जल रहा हृदय देखो
आने वाली प्रलय देखो
क्रुद्ध है हर मन जैसे
विचारों का दमन देखो,,
क्यों नही समझे ये मन
कैसा है दीवानापन,,
हो गए सब बावले,,
अपनो का ही रक्त पीकर,,
हो गए मदमस्त देखो,,
क्या धरा अब मौन है
या है हम सब विवस
रिश्ते नाते टूट गए सारे,,
अपने भी हो गए पराये,,
चाय वाले चाचा हो बिचारे,,
राजू भैय्या रेहड़ी वाले,,
रास्ते पर वो अबोध बच्चा,,
हो गया सब मौन देखो,,
हो गया सब मौन देखों,,
जल रहा हृदय देखो
आने वाली प्रलय देखो
क्रुद्ध है हर मन जैसे
विचारों का दमन देखो,,
कई औरतें हो गयी बेवा
बुजर्गों की टूट गयी लाठी,,
बेसहारा होकरके,,
रोते बेबस वो बिचारे,,,
नन्हे वो निश्छल मन
जिनका छिन गया तन मन
था एक आँचल का सहारा,,
आँसुओ में भीगा हुआ आज,,
कई जिंदगियों का मन देखो,,
जल रहा हृदय देखो
आने वाली प्रलय देखो
क्रुद्ध है हर मन जैसे
विचारों का दमन देखो,,
Nirmal Awasthi
www.earthcarengo.org
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