Sunday, May 28, 2017

क्योंकि,,,,, मैं गरीब हूँ,,,,

ए सूरज की अम्मा,,रोटी दो काम पे जाना है,,
अरे तनिक सूरज के बारे में भी सोचोगे,,,
आये दिन उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही है,,,
भारी मन से मैंने भी बोला ठीक है आज देखूँगा,,,
और बातों बातों में खाना ही भूल गए
मन उदास था अपनी रोजी के लिए निकल पड़ा
धुप भी तेज थी ,,कोई सवारी नही दिख रही थी,,,
तभी एक बाबूजी दिखे,,, आते हुए
थोड़ी आस जगी,,,उन्होंने आवाज लगाई,,,
ए कालू इधर आ ,,,मैं गया हांजी बाबूजी
कहाँ जाना है ,,,जी मेरा नाम कालू नही है
मुन्ना है,,,
उन्होंने गुर्राते हुए ,,,,तुझे लार्ड गवर्नर कहु,,,
हरामखोर कही के,,
अरे साब गुस्सा क्यों करते हो
फिर भी मन में वो मेरी माँ ,,,बहन की गाली देते हुए,,,
मंडी जाना है,,,,
जी चलूँगा,,,40 रूपये लगते है बाबूजी,,
बाबू जी आग बबूला हो गए,,,बाप का माल समझ रखा है
चलना है तो चल 20 रूपये दूंगा
नही बाबूजी देखिये धुप बहुत तेज है,,,मैं बूढा हूँ,,
उतने में बाबूजी,,,तो कंपनी खोल ले ,,जो रिक्शा नही चला सकता और वो आगे चल दिए,,,
मुझे बेटे का ख्याल आया ,,,वो बीमार है,,उसकी दवाई भी लानी है ,,,सो बाबूजी रुकिए आइये इतने ही दे दीजियेगा,,,
बाबूजी बोले ,,,फिर क्यों अंग्रेजी झाड़ रहा था,,,
तुम गरीब लोग होते ही ऐसे हो,,,
मैं इतने में मंडी पहुच गया,,,उतने में एक मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी,,,
और मैं गिर पड़ा ,,,धुप तेज होने की वजह से मुझे चक्कर जैसा आया और मैं अचेत हो गया
और ,,,अब मेरी आत्मा मेरे शरीर का साथ छोड़कर जा चुकी थी,,,कई हजारों प्रश्न छोड़कर मेरे मन में
,,,ना गरीब की कोई आत्मा होती है,
,,,नाही उसकी कोई इज्जत,,,,
नाही कोई इच्छा,,,
हर तरह के बाबूजी ,,,हमारी भावनाओ को तार तार करते है,,,
क्योंकि,,,,, मैं गरीब हूँ,,,,
क्योंकि,,,,, मैं गरीब हूँ,,,,
,, मैं गरीब हूँ,,,,

बच्चो के लालन पालन में महत्वपूर्ण बाते

बच्चो के लालन पालन में महत्वपूर्ण बाते

बच्चे हो

1- फिजिकली फिट(तंदरुस्त)
2- मेन्टली मोटिवेटेड (प्रेरित)

कैसे बनाये तंदरुस्त

बच्चो की नियमित दिनचर्या में एक आउटडोर(मैदानी) खेल जरूर रखे।

जो खेल वो रोज खेले

परीक्षा के दिनों में तो अवश्य वो खेल खेले (ये दिमाग की क्षमता बढ़ाता है)

कैसे करे प्रेरित।

बच्चो को कभी नहीं कहे कि वो कुछ नहीं कर सकता।

कभी भी उन्हें नकारत्मक सोच न दे (ये नहीं करोगे तो ऐसा हो जायेगा या कुछ नहीं बन पाओगे कह कर ना डराये) उन्हें प्रेरित करे। बड़े महापुरषो की कहानी सुना कर उनके सपने बनाये।

उनके किसी भी परिणाम की पहली प्रतिक्रिया नाखुशी न हो। जब भी वो किसी भी परिणाम को बताये या सुनाये।  हमेशा उत्साहित हो जाये उसकी तारीफ करे।
कुछ कमियां बतानी हो तो एक दिन का या थोड़े घंटों के बाद बताये।

बच्चे जो सोचते है वही बनते है। उन्हें प्रेरणा दायक कहानियां अवश्य सुनाये।

चीजो से प्रेरित न करे व्यक्तिव से प्रेरित करे( उन्हें ये न कहे की बड़ा होके ऐसी कार, ऐसा मकान या ऐसी लाइफस्टाइल जीएगा बल्कि ये कहे कि वो कैसा व्यक्ति बनेगा उनके आदर्श बनाये)

उन्हें जीवन में क्या वस्तुए पानी है वो न बता कर ये बताये की क्या करना है।

Friday, May 26, 2017

फिर ये अंतर क्यूँ,,,,,

जब भी हम किसी जाति,,, या धर्म की उन कुरीतियों के सम्बन्ध में बात करते हैं जो समाज को अंधविस्वास के कच्चे धागे से हमको बांधकर रखती है,,,जिनसे एक विशेष वर्ग को फायदा पहुचाने के लिए कुछ धर्म के ठेकेदार उन बातों या विचारो का विरोध करते है,,,,जो समाज हमेशा ही पुरुष प्रधान रहा है ,,,,वहां पर स्त्रियों को दासी या अपनी इच्छाओं को पूरी करने का साधन मात्र समझते हैं,,,अथवा घर की चारदीवारी में बंद करने वाली वस्तु मात्र ,,,जिसको मात्र वो जैसे चाहे उपयोग कर  सके ,,,ऐसी ही कई कुप्रथाएं प्रचलित है जिनसे हमारा पुरुषप्रधान समाज ग्रस्त है,,,
इनका अंत होना चाहिए ,,,,
क्योकि
औरत ही माँ है
औरत ही बहन है
वही हमारी बेटी भी है
उन्ही के रूप को जगजननी के रूप में पूजते है
फिर ये अंतर क्यूँ,,,,,

Thursday, May 25, 2017

पर मेरी आत्मा यही कहती है,,, की अब किसी को भी रिक्शे वाला नही बनाना,,,

आजकल के महगाई के ज़माने में,,,,
निकल लिए अपनी सवारी को लेकर,,,
मेरे लिए ये इज्जत की बात है,,,
कि मेरी रोजी,,,रोटी ईमानदारी की है,,,
लोग भले ही मुझे हीन भाव से देखते हो,,,
पर मैं नित अग्रसर रहता हूं,,,
अपने परिवार के पालन पोषण में,,,
मैं और मेरा रिक्शा कभी थकते नही,,,
निरन्तर चलते रहते हैं,,
बिना रुके,,बस और बस चलते रहते हैं,,,
मैं जानता हूँ जो मेरे माँ,,पापा ने मेरा नाम रखा है
वो लोग नही पुकारते हैं,,,
कोई मुझे काला कहता है,,
कोई गाली दे कर पुकारता है,,,
कोई उलटे सीधे नाम लेकर,,,,
मेरी इज्जत के तार तार करता है,,,
नाही हमारे लिए जनता है,,,
नहीं कोई जनप्रतिनिधि,,अथवा कोई नेता
क्योकि मैं गरीब हूँ,,,,एक रिक्शेवाला,,,,
ना कोई हिन्दू आता है
ना कोई मुसलमान,,,
ना कोई साधू संत
ना कोई इंसान,,,
बस उस भगवान को मेरी फ़िक्र है
जिसने मुझे बनाया,,,
पर मेरी आत्मा यही कहती है,,,
की अब किसी को भी रिक्शे वाला नही बनाना,,,

तुझे सब है पता मेरी माँ,,,,,

तेरी आँखों में आँखे डालकर जब देखता हूँ तो
कभी कभी मेरी होठों की मुस्कान भी आँखे नम कर जाती है,,
तो कभी नम आँखे भी मुश्कराने लगती है,,,,
और तब मेरा दिल बस यही कहता है,,,,
तुझे सब है पता मेरी माँ,,,,,

Tuesday, May 23, 2017

whygovernmentschooltooworshtinindia

मेरा अपने देश के सभी सरकारी शिक्षकों से एक प्रश्न है,,कि,, गरीब से गरीब आदमी या कोई रिक्शा चलाने वाला व्यक्ति भी किसी भी सरकारी स्कूल में नही पढ़ाना चाहता,,,
जबकि शिक्षकों का वेतन,,,50 हज़ार के लगभग या उससे ज्यादा है,,,जबकि प्राइवेट सेक्टर में 12 घण्टे का वेतन बमुश्किल 9000 रूपये मिलता है हमको तो ये भी नही पता की ये छठा वेतन क्या होता है,,,या सातवाँ वेतन ,,,,हमारी सैलरी बॉस के मूड पर निर्भर करती है फिर भी हमारा खून पसीने के रूप में गिरता है फिर सरकारी तंत्र ऐसा क्यों है

#whygovernmentschooltooworshtinindia

Sunday, May 21, 2017

indiancultureisgreatinworld

आजकल के बच्चे इंजीनियरिंग और डॉक्टरी की पढ़ाई में इतना पढ़ जाते है,,,की उनको माँ बाप के सिखाये संस्कार,,और सीख,,,झूठे लगने लगते है,,,यही से उनका पतन होना शुरू हो जाता है ,,,क्योकि वो शायद भूल जाते है कि माँ बाप की डांट और मार ही ने उन्हें डॉक्टर या इंजीनियर बनाया है
#indiancultureisgreatinworld

deshhitisfirshtformylife

देशहित के लिए पागलपन भी,,,जरूरी है,,,
क्योकि कई काम दिमाग से ना हो सकते है
#deshhitisfirshtformylife

careyourparents

आजकल हमारे बच्चे माँ बाप को भी खिलौनों की तरह समझने लगते है,,,क्योकि नये रिश्ते उन्हें,,,
व्हाट्सअप,,,,
और
Facebook,,, में दिखते है,,,,
इन रिश्तों के लिए शायद अब समय नही,,,

#careyourparents

हर उस परम्परा का अंत होना चाहिए जो राष्ट्र केलिए घातक हो

जब भी रूढ़िवादी परंपराओं का कोई भी व्यक्ति या वर्ग विरोध करता है ,,,तो उसके विरूद्ध जैसे तूफ़ान सा खड़ा हो जाता हैं,,,हर तरफ थोड़ी सी भीड़ करोड़ो पर भारी हो जाती है क्योकि वो कुछ हज़ार गलत लोग उस समय कई करोड़ लोगो को डराने में कामयाब हो जाते हैं,,,,पर जब भी गलत परंपराएं टूटती हैं हमारे समाज के हर व्यक्ति को लाभ पहुँचता है,,,
फिर चाहे वो ,,,,सतीप्रथा हो,,,
या बहुविवाह,,,
या,,लड़की और लड़कों में अंतर हो,,
या,,पर्दा प्रथा,,
या दहेजप्रथा हो,,
या तलाक,,तलाक,,तलाक,,या ,,तीन तलाक,,,
धर्म या मजहब के प्रति कट्टर पंथ हो
,,,

#हरउसपरम्पराकाअंतहोनाचाहिएजोराष्ट्रकेलिएघातकहो

Sunday, May 14, 2017

सच में जाने तू कहाँ है बस यही सोच कर तेरे पद चिन्हों के पीछे भागता रहता है ये मन

सच में जाने तू कहाँ है बस यही सोच कर तेरे पद चिन्हों के पीछे भागता रहता है ये मन जब बजता था वो हॉर्न चिलचिलाती हुई गर्मी में हम अपने टूटे हुए छप्पर के नीचे सुनते रहते थे,,और वो हॉर्न की आवाज सुनते ही जैसे मन में आशा की किरण जल उठती थी वो बरगद के पत्तो पर बर्फ के रंग बिरंगे छल्ले और उसमे तरह तरह की शक्कर की चासनी और शहद अब नही दिखती तुम नाही बच्चो में तुम्हारा इंतज़ार शायद तुम्हारी जगह किसी और ने लेली है वो मीठा जहर है जो आज के लोगो को खूब भाता है और मन यही ठिठुरकर अपने आप से पूछता है कि सच में जाने तू कहाँ है गाव की हर गली में कोई कांच की शीशी प्लास्टिक का सामान हो या लोहे के टुकड़े हम ढूंढते ही रहते थे क्योकि इन्ही के बदले हमे तुम मिलती थी सच में वो मीठी मीठी पट्टी गुड वाली उसमे मूंगफली के दानो वाली कितना स्वाद था उसमे आज जमाना भी बेस्वाद हो गया है तू भी जमाने के साथ ओझल हो गयी और नजरे ढूंढती रहती है एक ख़ुशी की खोज में उस स्वाद की खोज में उस बचपन की खोज में उस टूटे हुए छप्पर की खोज में और कुछ भी नही मिलता फिर मेरे मन सिसक सिसक कर बहते हुए आंसुओ से पूछते है की शायद तू अब नही यहा है और,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, फिर यही आवाज आती है ,,,,,,,,,,,, सच में जाने तू कहा है

जाने,,क्यूँ आज दिल क्रुद्ध है,, ना चाहकर भी तुम्हारे विरूद्ध है,, #अमीरvsगरीब

जाने,,क्यूँ आज दिल क्रुद्ध है,,
ना चाहकर भी तुम्हारे विरूद्ध है,,

#अमीरvsगरीब

अंतर्मन,,में उलझा मन,,,

उस परिस्थिति,,में क्या करे ये मन जिनके साथ हम जुड़े है ,,,वो कभी कभी गलत विचारों का समर्थन करते हैं,,उनको समझाना भी मुश्किल है,,,तो क्या उनका साथ छोड़ना ही उचित है ,,,,क्योकि जहाँ पर दस लोगों में आठ लोग गलत का ही समर्थन कर रहे हो,,,क्योकि वो स्वार्थ से परे है,,,उनको सिर्फ अपना ही सुख,,अपनी ही सुविधा की चिंता है,,,वो मेरे खिलाफ नही है,,,क्योकि कल मैं गरीब था ,,पर समय और परिस्थिति बलवान होने के कारण मैं भी उनके साथ खड़ा हो सकता हूँ,,,
वो गन्दे लोगो को गाली देते हैं,,,जिनके बदन पर कटे फ़टे कपडे है,,,
वो मजदूर है,,,शायद इसलिए मजबूर है,,,
वो रोगी है,,,क्योकि वो अपने इलाज के लिए हमारी दया पर निर्भर है,,,
वो हमारे घर का कूड़ा उठाते है,,,शायद इसलिए हम उनसे दूर से गुजरते हैं,,,
वो अनपढ़ है,,,इसलिए उनको बोलने का सलीका नही पता,,इसलिए हम उन्हें बदतमीज कहते है,,,
शायद इसलिए हम अपने आपको अमीर ,,और,,इन्हें गरीब कहते है,,,
पर मैं तो गरीब उसे समझता हूँ,,,
जो अपनी मानशिकता से गरीब है,,जिसे सिर्फ अपने ही अपने लगते है,,

मैं तो गरीब उसे समझता हूँ,,,
जिनका सारा समय तेरा मेरा करने में निकल जाता है

मैं तो गरीब उसे समझता हूँ,,,
जो जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को शून्य बनाने वाली मशीन समझते है,,,

#मैं गरीबहूँक्याइसीलिएमैंअभिशप्तहूँ

Feelingsad😢😢😢😢😢

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बाहुबली,,2,,,सच में बाहुबली है

अद्भुत,,,अतुल्य,,,कल्पना से परे,,,आश्चर्यजनक,,,और ऐसे लाखो शब्द मेरे मन मस्तिष्क में गूँज रहे है,,,और वो सच किया है ,,,बाहुबली की पूरी टीम ने ,,,जिसने,,भारतीय संस्कृति की अप्रतिम छाप,,सच में ना ही आज जी फिल्मो जैसी,, अभद्रता ना ओछापन फिर भी कलेक्शन  के मामले सारे रिकॉर्ड तोड़ते एक कीर्तिमान स्थापित किया,,,representation भी दमदार ,,,हमेशा ऐसी फिल्में बननी चाहिए,,,

एक बार फिर से धन्यवाद,,,

Thursday, May 11, 2017

तभी तो बनेगा ,,, एक श्रेष्ठ भारत,,, अतुल्य भारत,,, स्वच्छ भारत,,, शिक्षित भारत,,, जय हिंद,, जय भारत,,,

किसी भी देश की संप्रभुता,,,उस देश की एकता और अखण्डता पर निर्भर करती है,,,इसमें जाति,,, और,,,धर्म,,,, रुपी विष,,,दीमक की तरह उसको अंदर ही अंदर खोखला कर देता है,,,अंततः वह टूटकर बिखर जाता है,,,तत्पश्चात परिणाम क्या होगा उससे हम सभी भलीभांति परिचित है,,,,इसलिए ये हम सभी भारतवासियों का दायित्व है,,,कि हम अपने राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाये रखे,,,हम अपने अंदर पल रहे मैं रुपी अहं को नष्ट करके,,,हम बने,,,

तभी तो बनेगा ,,,
एक श्रेष्ठ भारत,,,
अतुल्य भारत,,,
स्वच्छ भारत,,,
शिक्षित भारत,,,
जय हिंद,,
जय भारत,,,

Nirmalearthcarefoundation

Wednesday, May 10, 2017

आईये भारतीय बने जय जवान,, जय हिंद जय भारत,,,,

आखिर कब तक हम एक दुसरे से लड़ते रहेंगे,,,एक दुसरे से झगड़ते रहेंगे,,,,अपनी जाति,,और अपने धर्म को लेकर,,,
कब तक अपनी रूढ़िवादी परंपराओं को बोझ की तरह ढोते रहेंगे सिर्फ अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए,,,
इस तरह क्या हम कभी भी अखंड भारत का निर्माण कर सकते है,,,या अपने अखंड राष्ट्र को कई टुकड़ो में बांटना चाहते है,,,अगर यही मानशिकता हमारी आजादी से पहले रही होती तो आज भी हम अंग्रेजों के ग़ुलाम होते ,,,,,
इसलिए,,,आईये एक संकल्प ले ,,,अपने राष्ट्रहित के लिए अपनी धर्म,,अपनी जाति,,, अपने दम्भ,,,से पहले हम भारतीय बने नही तो वो दिन दूर नही जब भारत कई खण्डों में बंट जाएगा,,और तब अंग्रेजों ने शाशन किया अब हमारा पडोसी चीन हम पर शाशन करेगा,,,

इसलिए आईये भारतीय बने

जय जवान,,
जय हिंद
जय भारत,,,,

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जब तक हमारा देश,,,जाति और धर्म में बंटा रहेगा,,तब तक हम अखण्ड राष्ट्र की नींव तक नही रख सकते #leavecastophobia

जब तक हमारा देश,,,जाति और धर्म में बंटा रहेगा,,तब तक हम अखण्ड राष्ट्र की नींव तक नही रख सकते
#leavecastophobia

Sunday, May 7, 2017

जय हिंद जय भारत हर क्षण हम माँ भारती के सच्चे सपूतों का साथ देने के लिए तैय्यार है,,,हमारी,,आन,, बान,,, शान,,,है ,,,हमारे भारतीय जवान,,,

राकेट लांचर नही चाहिए,,, राकेट बनकर टूट पड़ेंगे,,,
पाक की नापाक हरकतों ,,,का मुहतोड़ जवाब अब हम देंगे,,,
बहुत हो चुकी निंदा,,,,इन कुत्तो को जिन्दा ही दफ़न करेंगे,,,
संभल जाओ,,,पत्थरबाजों,,,हिजड़ो की तरह हरकते करना बंद करो,,,
आ गये जो अपनी जिद पर,,,तुमको ताबूतों में चुनवा देंगे

जय हिंद
जय भारत
हर क्षण हम माँ भारती के सच्चे सपूतों का साथ देने के लिए तैय्यार है,,,हमारी,,आन,, बान,,, शान,,,है ,,,हमारे भारतीय जवान,,,

जय माँ भारती,,
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जल ही जीवन है ,,, मेरा तिरस्कार मत करो,,, मुझे प्यार करो

मैं एक नन्ही सी बूँद जो आसमान से गिरी ,,,,बड़े वेग से चलकर मैं धरा में समाहित हो गयी,,,कुछ हिस्सा धरा के गर्भ में चला गया,,,और शेष बन गया बहता पानी,,,क्षण प्रति क्षण मैं दुर्बल होती रही,,,मेरा आकार सिकुड़ता रहा फिर मेरा मिलान नदी से हुआ जहाँ पर कुछ सुकून मिला मेरा आकार बढ़ा और आगे समंदर में घुल गये जहां पर मेरी एक नन्ही सी बूँद ने असीमित आकार ले लिया,,,अब यहां लगा की मेरा सफर पूरा हो गया पर सूरज की ऊष्मा ने एक बार फिर मुझे अवशोषित कर लिया ,,,लेकिन बदलते समय के साथ साथ मेरा स्वरूप भी परिवर्तित हो गया,,, अब चारो तरफ कंक्रीट के जँगल है,,जहाँ पर आकर मैं अपने मार्ग से भटक गया,,, अब धरती के गर्भ में जाने की बजाय मैं नालों में बहता हूँ ,,,अब मुझमे शीतलता नही रह गयी,,,लोग मुझे पीते है तो रोगी हो जाते हैं,,,
किसी को gal blader में पथरी हो रही है,,,
तो किसी को kidney में
किसी को मेरी वजह से jaundice या पीलिया
तो किसी को ,,,टाइफाइड और dengu
मैंने लोगों को बहुत समझाया लेकिन लोग नही समझे,,,
इसी लिए कही राजस्थान का रेगिस्तान बना,,,
कही बुंदेलखंड,,,की बंजर भूमि,,
कभी लातूर और,,,मराठवाड़ा,,में सूखे का नाम मिला
लेकिन लोगों का क्या वो कहते हैं हम नही सुधरेंगे,,
इसीलिए मेरा मन  भी आज बहुत द्रवित है कि कही वो दिन ना आ जाए जब लोगो की आँखों में भी सूखा आ जाये,,,,
इसलिए मेरी कीमत पहचानो,,,
जल ही जीवन है ,,,
मेरा तिरस्कार मत करो,,,
मुझे प्यार करो

तभी तो बनेगा,,,
श्रेष्ठ भारत,,,
स्वच्छ भारत,,,
अखंड,,,और एक भारत,,,
जय हिंद,,,
जय भारत,,,

Nirmalearthcarefoundation

Monday, May 1, 2017

जय जवान,, जय हिंद जय भारत,,,,

जवानों के साथ की गयी बर्बरता के बाद मेरा मन यही है कि पाकिस्तान जैसे नीच देश को अब दुनिया के नक़्शे से मिटा देना चाहिए,,,,कब तक हम अंजाम की परवाह करेंगे,,,कब तक मानवाधिकार को अपनी बैशाखी बनाते रहेंगे,,,हमे नही चाहिए ऐसे मानवाधिकार,,जो हमारे जवानों के हांथो को जंजीरों से जकड़े हुए है,,,,मोदी जी से विनम्र निवेदन है कि अब बातें नही एक्शन होना चाहिए और इस करतूत का उन्हें मुहतोड़ जवाब देना चाहिए,,,,
क्योंकि अपने शरीर का कोई अंग सड़ जाए तो उसे काटकर फेंकना पड़ता है ,,,वैसे ही इस पाकिस्तान को भी लंगड़ा करना है ताकि कभी भी ये खड़ा ना हो पाए,,,

जय जवान,,
जय हिंद
जय भारत,,,,

Nirmal Earthcarefoundation Ngo

जय जवान,, जय हिंद जय भारत,,,,

जवानों के साथ की गयी बर्बरता के बाद मेरा मन यही है कि पाकिस्तान जैसे नीच देश को अब दुनिया के नक़्शे से मिटा देना चाहिए,,,,कब तक हम अंजाम की परवाह करेंगे,,,कब तक मानवाधिकार को अपनी बैशाखी बनाते रहेंगे,,,हमे नही चाहिए ऐसे मानवाधिकार,,जो हमारे जवानों के हांथो को जंजीरों से जकड़े हुए है,,,,मोदी जी से विनम्र निवेदन है कि अब बातें नही एक्शन होना चाहिए और इस करतूत का उन्हें मुहतोड़ जवाब देना चाहिए,,,,
क्योंकि अपने शरीर का कोई अंग सड़ जाए तो उसे काटकर फेंकना पड़ता है ,,,वैसे ही इस पाकिस्तान को भी लंगड़ा करना है ताकि कभी भी ये खड़ा ना हो पाए,,,

जय जवान,,
जय हिंद
जय भारत,,,,

Nirmal Earthcarefoundation Ngo

श्रमिको के लिए कभी भी श्रमिक दिवस नहीं आता

श्रमिको के लिए कभी भी श्रमिक दिवस नहीं आता है,,,क्योकि मुठी भर नेता फैक्ट्री मालिको,,की जेब में होते है ,,,,भाई हमारी कोई ना छुट्टी होती है,,,ना अवकाश जब गये उस दिन के पैसे मिले नही गये तो दिहाड़ी कट गयी,,,,, that's like happened in our  currupt indian system only

Nirmal Earthcarefoundation Ngo