Friday, June 30, 2017

NOW GST PHOBIA INCREASING VERY FAST AND BP OF ALL INDUSTRIALIST CROSSED OVER 300MM/HG HEART NERVES NOT ABLE TO BEAR PRESSURE THEY WAIT FOR TIME,,,THAT CAN CONVERT THEIR LIFE AND RINGING BELL OF WATCH SHOWING TIME 12 O CLOCK ,,,,,,AFTER DEMONITISATION AGAIN MODIJI SAY Bhaiyo aur bahno GST BOMB EXPLODE BUMMMMMMMM HA HA HA,,,,,,,,,

NOW GST PHOBIA INCREASING VERY FAST AND BP OF ALL INDUSTRIALIST CROSSED OVER 300MM/HG
HEART NERVES  NOT ABLE TO BEAR PRESSURE THEY WAIT FOR TIME,,,THAT CAN CONVERT THEIR LIFE AND RINGING BELL OF WATCH SHOWING TIME 12 O CLOCK ,,,,,,AFTER DEMONITISATION AGAIN MODIJI SAY

Bhaiyo aur bahno

GST BOMB EXPLODE

BUMMMMMMMM

HA HA HA,,,,,,,,,

Thursday, June 29, 2017

How To Survive Lightning● ●आसमानी बिजली से कैसे बचें●

●How To Survive Lightning●
●आसमानी बिजली से कैसे बचें●

विश्व में प्रति सेकंड लगभग 100 बार बिजली कही ना कही गिरती है...
और अगर आपकी उम्र लगभग 80 वर्ष मानी जाए तो...
आपको प्रति सेकंड 100 बिजलिया बरसाते इस आसमान के नीचे... जिन्दगी के 2522880000 सेकण्ड्स बिताने हैं  .
ईस बरसाती मौसम में
अगर कभी किसी तूफ़ान में आपको बिजली की चमक दिखाई दे... तो 30 तक गिनिये
अगर... 30 तक पहुचने से पहले ही आपको बादलो की गर्जना सुनाई दे जाती है तो... आप खतरे में हो सकते है
करोडो वोल्ट इलेक्ट्रिकल चार्ज और सूर्य की सतह से 5 गुना ज्यादा तापमान वाला प्रकृति का खुबसूरत पर बेहद विनाशकारी करिश्मा "आकाशीय बिजली" आपके बहुत करीब है
सिर्फ 10 किलोमीटर के दायरे में
.
अपने घरो में रहना सेफ है
लेकिन इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए की... पानी (not pure water) बिजली का सुचालक है
और... इन्सान का शरीर 70% पानी से बना है
तो... अगर ऐसे किसी तूफ़ान में आप खुले मैदान में हो तो... दूसरी चीजो के मुकाबले.. आपके खोपडिया पर बिजली गिरने की संभावना बहुत हाई हो जाती है
.
तो... अगर हाईवे पर जाते हुए कभी आपकी कार खराब हो जाए
और... सर के ऊपर बिजलिया चमकने लगे
तो क्या करना चाहिए
.
जमीन पर लेट जायेगे?
या किसी पेड़ के नीचे जा कर खड़े हो जायेगे?
या मेटल की बनी अपनी कार में जा के बैठ जायेगे?
.
well... अगर ये जानते हुए की "मेटल बिजली को आकर्षित करता है" आपके दिमाग में ये आया है की हमें मेटल की बनी कार में जा कर बैठ जाना चाहिए?
तो..
In fact... You are right..!!!
Why??
.
Because your car acts like a "FARADAY CAGE"
अब चूँकि बिजली और कुछ नहीं... "इलेक्ट्रिकल चार्ज" से युक्त इलेक्ट्रॉन्स का प्रवाह मात्र है... धातु के बिजली के सुचालक होने के कारण ये इलेक्ट्रॉन्स धातु की उपरी सतह से टकरा कर अब्सोर्ब हो जाते हैं
"बिजली धातु की चादर के अन्दर नहीं घुस जाती" बल्कि चादर की सतह पर ही रहती है
अर्थात आप गाडी में है तो बिजली गाडी के चारो तरफ टकराएगी
पर... गाडी को चीर आपके अन्दर नहीं घुस जायेगी
आई बात समधन में?
आपकी गाड़ी, हवाई जहाज वगेरह "फैराडे केज" के जीते जागते उदहारण है.. अर्थात आपके चारो तरफ मौजूद एक मेटल कोटिंग आपकी जान बचा सकती है
(But don't touch any metal in car... stay at your seat...switch off the engine and don't use mobile phones... and you are safe)
.
अब फर्ज करो की आपके पास गाडी भी नहीं है... तो???
सबसे पहले... अपनी जेब के सिक्को, धातु के आभूषण, बेल्ट वगेरह से निजात पाए
श्याना भगत बन मोबाइल पर अपने प्रिय को मौसम के ताजे हाल का प्रसारण ना करें
आपका फोन आकाशीय बिजली को आकर्षित करने का सबसे धांसू जुगाड़ है और किसी भी पल एक हैण्डग्रेनेड बन कर आपके पुर्जे पुर्जे कर सकता है
तो फोन से दूर रहिये... वही ठीक है
.
अब आभूषण और मोबाइल को ठिकाने कैसे लगाया जाए... ये मत पूछना

.
बिना गाड़ी के किसी खुली जगह फंस जाने पर लम्बी चीजो से परहेज करे। लम्बे पेड़ो पर ही बिजली गिरा करती है। बेहतर हो किसी छोटे पेड़ के नीचे खड़े रहिये।
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अगर आस पास कोई पेड़ भी नहीं है..
तो जमीन पर सीधे खड़े रहेगे तो बिजली को आप अपने सर पे गिरने की दावत दे रहे है
जमीन पर लेटना भी खतरे से खाली नहीं.. क्युकी अगर आस पास कही जमीन पर बिजली गिरी तो जमीन से सटे रहने के कारण बिजली के आपके शरीर में घुसने की ये खुल्ली दावत हो जायगी
अब आप कहेगे की...
खड़ा नहीं रहना... लेटना भी नहीं
तो का त्रिशंकु बन हवा में लटक जाए?
नहीं... नहीं...
इस स्थिति में बेस्ट होगा की आप "मुर्गा" बन जाए
या कम से कम उकडू बैठ कर अपना सर घुटनों के बीच में रख लीजिये
इससे अगर बिजली आपके आस पास गिरती है तो उम्मीद की जा सकती है की पॉइंट a यानी आपके एक पाँव से शरीर में ऊपर चढ़ने से पहले वो पॉइंट b यानी दुसरे पैर की तरफ आकर्षित हो जायगी
और बिजली का आवेश अगर अपेक्षाकृत कम हुआ तो...
आपके पाँव के पैरालिसिस के शिकार हो जाने की कीमत पर दिल बच जाना...? महंगा सौदा नहीं
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और अगर आपको गठिया है
आप झुक भी नहीं सकते
तो... सबसे बेहतर उपाय है की अपने घर में रहिये
मौसम विभाग को हलके में ना लें
और आवारागर्दी कम करें
लेकिन... अगर बिजली कड़क रही है तो "लैंडलाइन फोन" का इस्तेमाल ना करे
और... अगर आपका घर बाबा आदम के जमाने का है... और उसमे पानी के पाइप की फिटिंग तब हुई थी जब "PVC" का ज़माना नहीं था
तो तूफ़ान के वक़्त "पानी की टोंटी" छुने से परहेज करे
Follow these 2 rules and you are almost safe...
.but.. still..
You might not be lucky... always...!!!

Wednesday, June 28, 2017

GST पर पोस्ट ... सबसे आसान और सस्ते भाषा में ...

GST पर पोस्ट ... सबसे आसान और सस्ते भाषा में ...
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GST आने से ये सब ख़त्म हो जाएगा सदा के लिए ... ::: .... Central Excise Duty, Excise Duty levied under the Medicinal Preparations (Excise Duties) Act, 1955, Additional Customs Duty (CVD), Special Additional Duty of Customs, Central Surcharge and Cess, VAT / Sales Tax, Entertainment tax (other than the tax levied by local bodies), Central Sales Tax, Octroi and Entry Tax, Purchase Tax, Luxury Tax, Taxes on Lottery, State Cesses and Surcharges, Road Permit ...
GST के अंतर्गत वसूली गयी टैक्स की रकम किसको जाएगा ...
1. राज्य के अंदर लेन - देन व्यापार किया तो :: व्यापारी CGST & SGST दोनों लेगा ग्राहक से, CGST केंद्र सरकार के ख़ाते में जमा कराएगा और SGST राज्य सरकार के ख़ाते में जमा कराएगा ... इससे ग्राहक को कोई सरोकार नहीं वो व्यापारी का काम है ...
2. अंतर्राज्यीय लेन - देन व्यापार किया तो : IGST लगेगा जो की भेजे जाने वाले राज्य पर निर्धारित होगा। केंद्र सरकार द्वारा अंतरराज्यीय व्यापार या वाणिज्य के जरिये माल की आपूर्ति पर एक अतिरिक्त कर लगाने का दो साल की अवधि के लिए प्रस्तावित है। इससे ग्राहक को कोई सरोकार नहीं वो व्यापारी का काम है ...
आइये दो उदाहरण से समझते हैं ...
पहला उदहारण व्यापार करने वालों के लिए :::::: अभी का कर सिस्टम ...
लखनऊ से पंजाब माल भेजने पर :::
दाम = 1000. 00
VAT = 10% = 100.00
कुल दाम = 1100.00
इस माल को पंजाब से हिमाचल भेजा गया।
मुनाफा लगाया = 1000 तो कुल दाम हुआ =2100.00
VAT 10% = 210.00
कुल दाम ग्राहक को = 2310.00
अब यही मामला GST लगने के बाद
लखनऊ से पंजाब माल भेजने पर :::
दाम = 1000. 00
CGST 5% = 50.00
SGST 5% = 50.00
कुल दाम = 1100.00
इस माल को पंजाब से हिमाचल भेजा गया।
मुनाफा लगाया = 1000 तो कुल दाम हुआ =2100.00
IGST = 10 % = 210.00
टैक्स input 210 - 100 = 110
कुल दाम ग्राहक को = 2210.00
ग्राहक को फायदा हुआ रुपये 100 का ..
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दूसरा उदहारण उत्पादन करने वालों के लिए :::::: अभी का कर सिस्टम ...
उत्पादन लागत = 100000.00
मुनाफा जोड़े 10% = 10000.00
Excise = 12.5% = 13750.00
उत्पादन के बाद दाम = 123750.00
VAT 12% = 15469.75
उत्पादन करने वाले का फाइनल इनवॉइस व्होलसेलर को = 139218.75
व्होलसेलर का मुनाफा 10% = 13921. 80
VAT 10% = 15314.00
दाम रिटेलर को = 168454.65
रिटेलर मुनाफ़ा 10% = 16845.50
VAT 10% = 18530.00
ग्राहक को दाम = 203830.17
अब यही गणित नए GST के अंतर्गत ::
उत्पादन लागत = 100000.00
मुनाफा जोड़े 10% = 10000.00
Excise = 0 % = 0.00
उत्पादन दाम = 110000.00
SGST @5% = 5500.00
CGST @5% = 5500.00
उत्पादन करने वाले का इनवॉइस वैल्यू = 121000.00
मुनाफा 10% = 12100.00
व्होलसेलर को दाम = 133100.00
SGST @5% = 6655.00
CGST @5% = 6655.00
व्होलसेलर की इनवॉइस रिटेलर को = 146410.00
रिटेलर मुनाफ़ा 10% = 14641.00
दाम = 161051.00
SGST @5% = 8053.00
CGST @5% = 8053.00
ग्राहक को दाम = 177157.00
ग्राहक को कुल मुनाफा = 26673.00
अतः एक जुलाई के बाद से जो भी ग्राहक बिल नहीं लेगा वो खुद के नुक्सान का जिम्मेदार होगा ... मांग कर जबरदस्ती बिल लेना हमारे - आपके लिए मुनाफे का सौदा है ... कुछ चोर टाइप व्यापारियों के चक्कर में न पड़ें ... GST का स्वागत करें ...
.
उद्यमी या व्यापारी द्वारा वसूला गया कर जमा कराना उसकी जिम्मेदारी है .. ये वो पहले भी करता आया है .. इससे उपभोक्ता को कोई मतलब नहीं .. 20 लाख से नींचे के व्यापारियों को कोई GST का चक्कर नहीं है .. अतः चाय के खोखे, पान के अड्डे, अण्डा भुर्जी का ठेला, बाटी-चोखा और पकौड़ी की टंकी या सीरी - खरोड़े का ठेला आदि .. इन सबको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला .. ये यथावत चलते रहेंगे बिना किसी नुक्सान .. तो GST के नाम पर गरीब के बुरखे के पीछे से छाती कूटन समारोह से भी जाने से बचें .. 75 लाख तक के व्यापारियों को भी पिद्दी से चार return भरने हैं जो कि वो पहले भी करता आया है .. अब ये आसान हो गया है .. सारे टैक्स ऑनलाइन, डेबिट या क्रेडिट कार्ड या NEFT से ही भरे जाँएगे .. बैंक में लाइन लगाने के लिए जाने की जरूरत नहीं .. नगद में कर सिर्फ 2 लाख वार्षिक तक ही भरे जाएंगे ..
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तो ग्राहकों ... Insist for Bill ... और व्यापारी जी आप भी बिल फाड़िये ... GST से भारत का GDP कम से कम 2% बढ़ेगा .. ख़ुशी ख़ुशी GST में घुस जाइये ..

सब्र नही है रह गया,, ऐ क्रोधातुर इंसान,,, विवेकहीन,,,अज्ञानी तू,, हर रिश्ते से अंजान,, माँ बाप सब भूलकर,,, अपने आपे में खोय,,, देख परायी चूपड़ी,,, तू ललचाये जीव,,, मन तेरा गन्दा हो गया,, नही रह गया तू इंसान,, आज ये तू जानले,, ये है कलयुग की पहचान,,

सब्र नही है रह गया,,
ऐ क्रोधातुर इंसान,,,
विवेकहीन,,,अज्ञानी तू,,
हर रिश्ते से अंजान,,
माँ बाप सब भूलकर,,,
अपने आपे में खोय,,,
देख परायी चूपड़ी,,,
तू ललचाये जीव,,,
मन तेरा गन्दा हो गया,,
नही रह गया तू इंसान,,
आज ये तू जानले,,
ये है कलयुग की पहचान,,

कोई भी मनुष्य परिपूर्ण नही होता है ईश्वर के सिवा

मुझे ये नही समझ में आता हमारे प्रधानमंत्री जी जिनको दुनिया सराह रही है,,,उनकी कुछ लोग मात्र अपनी संकुचित सोच के कारण बुरा ही कहते है या उनमे बुरा ही देखते है,,,मतलब हमने 70 साल देखे है जिनमे पूर्व की सरकारों ने खा लिया देश को और आप बुलेट ट्रेन की बात करते हैं,अरे पहले पैसेंजर ट्रेन का ढांचा तो बदल ले जो लटक लटक कर चल रहा है,, लेकिन आपको ये पता ही नही की बुलेट ट्रेन मोदी जी के शाशन काल में नही चली,,,
भाइयों बूँद बूँद से सागर भरता है और कोई भी मनुष्य परिपूर्ण नही होता है ईश्वर के सिवा फिर ,,
इतनी ईर्ष्या क्यों,,,
ना मैं कांग्रेसी हूँ
नाही बीजेपी वाला
पर मोदी जी से आशा तो है ही

विचार कीजियेगा,,,

Nirmal Earthcarefoundation Ngo

Monday, June 26, 2017

जीने_की_राह

#जीने_की_राह
*गीता के अध्याय 9 श्लोक 30 मे लिखा है कि अतिश्य दुराचारी भी भक्ति  करके महात्मा के समान हो सकता है।*

#जीने_की_राह
*मानव शरीर मे जो भी प्राप्त हो रहा है वह पूर्व जन्मों का संग्रह किये हुये भक्ति से प्राप्त होता है।*

#जीने_की_राह
*इस संसार मे कोई किसी का सगा नही है सब पूर्व जन्म का ऋण लेने देने के लिये एक दूसरे से जुड़ते है।*

#जीने_की_राह
*इन्द्र को भी इस लोक मे आ कर गधे का जीवन जीना पड़ता है,तो ज़रा विचार कीजिये आप के साथ क्या बनेगी।*

#जीने_की_राह
*यह संसार दुखों का घर है इससे अलग एक संसार और है जहाँ कोई दुख नही है और ना ही जन्म मरण होता है !*

#जीने_की_राह
*इस पुस्तक को पढ़ने से उजड़े परिवार बस जाएंगे जिस परिवार में यह पुस्तक रहेगी नशा अपने आप झूट जाएगा!*

#जीने_की_राह
*इस पुस्तक में, पूर्ण परमात्मा कौन है? उसका नाम क्या है? उसकी भक्ति कैसी है? सब जानकारी मिलेगी !*

#जीने_की_राह
*उत्तम मिलने से यात्रा आसान हो जाएगी जो ये पुस्कतक घर मे न रखेगा वह संसार रूपी वन में अनमोल जीवन नष्ट करेगा!*

#जीने_की_राह
*पुस्तक घर-घर मे रखने योग्य है इसके पढ़ने तथा अमल करने से लोक तथा परलोक सुखी रहेंगे पापों से बचोगे!*

#जीने_की_राह
*यदि किसी भक्त को कुष्ट रोग है और वह भक्ति करने लगा है तो भक्त समाज को चाहिए उससे घृणा न करे!*

#जीने_की_राह
*पूर्व जन्म के पुण्यों के कारण घर मे धन होता है सर्व सुविधाएं होती हैं किसी को राज पद प्राप्त होता है जो भक्ति में बाधक होता है!*

#जीने_की_राह
*आम धारणा- बड़ा होकर पढ़ लिखकर अपने निर्वाह की खोज करके विवाह कराकर परिवार पोषण करेंगे।*

#जीने_की_राह
*क्या मांगू कुछ थिर न रहाई, देखत नैन चला जग जाइ। एक लख पूत सवा लख नाती, उस रावण के दीवा न वाती!*

#जीने_की_राह
*जो अभी है संतान हीन संतान के लिए दुखी ना हो क्योंकि अगले जन्म में !*

#जीने_की_राह
*पुस्तक से पता चलेगा कि  देवताओं का राज इन्द्र भी अगले जन्म में गधा बनता है !*

*सुख का सागर है पूर्ण परमात्मा और उसकी भगति जाने!*
#जीने_की_राह

*जीवित मर कर देखो यानी सांसारिक मोह माया नशे से दूर हो जाओ यही है!*
#जीने_की_राह

#जीने_की_राह
*में जाने की मानव जीवन फिर नही मिलेगा समय रहते करे सद्भगति!*

#जीने_की_राह
*स्त्री पुरुष दो चोले है इनमे उलझ कर अपना जीवन नाश ना करे और जाने सत्य को!*

*हमारे जीवन में हर रोज जाने अनजाने में किंतने पाप हो रहे है!* अवश्य जाने
#जीने_की_राह पुस्तक से

*विवाह में नाचना मूर्खो का कार्य है व्यर्थ की बकवास है तुरन्त त्याग करे और जाने!*
#जीने_की_राह

*जैसे विचार हम अपनी बहन बेटी के बारे में रखते है वैसे ही रखें सभी बहन बेटियों में!*
#जीने_की_राह

*आखिर आप सब को कब होगी फुरसत*
#जीने_की_राह

*विवाह में आज प्रचलित सभी रीति रिवाज है व्यर्थ की फिजूल खर्ची करे उनका त्याग !*
#जीने_की_राह

*प्रेरक प्रसंग से समझे सभी बहन बेटी की कैसा स्वभाव हो उनका अपने पति के प्रति!*
#जीने_की_राह

*सबसे बड़ी बाधा काम वासना का एक मात्र इलाज जाने* #जीने_की_राह में

*जाने पिछले जन्म के पुण्य भी हो सकते है मोक्ष के मार्ग में बाधक!*
#जीने_की_राह

*गलत विचार नही आपके मन में कोई नशा नही फिर भी भगति आवश्यक है !*
#जीने_की_राह

#जीने_की_राह
*पुस्तक पढने मात्र से आपके सांसारिक क्लेश होंगे दूर !*

#जीने_की_राह
*जाने मृत्यु के समय शरीर से प्राण कितने कठिन निकलते है!*

#जीने_की_राह
*अवश्य पढ़ें कैसे कुसंगती का असर होता है और भगती मार्ग में हो तोह कुसंगति का असर कम हो जाता है !*

#जीने_की_राह
*सभी बहनें जाने*

#जीने_की_राह
*और जाने क्यों साजो सिंगार भगती मार्ग में मना है!*

#जीने_की_राह
*शादियों में होने वाले फिजूल खर्च से बचे और सीखे !*

#जीने_की_राह
*और आसान हो जाएगी यदि आप हो पुर्ण संत की शरण में गृहस्थ जीवन ही भगवान को प्राप्त करने की सही विधि है !*

#जीने_की_राह
*ऐसे ना बोले कि देख लेंगे जो होगा सो होगा क्योंकि भगति बिना बहुत कष्ट होगा !*

#जीने_की_राह 
*मौत बिसारी बावरे अचरज कीन्हा कौन तन माटी में मिलेगा ज्यूँ आटे में लुन(नामक)मौत निश्चित है हमेशा याद रखें।*

#जीने_की_राह
*गीता के अध्याय 9 श्लोक 30 मे लिखा है कि अतिश्य दुराचारी भी भक्ति  करके महात्मा के समान हो सकता है।*

#जीने_की_राह
*मानव शरीर मे जो भी प्राप्त हो रहा है वह पूर्व जन्मों का संग्रह किये हुये भक्ति से प्राप्त होता है।*

#जीने_की_राह
*इस संसार मे कोई किसी का सगा नही है सब पूर्व जन्म का ऋण लेने देने के लिये एक दूसरे से जुड़ते है।*

#जीने_की_राह
*इन्द्र को भी इस लोक मे आ कर गधे का जीवन जीना पड़ता है,तो ज़रा विचार कीजिये आप के साथ क्या बनेगी।*

#जीने_की_राह
*यह संसार दुखों का घर है इससे अलग एक संसार और है जहाँ कोई दुख नही है और ना ही जन्म मरण होता है !*

#जीने_की_राह
*इस पुस्तक को पढ़ने से उजड़े परिवार बस जाएंगे जिस परिवार में यह पुस्तक रहेगी नशा अपने आप झूट जाएगा!*

#जीने_की_राह
*इस पुस्तक में, पूर्ण परमात्मा कौन है? उसका नाम क्या है? उसकी भक्ति कैसी है? सब जानकारी मिलेगी !*

#जीने_की_राह
*उत्तम मिलने से यात्रा आसान हो जाएगी जो ये पुस्कतक घर मे न रखेगा वह संसार रूपी वन में अनमोल जीवन नष्ट करेगा!*

#जीने_की_राह
*पुस्तक घर-घर मे रखने योग्य है इसके पढ़ने तथा अमल करने से लोक तथा परलोक सुखी रहेंगे पापों से बचोगे!*

#जीने_की_राह
*यदि किसी भक्त को कुष्ट रोग है और वह भक्ति करने लगा है तो भक्त समाज को चाहिए उससे घृणा न करे!*

#जीने_की_राह
*पूर्व जन्म के पुण्यों के कारण घर मे धन होता है सर्व सुविधाएं होती हैं किसी को राज पद प्राप्त होता है जो भक्ति में बाधक होता है!

मरने के बाद हमारा क्या होता है?

मरने के बाद हमारा क्या होता है?

परिचय. न तो यह शरीर तुम्हारा है और न ही तुम इस शरीर के हो। यह शरीर पांच तत्वों से बना है- अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश। एक दिन यह शरीर इन्हीं पांच तत्वों में विलीन हो जाएगा।'- भगवान कृष्ण

जब शरीर छूटता है तो व्यक्ति के साथ क्या होता है यह सवाल सदियों पुराना है। इस संबंध में जनमानस के चित्त पर रहस्य का पर्दा आज भी कायम है जबकि इसका हल खोज लिया गया है। फिर भी यह बात विज्ञान सम्मत नहीं मानी जाती, क्योंकि यह धर्म का विषय है।

मुख्यत: तीन तरह के शरीर होते हैं- स्थूल, सूक्ष्म और कारण। व्यक्ति जब मरता है तो स्थूल शरीर छोड़कर पूर्णत: सूक्ष्म में ही विराजमान हो जाता है। सूक्ष्म शरीर के विसरित होने के बाद व्यक्ति दूसरा शरीर धारण कर लेता है, लेकिन कारण शरीर बीज रूप है जो अनंत जन्मों तक हमारे साथ रहता है।

आत्मा पर छाई धुंध व्यक्ति रोज मरता है और रोज पैदा होता है, लेकिन उसे इस बात का आभास नहीं होता। प्रतिपल व्यक्ति जाग्रत, स्वप्न और फिर सुषुप्ति अवस्था में जिता है। मरने के बाद क्या होता है यह जानने के लिए सर्वप्रथम व्यक्ति के चित्त की अवस्था जानना जरूरी है या कहना चाहिए की आत्मा के ऊपर छाई भाव, विचार, पदार्थ और इंद्रियों के अनुभव की धुंध का जानना जरूरी है।

आत्मा शरीर में रहकर चार स्तर से गुजरती है

छांदोग्य उपनिषद (8-7) के अनुसार आत्मा चार स्तरों में स्वयं के होने का अनुभव करती है- (1)जाग्रत (2)स्वप्न (3)सुषुप्ति और (4)तुरीय अवस्था।

तीन स्तरों का अनुभव प्रत्येक जन्म लिए हुए मनुष्य को अनुभव होता ही है, लेकिन चौथे स्तर में वही होता है जो ‍आत्मवान हो गया है या जिसने मोक्ष पा लिया है। वह शुद्ध तुरीय अवस्था में होता है जहां न तो जाग्रति है, न स्वप्न, न सु‍षुप्ति ऐसे मनुष्य सिर्फ दृष्टा होते हैं- जिसे पूर्ण-जागरण की अवस्था भी कहा जाता है।

होश का स्तर तय करता गति

प्रथम तीनों अवस्थाओं के कई स्तर है। कोई जाग्रत रहकर भी स्वप्न जैसा जीवन जिता है, जैसे खयाली राम या कल्पना में ही जीने वाला। कोई चलते-फिरते भी नींद में रहता है, जैसे कोई नशे में धुत्त, चिंताओं से घिरा या फिर जिसे कहते हैं तामसिक।

हमारे आसपास जो पशु-पक्षी हैं वे भी जाग्रत हैं, लेकिन हम उनसे कुछ ज्यादा होश में हैं तभी तो हम मानव हैं। जब होश का स्तर गिरता है तब हम पशुवत हो जाते हैं। कहते भी हैं कि व्यक्ति नशे में व्यक्ति जानवर बन जाता है।

पेड़-पौधे और भी गहरी बेहोशी में हैं। मरने के बाद व्यक्ति का जागरण, स्मृति कोष और भाव तय करता है कि इसे किस योनी में जन्म लेना चाहिए। इसीलिए वेद कहते हैं कि जागने का सतत अभ्यास करो। जागरण ही तुम्हें प्रकृति से मुक्त कर सकता है।

क्या होता है मरने के बाद

सामान्य व्यक्ति जैसे ही शरीर छोड़ता है, सर्वप्रथम तो उसकी आंखों के सामने गहरा अंधेरा छा जाता है, जहां उसे कुछ भी अनुभव नहीं होता। कुछ समय तक कुछ आवाजें सुनाई देती है कुछ दृश्य दिखाई देते हैं जैसा कि स्वप्न में होता है और फिर धीरे-धीरे वह गहरी सुषुप्ति में खो जाता है, जैसे कोई कोमा में चला जाता है।

गहरी सुषुप्ति में कुछ लोग अनंतकाल के लिए खो जाते हैं, तो कुछ इस अवस्था में ही किसी दूसरे गर्भ में जन्म ले लेते हैं। प्रकृ‍ति उन्हें उनके भाव, विचार और जागरण की अवस्था अनुसार गर्भ उपलब्ध करा देती है। जिसकी जैसी योग्यता वैसा गर्भ या जिसकी जैसी गति वैसी सुगति या दुर्गति। गति का संबंध मति से होता है। सुमति तो सुगति।

लेकिन यदि व्यक्ति स्मृतिवान (चाहे अच्छा हो या बुरा) है तो सु‍षुप्ति में जागकर चीजों को समझने का प्रयास करता है। फिर भी वह जाग्रत और स्वप्न अवस्था में भेद नहीं कर पाता है। वह कुछ-कुछ जागा हुआ और कुछ-कुछ सोया हुआ सा रहता है, लेकिन उसे उसके मरने की खबर रहती है। ऐसा व्यक्ति तब तक जन्म नहीं ले सकता जब तक की उसकी इस जन्म की स्मृतियों का नाश नहीं हो जाता। कुछ अपवाद स्वरूप जन्म ले लेते हैं जिन्हें पूर्व जन्म का ज्ञान हो जाता है।

लेकिन जो व्यक्ति बहुत ही ज्यादा स्मृतिवान, जाग्रत या ध्यानी है उसके लिए दूसरा जन्म लेने में कठिनाइयां खड़ी हो जाता है, क्योंकि प्राकृतिक प्रोसेस अनुसार दूसरे जन्म के लिए बेहोश और स्मृतिहीन रहना जरूरी है।

इनमें से कुछ लोग जो सिर्फ स्मृतिवान हैं वे भूत, प्रेत या पितर योनी में रहते हैं और जो जाग्रत हैं वे कुछ काल तक अच्छे गर्भ की तलाश का इंतजार करते हैं। लेकिन जो सिर्फ ध्यानी है या जिन्होंने गहरा ध्यान किया है वे अपनी इच्छा अनुसार कहीं भी और कभी भी जन्म लेने के लिए स्वतंत्र हैं। यह प्राथमिक तौर पर किए गए तीन तरह के विभाजन है। विभाजन और भी होते हैं जिनका वेदों में उल्लेख मिलता है।

जब हम गति की बात करते हैं तो तीन तरह की गति होती है। सामान्य गति, सद्गगति और दुर्गति। तामसिक प्रवृत्ति व कर्म से दुर्गति ही प्राप्त होती है, अर्थात इसकी कोई ग्यारंटी नहीं है कि व्यक्ति कब, कहां और कैसी योनी में जन्म ले। यह चेतना में डिमोशन जैसा है, लेकिन कभी-कभी व्यक्ति की किस्मत भी काम कर जाती है।

आत्मा के पाँच कोष और चार स्तर।
कोष: जड़, प्राण, मन, बुद्धि और आनंद/ अवस्था: जाग्रत, स्वप्न, सु‍षुप्ति और तुरीय।

'एक आत्मा है जो अन्नरसमय है-एक अन्य आंतर आत्मा है, प्राणमय जो कि उसे पूर्ण करता है- एक अन्य आंतर आत्मा है, मनोमय-एक अन्य आंतर आत्मा है, विज्ञानमय (सत्यज्ञानमय) एक अन्य आंतर आत्मा है, आनंदमय।'-तैत्तिरीयोपनिषद

भावार्थ : जड़ में प्राण; प्राण में मन; मन में विज्ञान और विज्ञान में आनंद। यह चेतना या आत्मा के रहने के पाँच स्तर हैं। आत्मा इनमें एक साथ रहती है। यह अलग बात है कि किसे किस स्तर का अनुभव होता है। ऐसा कह सकते हैं कि यह पाँच स्तर आत्मा का आवरण है। कोई भी आत्मा अपने कर्म प्रयास से इन पाँचों स्तरों में से किसी भी एक स्तर का अनुभव कर उसी के प्रति आसक्त रहती है। सर्वोच्च स्तर आनंदमय है और निम्न स्तर जड़।

जो भी दिखाई दे रहा है उसे जड़ कहते हैं और हमारा शरीर जड़ जगत का हिस्सा है। जो लोग शरीर के ही तल पर जी रहे हैं वह जड़ बुद्धि कहलाते हैं, उनके जीवन में भोग और संभोग का ही महत्व है। शरीर में ही प्राणवायु है जिससे व्यक्ति भावुक, ईर्ष्यालु, क्रोधी या दुखी होता है। प्राण में ही स्थिर है मन। मन में जीने वाला ही मनोमयी है। मन चंचल है। जो रोमांचकता, कल्पना और मनोरंजन को पसंद करता है ऐसा व्यक्ति मानसिक है।

मन में ही स्थित है विज्ञानमय कोष अर्थात ‍बुद्धि का स्तर। जो विचारशील और कर्मठ है वही विज्ञानमय कोष के स्तर में है। इस ‍विज्ञानमय कोष के भी कुछ उप-स्तर है। विज्ञानमय कोष में ही स्थित है-आनंदमय कोष। यही आत्मवानों की ‍तुरीय अवस्था है। इसी ‍स्तर में जीने वालों को भगवान, अरिहंत या संबुद्ध कहा गया है। इस स्तर में शुद्ध आनंद की अनुभूति ही बच जाती है। जहाँ व्यक्ति परम शक्ति का अनुभव करता है। इसके भी उप-स्तर होते हैं। और जो इस स्तर से भी मुक्त हो जाता है-वही ब्रह्मलीन कहलाता है।

ईश्वर एक ही है किंतु आत्माएँ अनेक। यह अव्यक्त, अजर-अमर आत्मा पाँच कोषों को क्रमश: धारण करती है, जिससे की वह व्यक्त (दिखाई देना) और जन्म-मरण के चक्कर में उलझ जाती है। यह पंच कोष ही पंच शरीर है। कोई आत्मा किस शरीर में रहती है यह उसके ईश्‍वर समर्पण और संकल्प पर निर्भर करता है।

चार स्तर : छांदोग्य उपनिषद (8-7) के अनुसार आत्मा चार स्तरों में स्वयं के होने का अनुभव करती है (1)जाग्रत (2) स्वप्न (3) सुषुप्ति और (4) तुरीय अवस्था।

इसमें तीन स्तरों का अनुभव प्रत्येक जन्म लिए हुए मनुष्य को अनुभव होता ही है लेकिन चौथे स्तर में वही होता है जो ‍आत्मवान हो गया है या जिसने मोक्ष पा लिया है। वह शुद्ध तुरीय अवस्था में होता है जहाँ न तो जाग्रति है, न स्वप्न, न सु‍षुप्ति ऐसे मनुष्य सिर्फ दृष्टा होते हैं-जिसे पूर्ण-जागरण की अवस्था भी कहा जाता है।

A. अनुभूति के स्तर:- जाग्रत, स्वप्न, सु‍षुप्ति और तुरीय अवस्था।
B. व्यक्त (प्रकट) होने के कोष:- जड़, प्राण, मन, बुद्धि और आनंद।

अंतत: जड़ या अन्नरसमय कोष दृष्टिगोचर होता है। प्राण और मन का अनुभव होता है किंतु जाग्रत मनुष्य को ही विज्ञानमय कोष समझ में आता है। जो विज्ञानमय कोष को समझ लेता है वही उसके स्तर को भी समझता है।

अभ्यास और जाग्रति द्वारा ही उच्च स्तर में गति होती है। अकर्मण्यता से नीचे के स्तर में चेतना गिरती जाती है। इस प्रकृति में ही उक्त पंच कोषों में आत्मा विचरण करती है किंतु जो आत्मा इन पाँचों कोष से मुक्त हो जाती है ऐसी मुक्तात्मा को ही ब्रह्मलीन कहा जाता है। यही मोक्ष की अवस्था है।

इस तरह वेदों में जीवात्मा के पाँच शरीर बताए गए हैं- जड़, प्राण, मन, विज्ञान और आनंद। इस पाँच शरीर या कोष के अलग-अलग ग्रंथों में अलग-अलग नाम हैं जिसे वेद ब्रह्म कहते हैं उस ईश्वर की अनुभूति सिर्फ वही आत्मा कर सकती है जो आनंदमय शरीर में स्थित है। देवता, दानव, पितर और मानव इस हेतु सक्षम नहीं।