मृत्यु के दो चार घण्टे बाद तो कुत्ते भी भूल जाते है कि साहब कौन थे,,,फिर काहे का घमण्ड,, gm साहेब
Gm से मेरा तात्पर्य उच्च पदस्थ लोगो से जो workers को कीड़ा मकौड़ा समझते हैं,,,बहुत ही नीची नज़रो से देखते हैं
मृत्यु के दो चार घण्टे बाद तो कुत्ते भी भूल जाते है कि साहब कौन थे,,,फिर काहे का घमण्ड,, gm साहेब
Gm से मेरा तात्पर्य उच्च पदस्थ लोगो से जो workers को कीड़ा मकौड़ा समझते हैं,,,बहुत ही नीची नज़रो से देखते हैं
No comments:
Post a Comment