Thursday, January 19, 2017

नम आँखों से हार्दिक श्रीद्धांजली,,,,उन सभी माताओ के लिए,,,,जिनके आँचल आज सूने है,,,लेकिन शाशन प्रसासन से एक सवाल भी की कृपया जो भी नियम कानून बनाये वो सिर्फ कागजो तक ही सीमित ना रहे और उनका वास्तविकता में क्रियान्वन होता तो आज एटा यू पी में इतने मासूमो की जान नही जाती 😢😢😢😢😢😢😢

कुछ खो गये जो बचपन,,,कल
वो नही है आज के पल में,,,
चारो और अँधेरा है जैसे,,,
लेकिन सूरज उदित है आज,,,
पर फिर भी मेरी माँ की ममता निराश है,,,
उसकी लालिमा अंगारे उगल रही है,,,,,
बस मन,,से,,मन पूछ रहा ये सवाल है,,
जाने कहाँ गया मेरा लला,,
जो सोयी सोयी आँखों से जगा था,,
वो आज हमेशा के लिए विलुप्त हो गया,,
मैं जीवित हु,,,,पर ,,,म्रत के समान हूँ,,,,
जो कल गतिमान थी,,,आज एक स्थिर शिला समान है,,,,
कैसे समझाऊ अपने मन को,,,,
जैसे मेरो लला ही मेरे प्राण था,,,,
चलते चलते ये साँसे थम जाए,,,,
जाने किसके दोष की सजा,,,,
मेरे निर्दोष को मिली है,,,
अब किसको मैं सुनाऊँगी लोरी,,,
किसको अपनी गोदी में खिलाऊंगी,,,
कौन धीरे धीरे आकरके,,,मुझसे लिपट जाएगा,,
मैं क्या थी कल,,,,क्या बन गयी आज,,,
ये भी एक सवाल है

नम आँखों से हार्दिक श्रीद्धांजली,,,,उन सभी माताओ के लिए,,,,जिनके आँचल आज सूने है,,,लेकिन शाशन प्रसासन से एक सवाल भी की कृपया जो भी नियम कानून बनाये वो सिर्फ कागजो तक ही सीमित ना रहे
और उनका वास्तविकता में क्रियान्वन होता तो आज एटा यू पी में इतने मासूमो की जान नही जाती
😢😢😢😢😢😢😢

No comments:

Post a Comment