हम अपनी बेटियों को शाम ढलने के बाद निकलने को इसीलिए मना करते है
क्योंकि हम सुरक्षित समाज का निर्माण आजतक कर ही नही पाए ,,,नही तो दिन तो क्या रात में भी हमारी बहने और बेटियां सुरक्षित होती एक पंछी की तरह चाहे जहां उड़ने को,,,नाकि बन्द दरवाजे में कैद रहने को विवश होती
विचार कीजिये कि हम कहाँ है
Nirmal
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