बीत गया गणतंत्र दिवस,,,
अब भूल गए ,,,आजादी को,,
एक दिन ही जगती,,, देशभक्ति,,,
अब भूल गए ,,,आजादी को,,,
ना जन गण मन,,,,
ना वंदे मातरम,,,
अब फ़िल्मी गाने चलाते है,,,
दिल में नही अब राष्ट्रभक्ति,,,
गानों पर ठुमके लगाते है,,,
है इंतज़ार इस बात का ही,,,
एक छुट्टी तो मिल जायेगी,,
वरना किसको है फ़िक्र देश की,,,
15 अगस्त की छुट्टी फिर आएगी,,,
नाही दिल में अब भगत सिंह,,,
नाही सुभाष जी रहते है,,,
हर गली,,और ,,नुक्कड़,,,में,,
ईमान यहां पर बिकते है,,,
आज रो रहा है आमजन,,
नेता जी मौज मनाते है,,,
व्यापारी यहां नाचे गाए,,
किसान रोज लुट जाते है,,
जबसे आया व्हाट्सअप,,,फेसबुक,,
रिश्तों में बढ़ी अब दूरी है,,,
किसी के पास आज अब समय नही
क्योकि fb पर पोस्ट जरूरी है,,,
आओ मिलकर गुणगान करे,,,
जन जन से ये आह्वान करे,,,
पहले धरती माँ,,,बाद में सब,,
किसी राष्ट्र के लिए ,,,बहुत जरूरी है,,,
आओ मिलकर सब साथ चले,,,
मिटाकर दिल की दूरी को,,
ना जात,, पात,,
ना भेदभाव,,,
बस एक धर्म हो,,,
राष्ट्र धर्म,,,
हम जिए सिर्फ भारत के लिए
और मरे सिर्फ भारत के लिए,,
हो यही अंतिम इच्छा,,,
तिरंगे शीश पर लहराए,,,
बस यही अंतिम इच्छा
आखिरी सांस भी,,, जन,,गण,, मन गाये,,
निर्मल अवस्थी
Earth care foundation
No comments:
Post a Comment