Wednesday, September 19, 2018

अंधेरे रास्तों में तन्हा,, जागती है रातें ,,, जहाँ अज़नबी हर कोई,है,, हर क्षण,,हम अपने मे गुम,, नाही कोई विरह,,ना कोई मिलन,, स्तब्ध है हर मन,, इस कृत्रिम आसमान के तले,, चेहरे की वास्तविकता को जैसे,, कई मुखौटों ने ढक लिया,, कुछ ठेकेदारों ने जैसे,, आज दुनिया पर कब्जा कर लिया।।।।

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