मेरे सपने ,,मेरी यादों,, में अक्सर मैं अकेला हूँ,,
मेरे ख़्वाबों,,मेरी रातों में अक्सर मैं अकेला हूँ
पवन संग उड़ जाऊँगा इक दिन मैं
नीर संग बह जाऊँगा मैं,,,
मन मे दर्द छिपे मेरे ,,चुपचाप सह जाऊंगा मैं,,,
है ये आकाश भी तन्हा,,
धरा भी है अकेली ही,,
है मन का चांद भी तन्हा,,
जिसकी रातें सहेली है,,,
अपने मन की पहेली को,,
तुझसे कह जाऊँगा इक दिन,,
मेरी धड़कन तो चलती हैं,,
हैं साँसे अब अधूरी तुम बिन,,
मेरे सपने ,,मेरी यादों,, में अक्सर मैं अकेला हूँ,,
मेरे ख़्वाबों,,मेरी रातों में अक्सर मैं अकेला हूँ
पवन संग उड़ जाऊँगा इक दिन मैं
नीर संग बह जाऊँगा मैं,,,
Nirmal Awasthi
www.earthcarengo.org
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