Sunday, May 7, 2017

जल ही जीवन है ,,, मेरा तिरस्कार मत करो,,, मुझे प्यार करो

मैं एक नन्ही सी बूँद जो आसमान से गिरी ,,,,बड़े वेग से चलकर मैं धरा में समाहित हो गयी,,,कुछ हिस्सा धरा के गर्भ में चला गया,,,और शेष बन गया बहता पानी,,,क्षण प्रति क्षण मैं दुर्बल होती रही,,,मेरा आकार सिकुड़ता रहा फिर मेरा मिलान नदी से हुआ जहाँ पर कुछ सुकून मिला मेरा आकार बढ़ा और आगे समंदर में घुल गये जहां पर मेरी एक नन्ही सी बूँद ने असीमित आकार ले लिया,,,अब यहां लगा की मेरा सफर पूरा हो गया पर सूरज की ऊष्मा ने एक बार फिर मुझे अवशोषित कर लिया ,,,लेकिन बदलते समय के साथ साथ मेरा स्वरूप भी परिवर्तित हो गया,,, अब चारो तरफ कंक्रीट के जँगल है,,जहाँ पर आकर मैं अपने मार्ग से भटक गया,,, अब धरती के गर्भ में जाने की बजाय मैं नालों में बहता हूँ ,,,अब मुझमे शीतलता नही रह गयी,,,लोग मुझे पीते है तो रोगी हो जाते हैं,,,
किसी को gal blader में पथरी हो रही है,,,
तो किसी को kidney में
किसी को मेरी वजह से jaundice या पीलिया
तो किसी को ,,,टाइफाइड और dengu
मैंने लोगों को बहुत समझाया लेकिन लोग नही समझे,,,
इसी लिए कही राजस्थान का रेगिस्तान बना,,,
कही बुंदेलखंड,,,की बंजर भूमि,,
कभी लातूर और,,,मराठवाड़ा,,में सूखे का नाम मिला
लेकिन लोगों का क्या वो कहते हैं हम नही सुधरेंगे,,
इसीलिए मेरा मन  भी आज बहुत द्रवित है कि कही वो दिन ना आ जाए जब लोगो की आँखों में भी सूखा आ जाये,,,,
इसलिए मेरी कीमत पहचानो,,,
जल ही जीवन है ,,,
मेरा तिरस्कार मत करो,,,
मुझे प्यार करो

तभी तो बनेगा,,,
श्रेष्ठ भारत,,,
स्वच्छ भारत,,,
अखंड,,,और एक भारत,,,
जय हिंद,,,
जय भारत,,,

Nirmalearthcarefoundation

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