सब्र नही है रह गया,,
ऐ क्रोधातुर इंसान,,,
विवेकहीन,,,अज्ञानी तू,,
हर रिश्ते से अंजान,,
माँ बाप सब भूलकर,,,
अपने आपे में खोय,,,
देख परायी चूपड़ी,,,
तू ललचाये जीव,,,
मन तेरा गन्दा हो गया,,
नही रह गया तू इंसान,,
आज ये तू जानले,,
ये है कलयुग की पहचान,,
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