसका फैसला नहीं किया जा सकता। एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि यह बड़ी विचित्र स्थिति है कि 1947 में पाकिस्तान पलायन कर गया जम्मू कश्मीर का कोई व्यक्ति कानून के तहत यहां आकर बस सकता है परंतु पीढ़ियों से यहां रहने वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती।
• उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद भी छात्रों को सरकारी मेडिकल कालेज में सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं मिल सकता क्योंकि वे राज्य के स्थाई निवासी नहीं है। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मानवीय मुद्दा है क्योंकि पांच लाख लोग राज्य से पलायन कर चुके हैं और वे दिल्ली जैसी जगहों पर रह रहे हैं लेकिन वे घाटी में लौट नहीं सकते हैं।

2. पवन व सौर ऊर्जा के लिए नीति जारी
• सरकार ने अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में तेजी लाने के इरादे से आज राष्ट्रीय पवन और सौर हाइब्रिड नीति जारी की। नीति का मकसद ऐसा मसौदा तैयार करना है जिससे ग्रिड से जुड़े बड़े पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों को प्रोत्साहन मिले। इससे पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचा और भूमि का अधिक अच्छे ढंग से उपयोग हो सकेगा।
• नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार पुन: इससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढाव कम होंगे और ग्रिड स्थिरता बढ़ेगी। मंत्रालय के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इससे ग्रिड की सुरक्षा तथा स्थिरता को लेकर कुछ चुनौतियां हैं। इससे निपटने के लिए उपयुक्त नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत है।
• पवन और सौर हाइब्रिड ऊर्जा से आशय ऐसे संयंत्र से है जिसमें एक ही जगह इन दोनों स्रेतों से बिजली पैदा की जाती है। एक स्रेत की बिजली क्षमता दूसरे स्रोत  की बिजली क्षमता की कम-से-कम 25 प्रतिशत होने पर उसे हाइब्रिड परियोजना कहा जाएगा।उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्रेतों से 1,75,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 1,00,000 मेगावाट सौर ऊर्जा से तथा 60,000 मेगावाट पवन ऊर्जा से सृजित करने का लक्ष्य है।
•  पिछले वित्त वर्ष में अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़कर 70,000 मेगावाट पहुंच गई। यहां जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार तकनीकी दृष्टि से यह नीति एसी तथा डीसी स्तर पर पवन व सौर ऊर्जा दोनों के जुड़ाव की बात करती है।
• नीति नई हाइब्रिड परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पवन और सौर परियोजनाओं को हाइब्रिड बनाने को प्रोत्साहित करती है। यह नीति हाइब्रिड परियोजना में पवन और सौर कल-पुर्जों  के उपयोग में लचीलापन उपलब्ध कराती है।

3. निवेश व खपत बढ़ने से आएगा इकोनामी में सुधार
• औद्योगिक उत्पादन में मार्च महीने में सुस्ती रहने के बावजूद जनवरी-मार्च तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि बढ़कर 7.7 फीसद रहने की उम्मीद है। इससे पिछली तिमाही में यह 7.2 फीसद थी।वित्तीय सेवा प्रदाता नोमुरा ने एक रपट में यह अनुमान जताया है।
• नोमुरा के मुताबिक, ‘‘मार्च में औद्योगिक उत्पादन में नरमी के बावजूद जनवरी-मार्च में औसत औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 6.2 फीसद रही जो कि चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसम्बर) के 5.9 फीसद से अधिक है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि औसत औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि से पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में समग्र औद्योगिक गतिविधियां मजबूत हुई हैं जो कि पहली तिमाही में जीडीपी के बढ़कर 7.7 फीसद रहने के हमारे विचार का समर्थन करती है।
• निवेश और खपत के चलते देश में क्रमिक सुधार की उम्मीद है। हालांकि कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कठिन वित्तीय स्थिति जैसे कारकों के चलते वृद्धि दर में गिरावट हो सकती है। हालांकि निकट अवधि में वृद्धि परिदृश्य को लेकर हमारा नजरिया अभी भी आशावादी है, हमें उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि को सुस्त करने वाली कठिन वित्तीय स्थिति एवं कच्चे तेल में तेजी का विपरीत प्रभाव आगे चलकर फीका पड़ जाएगा।
• ’आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूंजीगत सामान उत्पादन में गिरावट तथा खनन गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण मार्च महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि धीमी रहकर 4.4 फीसद पर रही जो कि पांच महीने का निचला स्तर है।

4. पुतिन के बुलावे पर रूस जाएंगे पीएम, 21 को होगी बैठक
• चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वुहान में अनौपचारिक बैठक करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ इसी तरह की बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक रूस के शहर सोची में 21 मई को होगी।
• माना जा रहा है कि मोदी-चिनफिंग बैठक की तरह ही यह मुलाकात भी द्विपक्षीय रिश्तों में नई सोच भरने वाली साबित होगी। पुतिन के साथ पहली बार अनौपचारिक मुलाकात का एलान कर भारत संभवत: यह संदेश भी देना चाहता है कि उसकी विदेश नीति दूसरे देश की नीतियों से प्रभावित नहीं होती।
• मोदी और पुतिन की यह बैठक सिर्फ इन दोनों देशों के रिश्तों को देखते हुए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर बदलाव हुए हैं उसे देखते हुए भी इसकी अहमियत बढ़ जाती है। हाल ही में रूस और अमेरिका के बीच तल्खी बढ़ी है। अमेरिका की तरफ से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की शुरुआत हो चुकी है।
• अमेरिका ने हाल ही में ईरान के साथ परमाणु करार तोड़ा है, जबकि रूस ईरान का पक्षधर है। मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात में अमेरिका के इन दोनों कदमों से उपजी स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने के आसार हैं। भारत अभी भी अपनी रक्षा जरूरत का 63 फीसद साजोसामान रूस से खरीदता है।
• रूस से एस 400 मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इस पर अमेरिकी प्रतिबंध से असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रलय ने कहा है, ‘राष्ट्रपति पुतिन के आमंत्रण पर मोदी उनके साथ अनौपचारिक बैठक के लिए शहर सोची पहुंचेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक साङोदारी वाले द्विपक्षीय रिश्तों को ज्यादा प्रगाढ़ करने व राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।’
• बताते चलें कि मोदी और पुतिन की अगले महीने के मध्य में चीन में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (सीएसओ) की शीर्ष बैठक में भी मुलाकात होगी, लेकिन मोदी की उसके पहले पुतिन से होने वाली यह विशेष मुलाकात इस बात को मजबूती से बताती है कि भारत अभी किसी भी एक धुरी के साथ नहीं है।
• यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका के बीच कोई शीर्ष स्तरीय बैठक नहीं हुई है। अप्रैल, 2018 में भारत व अमेरिका के रक्षा व विदेश मंत्रियों की अगुआई में अहम रणनीतिक वार्ता होनी थी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री के बदले जाने के बाद यह स्थगित हो गई।
• सूत्रों का कहना है कि मोदी और पुतिन की अनौपचारिक बैठक के एजेंडे में सबसे अहम यह होगा कि दोनों के रिश्ते में हाल के वर्षो में आई शिथिलता को दूर कैसे किया जाए? ईरान पर अमेरिकी रुख का मुद्दा भी उठेगा।
• भारत ने हाल के महीनों में ईरान और रूस के साथ कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं पर विचार करना शुरू किया है, लेकिन अमेरिका इसको लेकर सकारात्मक नहीं है
• चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग के बाद अहम है मोदी-पुतिन की मुलाकात
• sईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों को देखते हुए भारत का कदम अहम

5. इराक चुनाव में मुक्तदा अल-सद्र गठबंधन आगे
• इराक में 12 मई को हुए संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी के शिया प्रतिद्वंद्वियों को बड़ी बढ़त मिली है। बीबीसी ने चुनाव अधिकारियों के हवाले से बताया, अधिकतर मतों की गणना हो गई है और शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे है।निर्वाचन आयोग का कहना है कि अल अबादी का शासकीय गठबंधन तीसरे स्थान पर है।
• देश में 2017 में इस्लामिक स्टेट पर जीत के बाद से शनिवार को पहली बार देश में चुनाव हुए। चुनाव के अंतिम नतीजों की घोषणा शाम को की जाएगी। रविवार को हुए चुनाव का मतदान प्रतिशत 44.5 फीसदी था, जो पिछले चुनाव की तुलना में काफी कम है।
• इराक के लोगों ने बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को वोट किया, जिनमें बड़ी संख्या में शिया और सुन्नी हैं। मतदान के शुरुआती नतीजों में ही अल-सदर के गठबंधन को बढ़त दिखाई गई थी। उनके समर्थकों ने बगदाद में जश्न मनाया। साल 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद अल-सद्र र्चचा में आए थे।
• रिपोर्टों  के मुताबिक, मिलिशिया नेता हादी अल-अमीरी का गठबंधन दूसरे स्थान पर है। बीबीसी के मुताबिक, अल-अबादी की शिया सरकार ने आईएस आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लेकर वाहवाही बटोरी थी।
•  रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा स्थिति में सुधार के बावजूद आईएस के खिलाफ चार साल के युद्ध के बाद भी इराक खुद को दोबारा खड़े करने को लेकर जूझ रहा है।

6. चीन ने माना, स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था
• भारतीय अर्थव्यवस्था नई उड़ान भरने को तैयार है और वह स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाली है। ऐसे में निवेशकों को जमकर पैसा लगाना चाहिए। यह अपील किसी और की नहीं बल्कि चीन के शीर्ष सरकारी बैंक की है। भारत में निवेश की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए चीन का यह बैंक खास तैयारी कर रहा है। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चायना (आइसीबीसी) ने भारत समर्पित निवेश फंड लांच किया है। इसमें चीन के लोग निवेश कर सकेंगे। यह राशि भारत में निवेश की जाएगी। परिसंपत्तियों के लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा बैंक है।
• भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए चीन के बैंक का यह कदम इस वजह से खास अहम माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अनौपचारिक वार्ता होने के महज एक सप्ताह बाद यह पहल की गई है। दोनों देशों के नेताओं ने आर्थिक संभावनाओं के दोहन के लिए द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर दिया था। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड यूरोप और अमेरिका के 20 से ज्यादा स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध उन एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में निवेश करेगा जो भारतीय बाजारों पर आधारित हैं।
• चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार भारत में निवेश के लिए चीन का यह पहला पब्लिकली ऑफर्ड फंड है। यह फंड भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य में निवेश करेगा। एक फंड मैनेजर के हवाले से अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फंड भारतीय बाजार में समग्र औद्योगिक बुनियादी विकास पर नजर रखेगा। बैंक ने इंडेक्स में प्रमुख उद्योगों के महत्व के लिहाज से विभिन्न सेक्टरों को निवेश के लिए सूचीबद्ध किया है। इसमें वित्तीय क्षेत्र को सबसे ज्यादा अहमियत मिल सकती है। इसके बाद आइटी, वैकल्पिक उपभोग, एनर्जी, आवश्यक उपभोग, कच्चा माल, फार्मास्युटिकल्स, हेल्थकेयर और अन्य उद्योगों पर फोकस होगा।
• दुनिया के सबसे बड़े इस चीनी बैंक आइसीबीसी की परिसंपत्तियां 3.6 लाख करोड़ डॉलर (241 लाख करोड़ रुपये) हैं। बैंक ने फंड लांच करते हुए भारत की शानदार तस्वीर पेश की है। आइसीबीसी क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड में सात मई से 25 मई के बीज निवेश किया जा सकता है।
• आइसीबीसी के एक लेख के अनुसार तमाम विदेशी बाजारों में भारत दुनिया की दूसरी सबसे उभरती अर्थव्यवस्था है। वह आर्थिक विकास के अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाला है। यह एक ऐसा देश है जहां घरेलू और विदेशी पूंजी के बीच स्पर्धा है। 2017 से ग्लोबल रिकवरी के साथ उभरती अर्थव्यवस्था को फायदा मिल रहा है। इनमें भारत का प्रदर्शन सबसे अच्छा है।

Sorce of the News (With Regards):- compile by Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)