आजकल एक बात पर मेरा मन जाने क्यों इतना क्रुद्ध हो रहा है ,,,शायद वो इसलिए हो सकता है की मेरे बाबाजी और पापाजी दोनों लोग ही भारतीय सेना में रहे है और अभी वो सेवानिवृत है उनके त्याग,,और कठिन जीवन को हम भुला नही सकते है की कितनी विषम परिस्थितिया होती हैं इनके सामने फिर भी ये अपनों से बढ़कर अपने देश को समझते है ,,,हाँ मुझे भली भांति याद है की मेरा बचपन का नब्बे प्रतिशत लगभग पापा के बिना ही बीता है जब भी मैं दूसरो के माँ बाप को देखता था तो मुझे एक अधूरे पन का एहसास होता था और मैं मम्मी से या बडो से पूछता रहता था की पापा कब छुट्टी आयेंगे ,,,सच में वो अधूरा पन कभी कभी मुझे अकेले में रुलाता था कई बार मैं रोया ,,,और आज समझदार हूँ तो सिचता हु की मैं अपने बच्चे अपने परिवार के बिना एक पल नही रह सकता हूँ मेरे पापा कैसे रहे होंगे ,,,कितना अधूरापन उनको महसूस होता होता रहा होगा
इसीलिए मेरी नजरों में देश के वीर जवानो के लिए हमेशा ही एक अपनेपन सा लगाव होता है और इस समय कलकत्ता में ममता बनर्जी और अन्य राजेनेताओ के अटपटे बयान आ रहे है और हमारे देश की वो सेना जिसने अपना सर्वस्व त्याग कर निश्छल भाव से देश की सेवा में लगी हुई है उसपर ये स्वार्थी और बुद्धि हीन नेता संदेह कर रहे है उससे सबूत मांग रहे है ये कैसा राजतन्त्र है ,,,,की हमारे स्वार्थी नेता अपनी चाटुकारिता अपनी कुर्सी के लिए इतने गिर जायेंगे ऐसे लोगो को इन पदों पर रहने का कोई अधिकार नही है
जय हिन्द
जय भारत
इसीलिए मेरी नजरों में देश के वीर जवानो के लिए हमेशा ही एक अपनेपन सा लगाव होता है और इस समय कलकत्ता में ममता बनर्जी और अन्य राजेनेताओ के अटपटे बयान आ रहे है और हमारे देश की वो सेना जिसने अपना सर्वस्व त्याग कर निश्छल भाव से देश की सेवा में लगी हुई है उसपर ये स्वार्थी और बुद्धि हीन नेता संदेह कर रहे है उससे सबूत मांग रहे है ये कैसा राजतन्त्र है ,,,,की हमारे स्वार्थी नेता अपनी चाटुकारिता अपनी कुर्सी के लिए इतने गिर जायेंगे ऐसे लोगो को इन पदों पर रहने का कोई अधिकार नही है
जय हिन्द
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