Tuesday, August 29, 2017

हम आज की दुनिया में सब कुछ करना सीख गये,,,पर आपस में प्यार करना आजतक नही सीख पाए Nirmal Earthcarefoundation Ngo

हम आज की दुनिया में सब कुछ करना सीख गये,,,पर आपस में प्यार करना आजतक नही सीख पाए
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

रिश्तें जब बोझ बन जाए,,,तो उनको त्यागना ही बेहतर है

रिश्तें जब बोझ बन जाए,,,तो उनको त्यागना ही बेहतर है
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

भक्त नहीं वो,, गुंडे हैं जिनके हाँथो,, में डण्डे हैं ना आस्था है,,,,ना धर्म है,, जाने कैसा ये अधर्म है,, एक व्यभिचारी को आदर्श बताते है, इंसानियत को मारते जाते है,, लोगों का खून क्या इतना सस्ता,, लोगों के खून से नहाते हैं,, ये कैसी परिभाषा है,, ये आस्था है,,या,,इनकी कुत्सित मानशिकता,, धर्म और मजहब तो सहनशीलता सिखाता है,, यहाँ तो हर कोई मनुष्यता को मारता जाता है,, चाहे पंजाब और हरियाणा की अस्थिरता हो,, या कश्मीर की पत्थरबाजी हो,, क्या आज भी हम गुलाम है,,,या,,ये कैसी आजादी है ये धर्म और मजहब के ठेकेदारों के मोहरें कब तक बने रहेंगे,, आखिर राष्ट्र निर्माण के लिए कब हम जागेंगे,, कृपया जाति,, और,,मजहब के लिए कोई भी राष्ट्र की एकता और अखंडता से खिलवाड़ ना करे,,,, जय हिंद जय भारत Nirmal earthcarefoundation ngo

भक्त नहीं वो,, गुंडे हैं
जिनके हाँथो,, में डण्डे हैं
ना आस्था है,,,,ना धर्म है,,
जाने कैसा ये अधर्म है,,
एक व्यभिचारी को आदर्श बताते है,
इंसानियत को मारते जाते है,,
लोगों का खून क्या इतना सस्ता,,
लोगों के खून से नहाते हैं,,
ये कैसी परिभाषा है,,
ये आस्था है,,या,,इनकी कुत्सित मानशिकता,,
धर्म और मजहब तो सहनशीलता सिखाता है,,
यहाँ तो हर कोई मनुष्यता को मारता जाता है,,
चाहे पंजाब और हरियाणा की अस्थिरता हो,,
या
कश्मीर की पत्थरबाजी हो,,
क्या आज भी हम गुलाम है,,,या,,ये कैसी आजादी है
ये धर्म और मजहब के ठेकेदारों के मोहरें कब तक बने रहेंगे,,
आखिर राष्ट्र निर्माण के लिए कब हम जागेंगे,,

कृपया जाति,, और,,मजहब के लिए कोई भी राष्ट्र की एकता और अखंडता से खिलवाड़ ना करे,,,,

जय हिंद
जय भारत
Nirmal earthcarefoundation ngo

Friday, August 18, 2017

बहुत मिठास है अपनी भाषा में फिर भी हम अंग्रेजी बोलने में और बोलनेवालों को इतनी इज्जत से देखते है जो बोलने में ही भावहीन लगती है मित्रो अगर नही विस्वास है तो किसी भी मित्र से या भाई बंधू से आप प्रेम से सनी वाणी हिंदी में बोलिये और उसके बाद वही शब्द आप उनसे अंग्रेजी में बोलिये फिर आपको अंतर समझ आ जाएगा हिंदी है हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

बहुत मिठास है अपनी भाषा में फिर भी हम अंग्रेजी बोलने में और बोलनेवालों को इतनी इज्जत से देखते है जो बोलने में ही भावहीन लगती है
मित्रो अगर नही विस्वास है तो
किसी भी मित्र से या भाई बंधू से आप प्रेम से सनी वाणी हिंदी में बोलिये
और उसके बाद वही शब्द आप उनसे अंग्रेजी में बोलिये फिर आपको अंतर समझ आ जाएगा

हिंदी है हम वतन है
हिन्दोस्ताँ हमारा

आजकल कई घटनाएं हमारे सामने घटित होती हैं,,,जिनमे हमारी भूमिका,,महाभारत काल में पितामह भीष्म,,,गुरु द्रोणाचार्य,,और भी महान व्यक्ति जो द्रोपदी चीरहरण में सम्मिलित थे उन जैसी है,,,,वो भी अपनी मजबूरियों में बंधे होने के कारण एक नारी की अस्मिता को बचाने में असमर्थ साबित हुए,,,और हम भी धृतराष्ट्र की तरह आँखे होते हुए भी अंधे होने का ढोंग करते है चाहे किसी बहन की इज्जत का सवाल हो,, या किसी गरीब के हक़ की बात हो,,, और अत्यंत ही दुःख की बात ये है कि हम धर्म के ठेकेदार तो बन जाते है,,,लेकिन उससे कोई सीख नही लेते,,,जिसमे सर्वप्रथम ये बात अंकित होती है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म,,,,नाकि ,,,हिन्दू ,,,मुस्लिम,, दुःखद मन की व्यथा निर्मल अवस्थी Nirmal earthcarefoundation ngo

आजकल कई घटनाएं हमारे सामने घटित होती हैं,,,जिनमे हमारी भूमिका,,महाभारत काल में पितामह भीष्म,,,गुरु द्रोणाचार्य,,और भी महान व्यक्ति जो द्रोपदी चीरहरण में सम्मिलित थे उन जैसी है,,,,वो भी अपनी मजबूरियों में बंधे होने के कारण एक नारी की अस्मिता को बचाने में असमर्थ साबित हुए,,,और हम भी धृतराष्ट्र की तरह आँखे होते हुए भी अंधे होने का ढोंग करते है

चाहे किसी बहन की इज्जत का सवाल हो,,
या किसी गरीब के हक़ की बात हो,,,
या किसी का बचपन बिक रहा हो,,,
या कोई किसी मजबूर की मजबूरियों से खेल रहा हो,,,
और अत्यंत ही दुःख की बात ये है कि हम धर्म के ठेकेदार तो बन जाते है,,,लेकिन उससे कोई सीख नही लेते,,,जिसमे सर्वप्रथम ये बात अंकित होती है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म,,,,नाकि ,,,हिन्दू ,,,मुस्लिम,,

दुःखद मन की व्यथा

निर्मल अवस्थी
Nirmal earthcarefoundation ngo

Thursday, August 17, 2017

इस आधुनिकता के दौर में दायरे कुछ कम हुए है,,,लेकिन सार्थक रूप में नही,, ये पाश्चत्य सभ्यता का मिलन,, और भारतीय संस्कृति का लोप होना ही हमारे विनाश का कारण बनती जा रही है कहा जाता है कि अति अंत का कारण होती है ,,,,यदि अब भी हम नही संभले,,,तो देर दूर नही होगी Nirmal earthcarefoundation ngo

इस आधुनिकता के दौर में दायरे कुछ कम हुए है,,,लेकिन सार्थक रूप में नही,,
ये पाश्चत्य सभ्यता का मिलन,, और भारतीय संस्कृति
का लोप होना ही हमारे विनाश का कारण बनती जा रही है
कहा जाता है कि अति अंत का कारण होती है
,,,,यदि अब भी हम नही संभले,,,तो देर दूर नही होगी

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Monday, August 14, 2017

छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, किसे ख़बर पंद्रह अगस्त की,,,व्हाट्सएप्प पर लोग मनाते है,, घर के रिश्ते धूमिल से अब,,,fb पर मित्र बनाते है सच्चे रिश्ते अब व्यर्थ हुए,,,क्योकि बनावटी दुनिया अब भारी है,,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, कोई लड़ता वन्दे मातरम पर हम कोई कहता राष्ट्रगान नही गाएंगे कोई कहता देशद्रोही है तू,, तेरे खून से तिलक लगाएंगे,, क्या इन्हें पता कैसे मिली आज़ादी,, भारत माँ की जय बोले थे,, था वन्दे मातरम जयकारा,, हम जन गण मन भी बोले थे,, था नही कोई हिन्दू,,,मुस्लिम,, सब थे तब भारतवासी,, थी नही यहाँ कोई असहिष्णुता,, बस आज़ादी की चिंगारी थी,, अब आजादी का मतलब है अलग,, अब अलग हुआ अब नारा है,,, सबका अलग है राग औ अलाप,, मोबाइल में संसार हमारा है,,, नही मात,,पिता के लिए समय,, अब कृत्रिम सा संसार सारा है,, धरती माँ शापित महसूस करे अब,, हर प्राणी बोझ सा भारी है,, छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, बस इसी सुभेच्छा के साथ कि हमारे राष्ट्र की आज़ादी व्यर्थ ना जाए,,,जो शहीद हुए है उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी,,, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं Nirmal earthcarefoundation ngo

छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,
किसे ख़बर पंद्रह अगस्त की,,,व्हाट्सएप्प पर लोग मनाते है,,
घर के रिश्ते धूमिल से अब,,,fb पर मित्र बनाते है
सच्चे रिश्ते अब व्यर्थ हुए,,,क्योकि बनावटी दुनिया अब भारी है,,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,
कोई लड़ता वन्दे मातरम पर हम
कोई कहता राष्ट्रगान नही गाएंगे
कोई कहता देशद्रोही है तू,,
तेरे खून से तिलक लगाएंगे,,
क्या इन्हें पता कैसे मिली आज़ादी,,
भारत माँ की जय बोले थे,,
था वन्दे मातरम जयकारा,,
हम जन गण मन भी बोले थे,,
था नही कोई हिन्दू,,,मुस्लिम,,
सब थे तब भारतवासी,,
थी नही यहाँ कोई असहिष्णुता,,
बस आज़ादी की चिंगारी थी,,
अब आजादी का मतलब है अलग,,
अब अलग हुआ अब नारा है,,,
सबका अलग है राग औ अलाप,,
मोबाइल में संसार हमारा है,,,
नही मात,,पिता के लिए समय,,
अब कृत्रिम सा संसार सारा है,,
धरती माँ शापित महसूस करे अब,,
हर प्राणी बोझ सा भारी है,,
छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,

बस इसी सुभेच्छा के साथ कि हमारे राष्ट्र की आज़ादी व्यर्थ ना जाए,,,जो शहीद हुए है उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी,,,
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Nirmal earthcarefoundation ngo

Sunday, August 13, 2017

जो कर्मो से अपनी किश्मत लिखते है वो स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करते है,, जो किश्मत के भरोसे बैठे रहते हैं,,,वो सिर्फ अपना ही बेड़ा पार करते है

जो कर्मो से अपनी किश्मत लिखते है वो स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करते है,,
जो किश्मत के भरोसे बैठे रहते हैं,,,वो सिर्फ अपना ही बेड़ा पार करते है

Nirmal earthcarefoundation ngo

आज भी हम गुलाम है,,क्योंकि,, अमीर अपने मद में चूर,, और गरीब अपनी परिस्थितियों से मजबूर,, स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई Nirmal earthcarefoundation ngo जय हिंद जय भारत वन्दे मातरम

आज भी हम गुलाम है,,क्योंकि,,
अमीर अपने मद में चूर,,
और गरीब अपनी परिस्थितियों से मजबूर,,
स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई
Nirmal earthcarefoundation ngo

जय हिंद
जय भारत
वन्दे मातरम