Sunday, May 28, 2017

क्योंकि,,,,, मैं गरीब हूँ,,,,

ए सूरज की अम्मा,,रोटी दो काम पे जाना है,,
अरे तनिक सूरज के बारे में भी सोचोगे,,,
आये दिन उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही है,,,
भारी मन से मैंने भी बोला ठीक है आज देखूँगा,,,
और बातों बातों में खाना ही भूल गए
मन उदास था अपनी रोजी के लिए निकल पड़ा
धुप भी तेज थी ,,कोई सवारी नही दिख रही थी,,,
तभी एक बाबूजी दिखे,,, आते हुए
थोड़ी आस जगी,,,उन्होंने आवाज लगाई,,,
ए कालू इधर आ ,,,मैं गया हांजी बाबूजी
कहाँ जाना है ,,,जी मेरा नाम कालू नही है
मुन्ना है,,,
उन्होंने गुर्राते हुए ,,,,तुझे लार्ड गवर्नर कहु,,,
हरामखोर कही के,,
अरे साब गुस्सा क्यों करते हो
फिर भी मन में वो मेरी माँ ,,,बहन की गाली देते हुए,,,
मंडी जाना है,,,,
जी चलूँगा,,,40 रूपये लगते है बाबूजी,,
बाबू जी आग बबूला हो गए,,,बाप का माल समझ रखा है
चलना है तो चल 20 रूपये दूंगा
नही बाबूजी देखिये धुप बहुत तेज है,,,मैं बूढा हूँ,,
उतने में बाबूजी,,,तो कंपनी खोल ले ,,जो रिक्शा नही चला सकता और वो आगे चल दिए,,,
मुझे बेटे का ख्याल आया ,,,वो बीमार है,,उसकी दवाई भी लानी है ,,,सो बाबूजी रुकिए आइये इतने ही दे दीजियेगा,,,
बाबूजी बोले ,,,फिर क्यों अंग्रेजी झाड़ रहा था,,,
तुम गरीब लोग होते ही ऐसे हो,,,
मैं इतने में मंडी पहुच गया,,,उतने में एक मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी,,,
और मैं गिर पड़ा ,,,धुप तेज होने की वजह से मुझे चक्कर जैसा आया और मैं अचेत हो गया
और ,,,अब मेरी आत्मा मेरे शरीर का साथ छोड़कर जा चुकी थी,,,कई हजारों प्रश्न छोड़कर मेरे मन में
,,,ना गरीब की कोई आत्मा होती है,
,,,नाही उसकी कोई इज्जत,,,,
नाही कोई इच्छा,,,
हर तरह के बाबूजी ,,,हमारी भावनाओ को तार तार करते है,,,
क्योंकि,,,,, मैं गरीब हूँ,,,,
क्योंकि,,,,, मैं गरीब हूँ,,,,
,, मैं गरीब हूँ,,,,

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