किसी भी देश की संप्रभुता,,,उस देश की एकता और अखण्डता पर निर्भर करती है,,,इसमें जाति,,, और,,,धर्म,,,, रुपी विष,,,दीमक की तरह उसको अंदर ही अंदर खोखला कर देता है,,,अंततः वह टूटकर बिखर जाता है,,,तत्पश्चात परिणाम क्या होगा उससे हम सभी भलीभांति परिचित है,,,,इसलिए ये हम सभी भारतवासियों का दायित्व है,,,कि हम अपने राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाये रखे,,,हम अपने अंदर पल रहे मैं रुपी अहं को नष्ट करके,,,हम बने,,,
तभी तो बनेगा ,,,
एक श्रेष्ठ भारत,,,
अतुल्य भारत,,,
स्वच्छ भारत,,,
शिक्षित भारत,,,
जय हिंद,,
जय भारत,,,
Nirmalearthcarefoundation
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