Monday, August 14, 2017

छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, किसे ख़बर पंद्रह अगस्त की,,,व्हाट्सएप्प पर लोग मनाते है,, घर के रिश्ते धूमिल से अब,,,fb पर मित्र बनाते है सच्चे रिश्ते अब व्यर्थ हुए,,,क्योकि बनावटी दुनिया अब भारी है,,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, कोई लड़ता वन्दे मातरम पर हम कोई कहता राष्ट्रगान नही गाएंगे कोई कहता देशद्रोही है तू,, तेरे खून से तिलक लगाएंगे,, क्या इन्हें पता कैसे मिली आज़ादी,, भारत माँ की जय बोले थे,, था वन्दे मातरम जयकारा,, हम जन गण मन भी बोले थे,, था नही कोई हिन्दू,,,मुस्लिम,, सब थे तब भारतवासी,, थी नही यहाँ कोई असहिष्णुता,, बस आज़ादी की चिंगारी थी,, अब आजादी का मतलब है अलग,, अब अलग हुआ अब नारा है,,, सबका अलग है राग औ अलाप,, मोबाइल में संसार हमारा है,,, नही मात,,पिता के लिए समय,, अब कृत्रिम सा संसार सारा है,, धरती माँ शापित महसूस करे अब,, हर प्राणी बोझ सा भारी है,, छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, बस इसी सुभेच्छा के साथ कि हमारे राष्ट्र की आज़ादी व्यर्थ ना जाए,,,जो शहीद हुए है उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी,,, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं Nirmal earthcarefoundation ngo

छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,
किसे ख़बर पंद्रह अगस्त की,,,व्हाट्सएप्प पर लोग मनाते है,,
घर के रिश्ते धूमिल से अब,,,fb पर मित्र बनाते है
सच्चे रिश्ते अब व्यर्थ हुए,,,क्योकि बनावटी दुनिया अब भारी है,,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,
कोई लड़ता वन्दे मातरम पर हम
कोई कहता राष्ट्रगान नही गाएंगे
कोई कहता देशद्रोही है तू,,
तेरे खून से तिलक लगाएंगे,,
क्या इन्हें पता कैसे मिली आज़ादी,,
भारत माँ की जय बोले थे,,
था वन्दे मातरम जयकारा,,
हम जन गण मन भी बोले थे,,
था नही कोई हिन्दू,,,मुस्लिम,,
सब थे तब भारतवासी,,
थी नही यहाँ कोई असहिष्णुता,,
बस आज़ादी की चिंगारी थी,,
अब आजादी का मतलब है अलग,,
अब अलग हुआ अब नारा है,,,
सबका अलग है राग औ अलाप,,
मोबाइल में संसार हमारा है,,,
नही मात,,पिता के लिए समय,,
अब कृत्रिम सा संसार सारा है,,
धरती माँ शापित महसूस करे अब,,
हर प्राणी बोझ सा भारी है,,
छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,

बस इसी सुभेच्छा के साथ कि हमारे राष्ट्र की आज़ादी व्यर्थ ना जाए,,,जो शहीद हुए है उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी,,,
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Nirmal earthcarefoundation ngo

No comments:

Post a Comment