Monday, May 14, 2018

दैनिक समसामयिकी 15 May 2018(Tuesday) 1.कश्मीरियों के विशेष अधिकार पर वार्ताकार कर रहे चर्चा • केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जम्मू-कश्मीर के लिए उसके वार्ताकार संविधान के अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाले संवेदनशील मसले पर सभी पक्षकारों के साथ र्चचा कर रहे हैं। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर विधानमंडल को अपने स्थाई निवासियों को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार देने का अधिकार प्रदान करता है। • चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानिवलकर और धनन्जय चन्द्रचूड़ की बेंच के समक्ष अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि केन्द्र द्वारा नियुक्त वार्ताकार कश्मीर मसले के समाधान के लिए सभी पक्षकारों से बात कर रहे हैं। वह इन मुद्दों पर भी र्चचा कर रहे हैं और यह प्रक्रिया चल रही है। • केन्द्र ने पिछले साल 23 अक्टूबर को गुप्तचर ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को जम्मू कश्मीर के लिए वार्ताकार नियुक्त किया था। राष्ट्रपति के एक आदेश के माध्यम से 1954 में संविधान में अनुच्छेद 35(ए) शामिल किया गया था। यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर के निवासियों को विशेष अधिकार प्रदान करता है और राज्य से बाहर के व्यक्ति से विवाह करने वाली महिलाओं को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करता है। • यह प्रावधान उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट इस अनुच्छेद की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली वी द सिटीजन्स की याचिका के साथ ही कई अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। कई समूहों ने भी इस अनुच्छेद के समर्थन में याचिकाएं दायर की हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि आप सभी ने देखा है कि कश्मीर में क्या हो रहा है। • वार्ताकार इस पर र्चचा कर रहे हैं। इस पर अदालत ने याचिकाओं पर सुनवाई छह अगस्त के लिए स्थगित कर दी। जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने सुनवाई के दौरान संविधान पीठ के दो फैसलों का हवाला दिया और कहा कि अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाली याचिकाओं में उठाए गए बिन्दु इन फैसलों के दायरे में आते हैं। • राज्य सरकार की ही ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफडे ने कहा कि 1927 से ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट है और इस तरह से इसका फैसला नहीं किया जा सकता। एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि यह बड़ी विचित्र स्थिति है कि 1947 में पाकिस्तान पलायन कर गया जम्मू कश्मीर का कोई व्यक्ति कानून के तहत यहां आकर बस सकता है परंतु पीढ़ियों से यहां रहने वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। • उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद भी छात्रों को सरकारी मेडिकल कालेज में सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं मिल सकता क्योंकि वे राज्य के स्थाई निवासी नहीं है। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मानवीय मुद्दा है क्योंकि पांच लाख लोग राज्य से पलायन कर चुके हैं और वे दिल्ली जैसी जगहों पर रह रहे हैं लेकिन वे घाटी में लौट नहीं सकते हैं। 2. पवन व सौर ऊर्जा के लिए नीति जारी • सरकार ने अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में तेजी लाने के इरादे से आज राष्ट्रीय पवन और सौर हाइब्रिड नीति जारी की। नीति का मकसद ऐसा मसौदा तैयार करना है जिससे ग्रिड से जुड़े बड़े पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों को प्रोत्साहन मिले। इससे पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचा और भूमि का अधिक अच्छे ढंग से उपयोग हो सकेगा। • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार पुन: इससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढाव कम होंगे और ग्रिड स्थिरता बढ़ेगी। मंत्रालय के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इससे ग्रिड की सुरक्षा तथा स्थिरता को लेकर कुछ चुनौतियां हैं। इससे निपटने के लिए उपयुक्त नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत है। • पवन और सौर हाइब्रिड ऊर्जा से आशय ऐसे संयंत्र से है जिसमें एक ही जगह इन दोनों स्रेतों से बिजली पैदा की जाती है। एक स्रेत की बिजली क्षमता दूसरे स्रोत की बिजली क्षमता की कम-से-कम 25 प्रतिशत होने पर उसे हाइब्रिड परियोजना कहा जाएगा।उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्रेतों से 1,75,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 1,00,000 मेगावाट सौर ऊर्जा से तथा 60,000 मेगावाट पवन ऊर्जा से सृजित करने का लक्ष्य है। • पिछले वित्त वर्ष में अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़कर 70,000 मेगावाट पहुंच गई। यहां जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार तकनीकी दृष्टि से यह नीति एसी तथा डीसी स्तर पर पवन व सौर ऊर्जा दोनों के जुड़ाव की बात करती है। • नीति नई हाइब्रिड परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पवन और सौर परियोजनाओं को हाइब्रिड बनाने को प्रोत्साहित करती है। यह नीति हाइब्रिड परियोजना में पवन और सौर कल-पुर्जों के उपयोग में लचीलापन उपलब्ध कराती है। 3. निवेश व खपत बढ़ने से आएगा इकोनामी में सुधार • औद्योगिक उत्पादन में मार्च महीने में सुस्ती रहने के बावजूद जनवरी-मार्च तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि बढ़कर 7.7 फीसद रहने की उम्मीद है। इससे पिछली तिमाही में यह 7.2 फीसद थी।वित्तीय सेवा प्रदाता नोमुरा ने एक रपट में यह अनुमान जताया है। • नोमुरा के मुताबिक, ‘‘मार्च में औद्योगिक उत्पादन में नरमी के बावजूद जनवरी-मार्च में औसत औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 6.2 फीसद रही जो कि चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसम्बर) के 5.9 फीसद से अधिक है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि औसत औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि से पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में समग्र औद्योगिक गतिविधियां मजबूत हुई हैं जो कि पहली तिमाही में जीडीपी के बढ़कर 7.7 फीसद रहने के हमारे विचार का समर्थन करती है। • निवेश और खपत के चलते देश में क्रमिक सुधार की उम्मीद है। हालांकि कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कठिन वित्तीय स्थिति जैसे कारकों के चलते वृद्धि दर में गिरावट हो सकती है। हालांकि निकट अवधि में वृद्धि परिदृश्य को लेकर हमारा नजरिया अभी भी आशावादी है, हमें उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि को सुस्त करने वाली कठिन वित्तीय स्थिति एवं कच्चे तेल में तेजी का विपरीत प्रभाव आगे चलकर फीका पड़ जाएगा। • ’आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूंजीगत सामान उत्पादन में गिरावट तथा खनन गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण मार्च महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि धीमी रहकर 4.4 फीसद पर रही जो कि पांच महीने का निचला स्तर है। 4. पुतिन के बुलावे पर रूस जाएंगे पीएम, 21 को होगी बैठक • चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वुहान में अनौपचारिक बैठक करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ इसी तरह की बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक रूस के शहर सोची में 21 मई को होगी। • माना जा रहा है कि मोदी-चिनफिंग बैठक की तरह ही यह मुलाकात भी द्विपक्षीय रिश्तों में नई सोच भरने वाली साबित होगी। पुतिन के साथ पहली बार अनौपचारिक मुलाकात का एलान कर भारत संभवत: यह संदेश भी देना चाहता है कि उसकी विदेश नीति दूसरे देश की नीतियों से प्रभावित नहीं होती। • मोदी और पुतिन की यह बैठक सिर्फ इन दोनों देशों के रिश्तों को देखते हुए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर बदलाव हुए हैं उसे देखते हुए भी इसकी अहमियत बढ़ जाती है। हाल ही में रूस और अमेरिका के बीच तल्खी बढ़ी है। अमेरिका की तरफ से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की शुरुआत हो चुकी है। • अमेरिका ने हाल ही में ईरान के साथ परमाणु करार तोड़ा है, जबकि रूस ईरान का पक्षधर है। मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात में अमेरिका के इन दोनों कदमों से उपजी स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने के आसार हैं। भारत अभी भी अपनी रक्षा जरूरत का 63 फीसद साजोसामान रूस से खरीदता है। • रूस से एस 400 मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इस पर अमेरिकी प्रतिबंध से असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रलय ने कहा है, ‘राष्ट्रपति पुतिन के आमंत्रण पर मोदी उनके साथ अनौपचारिक बैठक के लिए शहर सोची पहुंचेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक साङोदारी वाले द्विपक्षीय रिश्तों को ज्यादा प्रगाढ़ करने व राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।’ • बताते चलें कि मोदी और पुतिन की अगले महीने के मध्य में चीन में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (सीएसओ) की शीर्ष बैठक में भी मुलाकात होगी, लेकिन मोदी की उसके पहले पुतिन से होने वाली यह विशेष मुलाकात इस बात को मजबूती से बताती है कि भारत अभी किसी भी एक धुरी के साथ नहीं है। • यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका के बीच कोई शीर्ष स्तरीय बैठक नहीं हुई है। अप्रैल, 2018 में भारत व अमेरिका के रक्षा व विदेश मंत्रियों की अगुआई में अहम रणनीतिक वार्ता होनी थी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री के बदले जाने के बाद यह स्थगित हो गई। • सूत्रों का कहना है कि मोदी और पुतिन की अनौपचारिक बैठक के एजेंडे में सबसे अहम यह होगा कि दोनों के रिश्ते में हाल के वर्षो में आई शिथिलता को दूर कैसे किया जाए? ईरान पर अमेरिकी रुख का मुद्दा भी उठेगा। • भारत ने हाल के महीनों में ईरान और रूस के साथ कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं पर विचार करना शुरू किया है, लेकिन अमेरिका इसको लेकर सकारात्मक नहीं है • चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग के बाद अहम है मोदी-पुतिन की मुलाकात • sईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों को देखते हुए भारत का कदम अहम 5. इराक चुनाव में मुक्तदा अल-सद्र गठबंधन आगे • इराक में 12 मई को हुए संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी के शिया प्रतिद्वंद्वियों को बड़ी बढ़त मिली है। बीबीसी ने चुनाव अधिकारियों के हवाले से बताया, अधिकतर मतों की गणना हो गई है और शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे है।निर्वाचन आयोग का कहना है कि अल अबादी का शासकीय गठबंधन तीसरे स्थान पर है। • देश में 2017 में इस्लामिक स्टेट पर जीत के बाद से शनिवार को पहली बार देश में चुनाव हुए। चुनाव के अंतिम नतीजों की घोषणा शाम को की जाएगी। रविवार को हुए चुनाव का मतदान प्रतिशत 44.5 फीसदी था, जो पिछले चुनाव की तुलना में काफी कम है। • इराक के लोगों ने बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को वोट किया, जिनमें बड़ी संख्या में शिया और सुन्नी हैं। मतदान के शुरुआती नतीजों में ही अल-सदर के गठबंधन को बढ़त दिखाई गई थी। उनके समर्थकों ने बगदाद में जश्न मनाया। साल 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद अल-सद्र र्चचा में आए थे। • रिपोर्टों के मुताबिक, मिलिशिया नेता हादी अल-अमीरी का गठबंधन दूसरे स्थान पर है। बीबीसी के मुताबिक, अल-अबादी की शिया सरकार ने आईएस आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लेकर वाहवाही बटोरी थी। • रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा स्थिति में सुधार के बावजूद आईएस के खिलाफ चार साल के युद्ध के बाद भी इराक खुद को दोबारा खड़े करने को लेकर जूझ रहा है। 6. चीन ने माना, स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था • भारतीय अर्थव्यवस्था नई उड़ान भरने को तैयार है और वह स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाली है। ऐसे में निवेशकों को जमकर पैसा लगाना चाहिए। यह अपील किसी और की नहीं बल्कि चीन के शीर्ष सरकारी बैंक की है। भारत में निवेश की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए चीन का यह बैंक खास तैयारी कर रहा है। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चायना (आइसीबीसी) ने भारत समर्पित निवेश फंड लांच किया है। इसमें चीन के लोग निवेश कर सकेंगे। यह राशि भारत में निवेश की जाएगी। परिसंपत्तियों के लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा बैंक है। • भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए चीन के बैंक का यह कदम इस वजह से खास अहम माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अनौपचारिक वार्ता होने के महज एक सप्ताह बाद यह पहल की गई है। दोनों देशों के नेताओं ने आर्थिक संभावनाओं के दोहन के लिए द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर दिया था। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड यूरोप और अमेरिका के 20 से ज्यादा स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध उन एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में निवेश करेगा जो भारतीय बाजारों पर आधारित हैं। • चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार भारत में निवेश के लिए चीन का यह पहला पब्लिकली ऑफर्ड फंड है। यह फंड भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य में निवेश करेगा। एक फंड मैनेजर के हवाले से अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फंड भारतीय बाजार में समग्र औद्योगिक बुनियादी विकास पर नजर रखेगा। बैंक ने इंडेक्स में प्रमुख उद्योगों के महत्व के लिहाज से विभिन्न सेक्टरों को निवेश के लिए सूचीबद्ध किया है। इसमें वित्तीय क्षेत्र को सबसे ज्यादा अहमियत मिल सकती है। इसके बाद आइटी, वैकल्पिक उपभोग, एनर्जी, आवश्यक उपभोग, कच्चा माल, फार्मास्युटिकल्स, हेल्थकेयर और अन्य उद्योगों पर फोकस होगा। • दुनिया के सबसे बड़े इस चीनी बैंक आइसीबीसी की परिसंपत्तियां 3.6 लाख करोड़ डॉलर (241 लाख करोड़ रुपये) हैं। बैंक ने फंड लांच करते हुए भारत की शानदार तस्वीर पेश की है। आइसीबीसी क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड में सात मई से 25 मई के बीज निवेश किया जा सकता है। • आइसीबीसी के एक लेख के अनुसार तमाम विदेशी बाजारों में भारत दुनिया की दूसरी सबसे उभरती अर्थव्यवस्था है। वह आर्थिक विकास के अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाला है। यह एक ऐसा देश है जहां घरेलू और विदेशी पूंजी के बीच स्पर्धा है। 2017 से ग्लोबल रिकवरी के साथ उभरती अर्थव्यवस्था को फायदा मिल रहा है। इनमें भारत का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। Sorce of the News (With Regards):- compile by Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

दैनिक समसामयिकी

15 May 2018(Tuesday)

1.कश्मीरियों के विशेष अधिकार पर वार्ताकार कर रहे चर्चा
• केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जम्मू-कश्मीर के लिए उसके वार्ताकार संविधान के अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाले संवेदनशील मसले पर सभी पक्षकारों के साथ र्चचा कर रहे हैं। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर विधानमंडल को अपने स्थाई निवासियों को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार देने का अधिकार प्रदान करता है।
• चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानिवलकर और धनन्जय चन्द्रचूड़ की बेंच के समक्ष अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि केन्द्र द्वारा नियुक्त वार्ताकार कश्मीर मसले के समाधान के लिए सभी पक्षकारों से बात कर रहे हैं। वह इन मुद्दों पर भी र्चचा कर रहे हैं और यह प्रक्रिया चल रही है।
• केन्द्र ने पिछले साल 23 अक्टूबर को गुप्तचर ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को जम्मू कश्मीर के लिए वार्ताकार नियुक्त किया था। राष्ट्रपति के एक आदेश के माध्यम से 1954 में संविधान में अनुच्छेद 35(ए) शामिल किया गया था। यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर के निवासियों को विशेष अधिकार प्रदान करता है और राज्य से बाहर के व्यक्ति से विवाह करने वाली महिलाओं को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करता है।
• यह प्रावधान उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट इस अनुच्छेद की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली वी द सिटीजन्स की याचिका के साथ ही कई अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। कई समूहों ने भी इस अनुच्छेद के समर्थन में याचिकाएं दायर की हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि आप सभी ने देखा है कि कश्मीर में क्या हो रहा है।
• वार्ताकार इस पर र्चचा कर रहे हैं। इस पर अदालत ने याचिकाओं पर सुनवाई छह अगस्त के लिए स्थगित कर दी। जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने सुनवाई के दौरान संविधान पीठ के दो फैसलों का हवाला दिया और कहा कि अनुच्छेद 35 (ए) को चुनौती देने वाली याचिकाओं में उठाए गए बिन्दु इन फैसलों के दायरे में आते हैं।
• राज्य सरकार की ही ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफडे ने कहा कि 1927 से ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट है और इस तरह से इसका फैसला नहीं किया जा सकता। एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि यह बड़ी विचित्र स्थिति है कि 1947 में पाकिस्तान पलायन कर गया जम्मू कश्मीर का कोई व्यक्ति कानून के तहत यहां आकर बस सकता है परंतु पीढ़ियों से यहां रहने वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती।
• उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद भी छात्रों को सरकारी मेडिकल कालेज में सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं मिल सकता क्योंकि वे राज्य के स्थाई निवासी नहीं है। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह मानवीय मुद्दा है क्योंकि पांच लाख लोग राज्य से पलायन कर चुके हैं और वे दिल्ली जैसी जगहों पर रह रहे हैं लेकिन वे घाटी में लौट नहीं सकते हैं।

2. पवन व सौर ऊर्जा के लिए नीति जारी
• सरकार ने अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में तेजी लाने के इरादे से आज राष्ट्रीय पवन और सौर हाइब्रिड नीति जारी की। नीति का मकसद ऐसा मसौदा तैयार करना है जिससे ग्रिड से जुड़े बड़े पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों को प्रोत्साहन मिले। इससे पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचा और भूमि का अधिक अच्छे ढंग से उपयोग हो सकेगा।
• नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार पुन: इससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढाव कम होंगे और ग्रिड स्थिरता बढ़ेगी। मंत्रालय के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इससे ग्रिड की सुरक्षा तथा स्थिरता को लेकर कुछ चुनौतियां हैं। इससे निपटने के लिए उपयुक्त नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत है।
• पवन और सौर हाइब्रिड ऊर्जा से आशय ऐसे संयंत्र से है जिसमें एक ही जगह इन दोनों स्रेतों से बिजली पैदा की जाती है। एक स्रेत की बिजली क्षमता दूसरे स्रोत  की बिजली क्षमता की कम-से-कम 25 प्रतिशत होने पर उसे हाइब्रिड परियोजना कहा जाएगा।उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्रेतों से 1,75,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 1,00,000 मेगावाट सौर ऊर्जा से तथा 60,000 मेगावाट पवन ऊर्जा से सृजित करने का लक्ष्य है।
•  पिछले वित्त वर्ष में अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़कर 70,000 मेगावाट पहुंच गई। यहां जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार तकनीकी दृष्टि से यह नीति एसी तथा डीसी स्तर पर पवन व सौर ऊर्जा दोनों के जुड़ाव की बात करती है।
• नीति नई हाइब्रिड परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पवन और सौर परियोजनाओं को हाइब्रिड बनाने को प्रोत्साहित करती है। यह नीति हाइब्रिड परियोजना में पवन और सौर कल-पुर्जों  के उपयोग में लचीलापन उपलब्ध कराती है।

3. निवेश व खपत बढ़ने से आएगा इकोनामी में सुधार
• औद्योगिक उत्पादन में मार्च महीने में सुस्ती रहने के बावजूद जनवरी-मार्च तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि बढ़कर 7.7 फीसद रहने की उम्मीद है। इससे पिछली तिमाही में यह 7.2 फीसद थी।वित्तीय सेवा प्रदाता नोमुरा ने एक रपट में यह अनुमान जताया है।
• नोमुरा के मुताबिक, ‘‘मार्च में औद्योगिक उत्पादन में नरमी के बावजूद जनवरी-मार्च में औसत औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 6.2 फीसद रही जो कि चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसम्बर) के 5.9 फीसद से अधिक है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि औसत औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि से पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में समग्र औद्योगिक गतिविधियां मजबूत हुई हैं जो कि पहली तिमाही में जीडीपी के बढ़कर 7.7 फीसद रहने के हमारे विचार का समर्थन करती है।
• निवेश और खपत के चलते देश में क्रमिक सुधार की उम्मीद है। हालांकि कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कठिन वित्तीय स्थिति जैसे कारकों के चलते वृद्धि दर में गिरावट हो सकती है। हालांकि निकट अवधि में वृद्धि परिदृश्य को लेकर हमारा नजरिया अभी भी आशावादी है, हमें उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि को सुस्त करने वाली कठिन वित्तीय स्थिति एवं कच्चे तेल में तेजी का विपरीत प्रभाव आगे चलकर फीका पड़ जाएगा।
• ’आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूंजीगत सामान उत्पादन में गिरावट तथा खनन गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण मार्च महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि धीमी रहकर 4.4 फीसद पर रही जो कि पांच महीने का निचला स्तर है।

4. पुतिन के बुलावे पर रूस जाएंगे पीएम, 21 को होगी बैठक
• चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वुहान में अनौपचारिक बैठक करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ इसी तरह की बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक रूस के शहर सोची में 21 मई को होगी।
• माना जा रहा है कि मोदी-चिनफिंग बैठक की तरह ही यह मुलाकात भी द्विपक्षीय रिश्तों में नई सोच भरने वाली साबित होगी। पुतिन के साथ पहली बार अनौपचारिक मुलाकात का एलान कर भारत संभवत: यह संदेश भी देना चाहता है कि उसकी विदेश नीति दूसरे देश की नीतियों से प्रभावित नहीं होती।
• मोदी और पुतिन की यह बैठक सिर्फ इन दोनों देशों के रिश्तों को देखते हुए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर बदलाव हुए हैं उसे देखते हुए भी इसकी अहमियत बढ़ जाती है। हाल ही में रूस और अमेरिका के बीच तल्खी बढ़ी है। अमेरिका की तरफ से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की शुरुआत हो चुकी है।
• अमेरिका ने हाल ही में ईरान के साथ परमाणु करार तोड़ा है, जबकि रूस ईरान का पक्षधर है। मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात में अमेरिका के इन दोनों कदमों से उपजी स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने के आसार हैं। भारत अभी भी अपनी रक्षा जरूरत का 63 फीसद साजोसामान रूस से खरीदता है।
• रूस से एस 400 मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इस पर अमेरिकी प्रतिबंध से असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रलय ने कहा है, ‘राष्ट्रपति पुतिन के आमंत्रण पर मोदी उनके साथ अनौपचारिक बैठक के लिए शहर सोची पहुंचेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक साङोदारी वाले द्विपक्षीय रिश्तों को ज्यादा प्रगाढ़ करने व राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।’
• बताते चलें कि मोदी और पुतिन की अगले महीने के मध्य में चीन में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (सीएसओ) की शीर्ष बैठक में भी मुलाकात होगी, लेकिन मोदी की उसके पहले पुतिन से होने वाली यह विशेष मुलाकात इस बात को मजबूती से बताती है कि भारत अभी किसी भी एक धुरी के साथ नहीं है।
• यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका के बीच कोई शीर्ष स्तरीय बैठक नहीं हुई है। अप्रैल, 2018 में भारत व अमेरिका के रक्षा व विदेश मंत्रियों की अगुआई में अहम रणनीतिक वार्ता होनी थी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री के बदले जाने के बाद यह स्थगित हो गई।
• सूत्रों का कहना है कि मोदी और पुतिन की अनौपचारिक बैठक के एजेंडे में सबसे अहम यह होगा कि दोनों के रिश्ते में हाल के वर्षो में आई शिथिलता को दूर कैसे किया जाए? ईरान पर अमेरिकी रुख का मुद्दा भी उठेगा।
• भारत ने हाल के महीनों में ईरान और रूस के साथ कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं पर विचार करना शुरू किया है, लेकिन अमेरिका इसको लेकर सकारात्मक नहीं है
• चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग के बाद अहम है मोदी-पुतिन की मुलाकात
• sईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों को देखते हुए भारत का कदम अहम

5. इराक चुनाव में मुक्तदा अल-सद्र गठबंधन आगे
• इराक में 12 मई को हुए संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी के शिया प्रतिद्वंद्वियों को बड़ी बढ़त मिली है। बीबीसी ने चुनाव अधिकारियों के हवाले से बताया, अधिकतर मतों की गणना हो गई है और शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे है।निर्वाचन आयोग का कहना है कि अल अबादी का शासकीय गठबंधन तीसरे स्थान पर है।
• देश में 2017 में इस्लामिक स्टेट पर जीत के बाद से शनिवार को पहली बार देश में चुनाव हुए। चुनाव के अंतिम नतीजों की घोषणा शाम को की जाएगी। रविवार को हुए चुनाव का मतदान प्रतिशत 44.5 फीसदी था, जो पिछले चुनाव की तुलना में काफी कम है।
• इराक के लोगों ने बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को वोट किया, जिनमें बड़ी संख्या में शिया और सुन्नी हैं। मतदान के शुरुआती नतीजों में ही अल-सदर के गठबंधन को बढ़त दिखाई गई थी। उनके समर्थकों ने बगदाद में जश्न मनाया। साल 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद अल-सद्र र्चचा में आए थे।
• रिपोर्टों  के मुताबिक, मिलिशिया नेता हादी अल-अमीरी का गठबंधन दूसरे स्थान पर है। बीबीसी के मुताबिक, अल-अबादी की शिया सरकार ने आईएस आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लेकर वाहवाही बटोरी थी।
•  रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा स्थिति में सुधार के बावजूद आईएस के खिलाफ चार साल के युद्ध के बाद भी इराक खुद को दोबारा खड़े करने को लेकर जूझ रहा है।

6. चीन ने माना, स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था
• भारतीय अर्थव्यवस्था नई उड़ान भरने को तैयार है और वह स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाली है। ऐसे में निवेशकों को जमकर पैसा लगाना चाहिए। यह अपील किसी और की नहीं बल्कि चीन के शीर्ष सरकारी बैंक की है। भारत में निवेश की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए चीन का यह बैंक खास तैयारी कर रहा है। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चायना (आइसीबीसी) ने भारत समर्पित निवेश फंड लांच किया है। इसमें चीन के लोग निवेश कर सकेंगे। यह राशि भारत में निवेश की जाएगी। परिसंपत्तियों के लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा बैंक है।
• भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए चीन के बैंक का यह कदम इस वजह से खास अहम माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अनौपचारिक वार्ता होने के महज एक सप्ताह बाद यह पहल की गई है। दोनों देशों के नेताओं ने आर्थिक संभावनाओं के दोहन के लिए द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर दिया था। इंडस्टियल एंड कॉमर्शियल बैंक क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड यूरोप और अमेरिका के 20 से ज्यादा स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध उन एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में निवेश करेगा जो भारतीय बाजारों पर आधारित हैं।
• चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार भारत में निवेश के लिए चीन का यह पहला पब्लिकली ऑफर्ड फंड है। यह फंड भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य में निवेश करेगा। एक फंड मैनेजर के हवाले से अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फंड भारतीय बाजार में समग्र औद्योगिक बुनियादी विकास पर नजर रखेगा। बैंक ने इंडेक्स में प्रमुख उद्योगों के महत्व के लिहाज से विभिन्न सेक्टरों को निवेश के लिए सूचीबद्ध किया है। इसमें वित्तीय क्षेत्र को सबसे ज्यादा अहमियत मिल सकती है। इसके बाद आइटी, वैकल्पिक उपभोग, एनर्जी, आवश्यक उपभोग, कच्चा माल, फार्मास्युटिकल्स, हेल्थकेयर और अन्य उद्योगों पर फोकस होगा।
• दुनिया के सबसे बड़े इस चीनी बैंक आइसीबीसी की परिसंपत्तियां 3.6 लाख करोड़ डॉलर (241 लाख करोड़ रुपये) हैं। बैंक ने फंड लांच करते हुए भारत की शानदार तस्वीर पेश की है। आइसीबीसी क्रेडिट स्यूज इंडिया मार्केट फंड में सात मई से 25 मई के बीज निवेश किया जा सकता है।
• आइसीबीसी के एक लेख के अनुसार तमाम विदेशी बाजारों में भारत दुनिया की दूसरी सबसे उभरती अर्थव्यवस्था है। वह आर्थिक विकास के अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश करने वाला है। यह एक ऐसा देश है जहां घरेलू और विदेशी पूंजी के बीच स्पर्धा है। 2017 से ग्लोबल रिकवरी के साथ उभरती अर्थव्यवस्था को फायदा मिल रहा है। इनमें भारत का प्रदर्शन सबसे अच्छा है।

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