Friday, January 6, 2017

क्या मेरा अतीत तुम हो,, या मेरा वर्तमान,,,, या शायद मेरा भविष्य,,,, कुछ तो रिश्ता है,,, ही हमारा तुम्हारा,, जो चाँद में भी तुम नजर आते है,,, कभी सपनो में,,, तो कभी ओश की चमकती बूंदों में,,, देखता रहता हूं तुम्हे,, हाँ मैंने देखा नही है तुम्हे,,, फिर भी तुम हो,,, मेरे एहसासों के प्रतिबिम्ब मे,,, कुछ कुहांसा सा छाया है,,, मेरे मन की नदी में,,, जिसमे इक ओर मैं,,बैठा तेरी परछाई को देखता रहता हूं,,,निहारता रहता हूं,, की शायद दुसरे छोर से कोई आवाज आये,,, धीरे धीरे मेरे मन की नदी बहती रहती है ,,, सूने सपनो के आकाश तले,,, जहां मैं,,,और,,,तुम,,,और मीलो फैली असीमित तन्हाई,,, फिर भी मेरी आशाओं,,,में,, बन्द आँखों से,,,बन्द आँखों में,, सूरज की लालिमा की तरह ,,, मेरे ह्रदय में प्रवेश कर जाते हो,,,, और धीरे से कुछ,,,बेज़ुबान शब्दों में,,, जैसे कुछ कह जाते हो,,, कि,,,

क्या मेरा अतीत तुम हो,,
या मेरा वर्तमान,,,,
या शायद मेरा भविष्य,,,,
कुछ तो रिश्ता है,,, ही हमारा तुम्हारा,,
जो चाँद में भी तुम नजर आते है,,,
कभी सपनो में,,,
तो कभी ओश की चमकती बूंदों में,,,
देखता रहता हूं तुम्हे,,
हाँ मैंने देखा नही है तुम्हे,,,
फिर भी तुम हो,,,
मेरे एहसासों के प्रतिबिम्ब मे,,,
कुछ कुहांसा सा छाया है,,,
मेरे मन की नदी में,,,
जिसमे इक ओर मैं,,बैठा
तेरी परछाई को देखता रहता हूं,,,निहारता रहता हूं,,
की शायद दुसरे छोर से कोई आवाज आये,,,
धीरे धीरे मेरे मन की नदी बहती रहती है ,,,
सूने सपनो के आकाश तले,,,
जहां मैं,,,और,,,तुम,,,और मीलो फैली असीमित तन्हाई,,,
फिर भी मेरी आशाओं,,,में,,
बन्द आँखों से,,,बन्द आँखों में,,
सूरज की लालिमा की तरह ,,,
मेरे ह्रदय में प्रवेश कर जाते हो,,,,
और धीरे से कुछ,,,बेज़ुबान शब्दों में,,,
जैसे कुछ कह जाते हो,,,
कि,,,,
मुझे तुमसे,,,तुम्हे मुझसे,,,,
तुम्हे मुझसे,,,मुझे तुमसे,,,
मुहब्बत है,,,,

निर्मल अवस्थी

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