Wednesday, June 7, 2017

बहुत डर लगता है हमको,,, जाने क्यूँ सहमा,,,सहमा हूँ,,

बहुत डर लगता है हमको,,,
जाने क्यूँ सहमा,,,सहमा हूँ,,
कल तक जिनको अपना कहता था,,
आज वो हिन्दू है,,,मैं मुस्लिम,,
कोई इन्हें पिछड़ा कहता है,,,
कोई उन्हें अगड़ा कहता है,,,
मत बांटो धर्मो में हमको,,,
मैं भी तेरे खून का कतरा हूँ,,

नही है मंदिर में शांति,,,
नाही,,मस्जिद में आज़ादी,,
मत घोलो खून में यूं जहर,,
बनो सब कोई भारत के वासी,,
जहां पर एक धर्म हो,,
जहां पर एक हो बोली,,,
सब बने अपने भाई बहन,,,
यहाँ हो तहजीब गंगा,,जमुनी

नही होंगे गर हम एक,,
यूं ही टुकड़ो में बंट जाएंगे,,
हम भी अपनों के लहू को,,
व्यर्थ में ऐसे बहाएंगे,,,

आओ सब मिलकर एक हो
मिलकर भारत का गुणगान करे,,
अपने वीर सपूतों का,,
हम कुछ तो मान करे,,
इन्ही अफवाहों के दौर में
मैं डरा सहमा रहता हूँ
बहुत डर लगता है हमको,,,
जाने क्यूँ सहमा,,,सहमा हूँ,,

जय हिंद
जय भारत
एक भारत
अखण्ड भारत

Nirmalearthcarefoundation

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