Sunday, November 26, 2017

आज मखमल से कई ज़ख्म अपने सिल रहे जैसे कलयुग की किस्मत ,,, धृतराष्ट्र कई लिख रहे,,

उद्दंड हैं पाखण्ड है
हृदय में अगन प्रचण्ड है
ना ही कोई आकार है,,
ना ही कोई विकार है,,
मनुष्य ही बनने को बैठा ,,
आज अपना चित्रकार है

आज मखमल से कई
ज़ख्म अपने सिल रहे
जैसे कलयुग की किस्मत ,,,
धृतराष्ट्र कई लिख रहे,,

अज्ञान है,,,अहंकार है,,
विश्वास पर ही वार है,,
नैतिकता का लोप है,,,
जाने ये कैसा शोक है,,,
बहु बेटियां,,है डरी डरी,,,
भय डराता बारम्बार है,,,
है नही यहां कृष्ण कोई,,
कोई ना सुनता पुकार है,,,
चीर हरण नित रोज होता,,
जैसे द्रौपदी ही इसका शिकार है
घोर गगन छाया हुआ,,
जैसे सिंह की दहाड़ है,
रोज अर्जुन मर रहे,,
दुर्योधन इतने हैं खड़े
आज मखमल से कई
ज़ख्म अपने सिल रहे
जैसे कलयुग की किस्मत ,,,
धृतराष्ट्र कई लिख रहे,,

जैसे कलयुग की किस्मत ,,,
धृतराष्ट्र कई लिख रहे,,

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www.earthcarengo.org
8699208385
वृक्ष लगाओ ,,,,धरा बचाओ

Tuesday, October 10, 2017

ऐ कलम फिर लिख दे वही ग़ज़ल,,यहाँ तो दिल टूटा हुआ है,जिसके टुकड़े हज़ार हुए है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

ऐ कलम फिर लिख दे वही ग़ज़ल,,यहाँ तो दिल टूटा हुआ है,जिसके टुकड़े हज़ार हुए है
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Saturday, October 7, 2017

विरोध की राजनीति इतनी मत कीजिये,,कि विरोध शब्द ही आपका विरोधी बन जाये Nirmal Earthcarefoundation Ngo

विरोध की राजनीति इतनी मत कीजिये,,कि विरोध शब्द ही आपका विरोधी बन जाये
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ऐ दिमाग वाले इंसान बता क्या तू दिल से हंस सकता है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

ऐ दिमाग वाले इंसान बता क्या तू दिल से हंस सकता है
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वो आसमां पे चिराग जलते हुए,, हमने चाँद को देखा है भटकते गलियों में Nirmal Earthcarefoundation Ngo

वो आसमां पे चिराग जलते हुए,,
हमने चाँद को देखा है भटकते गलियों में
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जहाँ को बांटने वालों की भीड़ बहुत है यहाँ,, मिलते दो भाइयों को देखे तो जमाने गुजर गए Nirmal Earthcarefoundation Ngo

जहाँ को बांटने वालों की भीड़ बहुत है यहाँ,, मिलते दो भाइयों को देखे तो जमाने गुजर गए
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Friday, October 6, 2017

मैं,, अपने अंतिम क्षणों में अपने साथ पैसे नही ले जा सका,,पर सुकून है हज़ारों दुआएं आज भी साथ है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

मैं,, अपने अंतिम क्षणों में अपने साथ पैसे नही ले जा सका,,पर सुकून है हज़ारों दुआएं आज भी साथ है
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सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं,, और,, मनुष्यता से बड़ा कोई धर्म नही Nirmal Earthcarefoundation Ngo

सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं,, और,,
मनुष्यता से बड़ा कोई धर्म नही
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Thursday, October 5, 2017

एक मेरे मित्रवर ने नीचे चित्र की बाते चुटकुले स्वरूप मुझे भेजा,,, ये कैसे और किस प्रकार के संदेश है जो हमारी संस्कृति और हमारे संस्कारों का ,,,हमारे विस्वास का किस तरह मजाक बना रहे है ,,,हमारे माता पिता ये बचपन से सीख देते आये है सत्कर्म का फल अच्छा होता है,,,और बुरे कर्मो का फल गलत लेकिन शायद हम उनकी सीख को मजाक में ही लिए इसीलिए इन आत्मिक शब्दों का हम अपमान कर रहे है विचार कीजिये,,,,,हम कहां जा रहे है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

एक मेरे मित्रवर ने नीचे चित्र की बाते चुटकुले स्वरूप मुझे भेजा,,, ये कैसे और किस प्रकार के संदेश है जो हमारी संस्कृति और हमारे संस्कारों का ,,,हमारे विस्वास का किस तरह मजाक बना रहे है ,,,हमारे माता पिता ये बचपन से सीख देते आये है सत्कर्म का फल अच्छा होता है,,,और बुरे कर्मो का फल गलत
लेकिन शायद हम उनकी सीख को मजाक में ही लिए इसीलिए इन आत्मिक शब्दों का हम अपमान कर रहे है

विचार कीजिये,,,,,हम कहां जा रहे है
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अहम का अध्याय शुरू हो गया,,,कौन रहता,,कौन अवशेष होगा,,पर समय का पहिया निरन्तर चलता रहेगा Nirmal Earthcarefoundation Ngo

अहम का अध्याय शुरू हो गया,,,कौन रहता,,कौन अवशेष होगा,,पर समय का पहिया निरन्तर चलता रहेगा
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Wednesday, October 4, 2017

शायद इस चराचर जगत में हमारा भारत ही अकेला राष्ट्र होगा जहां उच्च न्यायालय को ये बताना पड़े कि,,,राष्ट्रगान और राष्टीय ध्वज का सम्मान हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है,,, जिस प्रकार राष्ट्रगान किसी भी राष्ट्र की राष्ट्रीय अखण्डता,,,,, पंथ निरपेक्षता ,,,और,,,लोकतांत्रिक भावना का प्रसार है,,, ठीक उसी प्रकार हमारा राष्ट्रध्वज कपड़े और श्याही से रँगा टुकड़ा मात्र नही अपितु हमारी आन,,,बान,,, शान है इसलिए इसमें अपनी कुत्सित मानशिकता से ऊपर उठकर और गंदी और ओछी राजनीति छोड़कर,,,इसका सम्मान करना सीखें जय हिंद जय भारत Nirmal Earthcarefoundation Ngo

शायद इस चराचर जगत में हमारा भारत ही अकेला राष्ट्र होगा जहां उच्च न्यायालय को ये बताना पड़े कि,,,राष्ट्रगान   और राष्टीय ध्वज का सम्मान हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है,,,

जिस प्रकार राष्ट्रगान किसी भी राष्ट्र की राष्ट्रीय अखण्डता,,,,, पंथ निरपेक्षता ,,,और,,,लोकतांत्रिक भावना  का प्रसार है,,,

ठीक उसी प्रकार हमारा राष्ट्रध्वज कपड़े और श्याही से रँगा टुकड़ा मात्र नही अपितु
हमारी आन,,,बान,,, शान है

इसलिए इसमें अपनी कुत्सित मानशिकता से ऊपर उठकर
और गंदी और ओछी राजनीति छोड़कर,,,इसका सम्मान करना सीखें

जय हिंद
जय भारत

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Saturday, September 30, 2017

आजकल किसीको दोषी ठहराना या कमी निकालना बहुत आसान है,ये आज की प्रधानताहै,आज हम जितने अनैतिक और झूठे होंगे उतना ही सम्मानित कहलातेहै

आजकल किसीको दोषी ठहराना या कमी निकालना बहुत आसान है,ये आज की प्रधानताहै,आज हम जितने अनैतिक और झूठे होंगे उतना ही सम्मानित कहलातेहै

Friday, September 29, 2017

तेरी केशुओं की उलझन में कुछ उलझे हुए है हम, चल आंखों के इशारों से कुछ बाते ही हो जाये Nirmal Earthcarefoundation Ngo

तेरी केशुओं की उलझन में कुछ उलझे हुए है हम,
चल आंखों के इशारों से कुछ बाते ही हो जाये
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तारों की खोज में निकल पड़े है प्राणी, नींद ना आई तो दिवास्वप्न ही देख लेंगे Nirmal Earthcarefoundation Ngo

तारों की खोज में निकल पड़े है प्राणी,
नींद ना आई तो दिवास्वप्न ही देख लेंगे
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बचपन गुज़र गया तारों की छांव में,,अब तो खुद के लिए भी वक़्त नही ख़ुद से Nirmal Earthcarefoundation Ngo

बचपन गुज़र गया तारों की छांव में,,अब तो खुद के लिए भी वक़्त नही ख़ुद से
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बहुत बड़ी शख़्सियत बन गए हो,बाबूजी हम देखते रह जाते है इकटक,,आप नजर चुरा के निकल जाते हो

बहुत बड़ी शख़्सियत बन गए हो,बाबूजी
हम देखते रह जाते है इकटक,,आप नजर चुरा के निकल जाते हो

उस चाँद की क्या तारीफ़ करूँ, जो हमेशा ग्रहण बन कर ग्रसित किया है हमे Nirmal Earthcarefoundation Ngo

उस चाँद की क्या तारीफ़ करूँ, जो हमेशा ग्रहण बन कर ग्रसित किया है हमे
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Thursday, September 28, 2017

रात की करवटों तले,चाँद की रोशनी में नहाकर, मेरी हंथेली में तेरा नाम रहता है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

रात की करवटों तले,चाँद की रोशनी में नहाकर,
मेरी हंथेली में तेरा नाम रहता है
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Wednesday, September 27, 2017

हम अपनी बेटियों को शाम ढलने के बाद निकलने को इसीलिए मना करते है क्योंकि हम सुरक्षित समाज का निर्माण आजतक कर ही नही सके Nirmal

हम अपनी बेटियों को शाम ढलने के बाद निकलने को इसीलिए मना करते है
क्योंकि हम सुरक्षित समाज का निर्माण आजतक कर ही नही पाए ,,,नही तो दिन तो क्या रात में भी हमारी बहने और बेटियां सुरक्षित होती एक पंछी की तरह चाहे जहां उड़ने को,,,नाकि बन्द दरवाजे में कैद रहने को विवश होती

विचार कीजिये कि हम कहाँ है

Nirmal

ANY COMPANY TRY TO HIDE QUALITY OF PRODUCT THEN THIS WILL AUTOMATICALLY ERASED BY MARKET Nirmal Earthcarefoundation Ngo

ANY COMPANY TRY TO HIDE QUALITY OF PRODUCT THEN THIS WILL AUTOMATICALLY ERASED BY MARKET
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एक कहानी,,,मेरी,,,भी,,,

ना जाने ये प्रथा है या कुप्रथा,,,या मानशिकता का कौन सा रूप है,,,जो मेरे मन को कदम दर कदम छलता रहता है,,,,अगर मेरा होना इतना ही बड़ा अभिशाप है,,तो हे ईश्वर मुझे इस धरा पर क्यों भेजा,,, या ,,,क्यूँ इस योनि में जन्म दिया,,,सच मे मैं जानती हूँ कि आज के समाज या जमाने के लिए एक अभिशाप से बढ़कर और कुछ नही हूँ,,,
हर बार मुझे ही क्यों परीक्षा से गुजरना पड़ता है,,,चाहे वो मुझसे संबंधित हो या ना हो,,,,,
क्या मेरा लड़की होना ही मेरी सज़ा है,,,
या मेरी शारीरिक कुरूपता ,,,जिसकी वजह से मुझे कोई नही स्वीकारता,,,मैं घृणित हूँ,,,,और सब घ्रणा करते है मुझसे,,,
क्या मैं भी किसी के सपने देखने का अधिकार रखती हूँ
जब किसी लड़की की शादी की बात चलती है तो उसकी इच्छा कोई नही पूछता,,,बस वो एक पुतले की तरह सजा सवार के बैठा दी जाती है,,उसकी इच्छा ,,,अनिच्छा के बारे में कोई नही पूछता ,,,बस सब लड़के की हाँ का इंतज़ार करते है,,,,ये कैसा समाज है
ये कैसा समान अधिकार है जो सिर्फ पुरूषों को मिला है,,,या पुरुषों के लिए बना है,,,
वो कितनी बार ठुकराई जाती है
,,कितनी बार धिक्कारी जाती है,,,
जिसमे उसका या मेरा कोई दोष नही है
फिर मन हार कर बैठ जाता है
सपने भी इन आँखों से ओझल होने लगते है,,,
जीवन आशा बुझने लगती है,,,,बस अंधकार और,,,अकेलेपन के काले नाग डसने के लिए तैयार हो जाते है
और मैं मूकदर्शक सी हर सुबह,,,,हर शाम
हर दिन ,,,हर रात,,,
हर  पल बस ठगी जाती हूँ
बस छली जाती हूँ

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एक कहानी मेरी भी,,,,,,,

ना जाने ये प्रथा है या कुप्रथा,,,या मानशिकता का कौन सा रूप है,,,जो मेरे मन को कदम दर कदम छलता रहता है,,,,अगर मेरा होना इतना ही बड़ा अभिशाप है,,तो हे ईश्वर मुझे इस धरा पर क्यों भेजा,,, या ,,,क्यूँ इस योनि में जन्म दिया,,,सच मे मैं जानती हूँ कि आज के समाज या जमाने के लिए एक अभिशाप से बढ़कर और कुछ नही हूँ,,,
हर बार मुझे ही क्यों परीक्षा से गुजरना पड़ता है,,,चाहे वो मुझसे संबंधित हो या ना हो,,,
क्या मेरा लड़की होना ही मेरी सज़ा है,,,
या मेरी शारीरिक कुरूपता ,,,जिसकी वजह से मुझे कोई नही स्वीकारता,,,मैं घृणित हूँ,,,,और सब घ्रणा करते है मुझसे,,,
क्या मैं भी किसी के सपने देखने का अधिकार रखती हूँ
जब किसी लड़की की शादी की बात चलती है तो उसकी इच्छा कोई नही पूछता,,,बस वो एक पुतले की तरह सजा सवार के बैठा दी जाती है,,उसकी इच्छा ,,,अनिच्छा के बारे में कोई नही पूछता ,,,बस सब लड़के की हाँ का इंतज़ार करते है,,,,ये कैसा समाज है
ये कैसा समान अधिकार है जो सिर्फ पुरूषों को मिला है,,,या पुरुषों के लिए बना है,,,
वो कितनी बार ठुकराई जाती है
,,कितनी बार धिक्कारी जाती है,,,
जिसमे उसका या मेरा कोई दोष नही है
फिर मन हार कर बैठ जाता है
सपने भी इन आँखों से ओझल होने लगते है,,,
जीवन आशा बुझने लगती है,,,,बस अंधकार और,,,अकेलेपन के काले नाग डसने के लिए तैयार हो जाते है
और मैं मूकदर्शक सी हर सुबह,,,,हर शाम
हर दिन ,,,हर रात,,,
हर  पल बस ठगी जाती हूँ
बस छली जाती हूँ

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Sunday, September 10, 2017

तेरी नज़रो ने जालिम काफ़िर बना दिया,, नही तो मैं भी मुसाफ़िर था कभी मुहब्बत की गलियों का Nirmal earthcarefoundation ngo

तेरी नज़रो ने जालिम काफ़िर बना दिया,, नही तो मैं भी मुसाफ़िर था कभी मुहब्बत की गलियों का
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हम हज़ारों लाशों के ढेर पर हो तो क्या मात्र हमारी इबादत या प्रार्थना हमारे किये पापों को धो सकती है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

हम हज़ारों लाशों के ढेर पर हो तो क्या मात्र हमारी इबादत या  प्रार्थना हमारे किये पापों को धो सकती है
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Friday, September 8, 2017

वाह री जिंदगी,,जिंदा रिश्तों की तीजोरी ताबूतों में दबा रखी है,और मृत आत्माओं के पीछे हम क्यों भटक रहे Nirmal earthcarefoundation

वाह री जिंदगी,,जिंदा रिश्तों की तीजोरी ताबूतों में दबा रखी है,और मृत आत्माओं के पीछे हम क्यों भटक रहे
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मेरा हर कदम विनाश की ओर,,,,

जाने क्यों मन चला है आज आकाश की ओर,,,
जो,मेरा हर  कदम है विनाश की ओर,,,,
इन हरे भरे पेड़ों में क्या रखा है,,,
मैंने कंक्रीट के महलों को सजा रखा है,,
क्या फर्क पड़ता है देश के कई सूबों में पड़ा है सूखा,,
मेरे यहां हैं नदियों की कतारे,, इसलिए
गलियों में शावर को लगा रखा है
झरने बहते है लाइट के फव्वारों में
सूरज की रौशनी को देखने का समय नही है
इसलिए घर के led बल्ब को जला रखा है
अब हमें मॉडर्न दिखना है,,
गोरों की ड्रेस पहनकर हमे
गोरो की तरह दिखना है
मॉम डैड तो बुजुर्ग है,,वो तो चिल्लाते ही रहते है
इसीलिए व्हाट्सअप और fb से रिश्ता बना बैठे है
कभी कभी मन क्रुद्ध होता,,,जाने कैसा गूंजे ये शोर

जाने क्यों मन चला है आज आकाश की ओर,,,
जो,मेरा हर  कदम है विनाश की ओर,,,,
हर तरफ निराशा है,,,हर कोई अपनों के खून का प्यासा है
ना रिश्तों की अहमियत है
ना ही कोई मर्यादा
हर कोई लड़ रहा आपस
न संयम,,, नाही कोई नियम
चारों तरफ छायी है अँधेरी घटाए घनघोर

जाने क्यों मन चला है आज आकाश की ओर,,,
जो,मेरा हर  कदम है विनाश की ओर,,,,

Thursday, September 7, 2017

सुविधा,,आधुनिकता,,,सुंदरता,,

आजकल सुविधा,,आधुनिकता,,और सुंदरता इन शब्दों ने हमे इस क़दर आशक्त कर दिया है,,,या इस तरह इन्होंने हमारे मन - मष्तिष्क पर कब्जा कर लिया है,,जिनके लिए हम स्वयं को नष्ट करने पर तुले हैं वो भी कैसी सुंदरता,,आधुनिकता,या,,कुछ और सब का सब कृत्रिम,,,मतलब अपनी सुविधाओं के लिए
हम किसी वृक्ष का जीवन नष्ट कर देते है जिसे बड़ा होने में हमारी तरह ही कई वर्ष लगते है,,,जो ना जाने कितने हम जैसे दिग्भ्रमित मनुष्यों का पालन पोषण करता है,,,अपनी प्राणदायी वायु को हमारे अंदर समाहित कराके,,
अपने फलों से,,,पत्तों से,,तने से या पूरे के पूरे शरीर से हमारी निस्वार्थ सेवा करता है,,
हमे औषधियों के रूप में हमारे शरीर के रोगों को दूर से दूर करता है
कड़ी धूप में चलते चलते जब थक जाते है तो यही वृक्ष की छाव जैसे कुछ ही पलों में जीवन दे जाती है,,

पानी की बात करे तो हज़ारों लीटर पानी को पानी की तरह लोग बहाने से नही हिचकते वही पानी जिसके बिना मनुष्य का इक पल भी जीवन संभव नही,,,और अगर हमसे ये पुछा जाए की आज तक अन्न या जल की कितनी बूँदे संरक्षित की है,,,तो हम बहुत ही मजाकिया लहजे में कह देते है अरे बेवकूफ हो क्या यहां कौन सी पानी की कमी है,,,जाओ जाओ अपना भाषण कही और दो जाकर,,,

सुंदरता में तो इतना आशक्त है कि चाहे सिर्फ अपना,,,या ,,अपनी चीज को सुन्दर बनाने या कहने के लिए हम पागल हो जाते है,,,लेकिन फिर कुरूपता को कौन स्वीकारेगा,,,आखिर कभी हमने अपने मन में झाँका है,,,अगर मन कुरूप है तो क्या मन बदल सकते है,,
आत्मा कुरूप है तो क्या आत्मा बदल सकते है
रिश्तों में कुरूपता हो,,या,,,हमारे अपने यार दोस्त,,कुरूप हो तो चुनाव हम सिर्फ गोरी चमड़ी को ही करेंगे,,,काली चमड़ी को नही
ये हमारा अतिविस्वास या किसी भी चीज़ के लिए अतिआश्क्तता कह सकते है,,जिसके मोह जाल में इस तरह ग्रस्त हैं कि उससे हम निकलना ही नही चाहते,,,

अब बात आधुनिकता की जहाँ हम ऐसे आधुनिक युग में प्रवेश कर चुके है जहाँ प्रकृति की सुंदरता से अधिक कंक्रीट के महल लगते हैं
हम इतने आधुनिक हो गए है कि जिस मिटटी में हम पले बढ़े है या जिसने हमारा पालन पोषण किया अब उसकी खुसबू को लोग व्यर्थ,,,और जीवनदायी हवा को प्रदूषित ,,,,और एयर कंडीशनर की हवा को स्वच्छ,,,खुशबूदार,,, बैक्टीरिया रहित,,और ना जाने कितनी खूबियां बताते है
हमारा खान पान भी इतना आधुनिक हो गया कि अब बाबा दादा वाली,,पुरानी दाल रोटी बकवास और,,,चाउमीन,,,पिज्ज़ा,,, बर्गर में हमे ढेरों nutient या पोषक तत्व नज़र आने लगे,,

अब मैं आप को नही कहूंगा नही आप बुरा मान जाओगे मैं स्वयं ही विचार करने की कोशिश करता हु की जिंदगी के कौन से मोड़ पर मैं खड़ा हूँ
विनाश,,,या,,,विकास,,,

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Friday, September 1, 2017

वेद की आज्ञाओं के उलंघन का कितना भयंकर परिणाम हो सकता है ?* भारत की दुर्गति के पीछे वेद की आज्ञाओं का उलंघन ही था ।

🔶  *जानिए वेद की आज्ञाओं के उलंघन का कितना भयंकर परिणाम हो सकता है ?* भारत की दुर्गति के पीछे वेद की आज्ञाओं का उलंघन ही था ।

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🔶  *पहली आज्ञा  :*
🔸  अक्षैर्मा दिव्य: (ऋ 10/34/13)
🔹  अर्थात् "जुआ मत खेलो ।" इस आज्ञा का उलंघन हुआ । इस आज्ञा का उलंघन धर्मराज कहे जाने वाले युधिष्टर ने किया ।

🔷  परिणाम  :  एक स्त्री का भरी सभा में अपमान । महाभारत जैसा भयंकर युद्ध जिसमें लाखों, करोड़ों योद्धा और हज़ारों विद्वान मारे गए । आर्यवर्त पतन की ओर अग्रसर हुआ ।

🍁💎🍁

🔶  *दूसरी आज्ञा  :*
🔸  मा नो निद्रा ईशत मोत जल्पिः (ऋ 8/48/14)
🔹  अर्थात् "आलस्य, प्रमाद और बकवास हम पर शासन न करें ।" लेकिन इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ । महाभारत के कुछ समय बाद भारत के राजा आलस्य प्रमाद में डूब गये ।

🔷  परिणाम  :  विदेशियों के आक्रमण ।धर्म के नाम पर अंधविश्वास का पाखण्ङ फैल जाना।

🍁💎🍁

🔶  *तीसरी आज्ञा  :*
🔸  सं गच्छध्वं सं वद्ध्वम (ऋ 10/191/2)
🔹  अर्थात् "मिलकर चलो और मिलकर बोलो ।" वेद की इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ । जब विदेशियों के आक्रमण हुए तो देश के राजा मिलकर नहीं चले । बल्कि कुछ ने आक्रमणकारियों का ही सहयोग किया ।

🔷  परिणाम  :  लाखों लोगों का कत्ल, लाखों स्त्रियों के साथ दुराचार, अपार धन-धान्य की लूटपाट, गुलामी ।

🍁💎🍁

🔶  *चौथी आज्ञा  :*
🔸  कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो में सव्य आहितः (अथर्व 7/50/8)
🔹  अर्थात् "मेरे दाएं हाथ में कर्म है और बाएं हाथ में विजय ।" वेद की इस आज्ञा का उलंघन हुआ । लोगों ने कर्म को छोड़कर ग्रहों फलित ज्योतिष आदि पर आश्रय पाया ।

🔷  परिणाम  :  कर्महीनता, भाग्य के भरोसे रहकर आक्रान्ताओं को मुँहतोड़ जवाब न देना । धन-धान्य का अपव्यय, मनोबल की कमी और मानसिक दरिद्रता ।

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🔶  *पाँचवीं आज्ञा  :*
🔸  उतिष्ठत सं नह्यध्वमुदारा: केतुभिः सह ।
        सर्पा इतरजना रक्षांस्य मित्राननु धावत ।।
                    (अथर्व 11/10/1)
🔹  अर्थात् "हे वीर योद्धाओ ! आप अपने झण्डे को लेकर उठ खड़े हो और कमर कसकर तैयार हो जाओ । हे सर्प के समान क्रुद्ध रक्षाकारी विशिष्ट पुरुषो ! अपने शत्रुओं पर धावा बोल दो ।" वेद की इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ । जब लोगों के बीच बुद्ध ओर जैन मत के मिथ्या अहिंसावाद का प्रचार हुआ । लोग आक्रमणकारियों को मुँहतोड़ जवाब देने की बजाय मिथ्या अहिंसावाद को मुख्य मानने लगे ।

🔷  परिणाम  :  अशोक जैसे महान योद्धा का युद्ध न लड़ना । विदेशियों के द्वारा इसका फायदा उठाकर भारत पर आक्रमण ।

🍁💎🍁

🔶  *छठी आज्ञा  :*
🔸  मिथो विघ्राना उप यन्तु मृत्युम (अथर्व 6/32/3)
🔹  अर्थात् "परस्पर लड़ने वाले मृत्यु का ग्रास बनते हैं और नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं ।" वेद की इस आज्ञा का उलंघन हुआ ।

🔷  परिणाम  :  भारत के योद्धा आपस में ही लड़-लड़कर मर गये और विदेशियों ने इसका फायदा उठाया ।

🍁💎🍁

🔶  *सातवीं आज्ञा  :*
🔸  न तस्य प्रतिमा अस्ति
(यजुर्वेद 32/3)

🔹  अर्थात् "ईश्वर का कोई प्रतिमा नहीं है ।" लेकिन इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ और लोगों ने ईश्वर को एकदेशी मुर्ति तक समेट दिया।

🔷  परिणाम  :  ईश्वर के सत्य स्वरुप को छोड़कर भिन्न स्वरुप की उपासना और सत्य धर्म को भूला देना। मंदिर मे ढेर सारा धन आदि जमा हो जाना जो न धर्म रक्षा मे लगता है न अभाव गरीबी दुर करने मे।

🍁💎🍁

☀  तो आइये, फिर से वेदों की ओर लौट चलें . . .
और एक सशक्त राष्ट्र और चरित्रवान विश्व का निर्माण करे
*कृण्वन्तो विश्वमार्यम्*

Tuesday, August 29, 2017

हम आज की दुनिया में सब कुछ करना सीख गये,,,पर आपस में प्यार करना आजतक नही सीख पाए Nirmal Earthcarefoundation Ngo

हम आज की दुनिया में सब कुछ करना सीख गये,,,पर आपस में प्यार करना आजतक नही सीख पाए
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रिश्तें जब बोझ बन जाए,,,तो उनको त्यागना ही बेहतर है

रिश्तें जब बोझ बन जाए,,,तो उनको त्यागना ही बेहतर है
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भक्त नहीं वो,, गुंडे हैं जिनके हाँथो,, में डण्डे हैं ना आस्था है,,,,ना धर्म है,, जाने कैसा ये अधर्म है,, एक व्यभिचारी को आदर्श बताते है, इंसानियत को मारते जाते है,, लोगों का खून क्या इतना सस्ता,, लोगों के खून से नहाते हैं,, ये कैसी परिभाषा है,, ये आस्था है,,या,,इनकी कुत्सित मानशिकता,, धर्म और मजहब तो सहनशीलता सिखाता है,, यहाँ तो हर कोई मनुष्यता को मारता जाता है,, चाहे पंजाब और हरियाणा की अस्थिरता हो,, या कश्मीर की पत्थरबाजी हो,, क्या आज भी हम गुलाम है,,,या,,ये कैसी आजादी है ये धर्म और मजहब के ठेकेदारों के मोहरें कब तक बने रहेंगे,, आखिर राष्ट्र निर्माण के लिए कब हम जागेंगे,, कृपया जाति,, और,,मजहब के लिए कोई भी राष्ट्र की एकता और अखंडता से खिलवाड़ ना करे,,,, जय हिंद जय भारत Nirmal earthcarefoundation ngo

भक्त नहीं वो,, गुंडे हैं
जिनके हाँथो,, में डण्डे हैं
ना आस्था है,,,,ना धर्म है,,
जाने कैसा ये अधर्म है,,
एक व्यभिचारी को आदर्श बताते है,
इंसानियत को मारते जाते है,,
लोगों का खून क्या इतना सस्ता,,
लोगों के खून से नहाते हैं,,
ये कैसी परिभाषा है,,
ये आस्था है,,या,,इनकी कुत्सित मानशिकता,,
धर्म और मजहब तो सहनशीलता सिखाता है,,
यहाँ तो हर कोई मनुष्यता को मारता जाता है,,
चाहे पंजाब और हरियाणा की अस्थिरता हो,,
या
कश्मीर की पत्थरबाजी हो,,
क्या आज भी हम गुलाम है,,,या,,ये कैसी आजादी है
ये धर्म और मजहब के ठेकेदारों के मोहरें कब तक बने रहेंगे,,
आखिर राष्ट्र निर्माण के लिए कब हम जागेंगे,,

कृपया जाति,, और,,मजहब के लिए कोई भी राष्ट्र की एकता और अखंडता से खिलवाड़ ना करे,,,,

जय हिंद
जय भारत
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Friday, August 18, 2017

बहुत मिठास है अपनी भाषा में फिर भी हम अंग्रेजी बोलने में और बोलनेवालों को इतनी इज्जत से देखते है जो बोलने में ही भावहीन लगती है मित्रो अगर नही विस्वास है तो किसी भी मित्र से या भाई बंधू से आप प्रेम से सनी वाणी हिंदी में बोलिये और उसके बाद वही शब्द आप उनसे अंग्रेजी में बोलिये फिर आपको अंतर समझ आ जाएगा हिंदी है हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

बहुत मिठास है अपनी भाषा में फिर भी हम अंग्रेजी बोलने में और बोलनेवालों को इतनी इज्जत से देखते है जो बोलने में ही भावहीन लगती है
मित्रो अगर नही विस्वास है तो
किसी भी मित्र से या भाई बंधू से आप प्रेम से सनी वाणी हिंदी में बोलिये
और उसके बाद वही शब्द आप उनसे अंग्रेजी में बोलिये फिर आपको अंतर समझ आ जाएगा

हिंदी है हम वतन है
हिन्दोस्ताँ हमारा

आजकल कई घटनाएं हमारे सामने घटित होती हैं,,,जिनमे हमारी भूमिका,,महाभारत काल में पितामह भीष्म,,,गुरु द्रोणाचार्य,,और भी महान व्यक्ति जो द्रोपदी चीरहरण में सम्मिलित थे उन जैसी है,,,,वो भी अपनी मजबूरियों में बंधे होने के कारण एक नारी की अस्मिता को बचाने में असमर्थ साबित हुए,,,और हम भी धृतराष्ट्र की तरह आँखे होते हुए भी अंधे होने का ढोंग करते है चाहे किसी बहन की इज्जत का सवाल हो,, या किसी गरीब के हक़ की बात हो,,, और अत्यंत ही दुःख की बात ये है कि हम धर्म के ठेकेदार तो बन जाते है,,,लेकिन उससे कोई सीख नही लेते,,,जिसमे सर्वप्रथम ये बात अंकित होती है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म,,,,नाकि ,,,हिन्दू ,,,मुस्लिम,, दुःखद मन की व्यथा निर्मल अवस्थी Nirmal earthcarefoundation ngo

आजकल कई घटनाएं हमारे सामने घटित होती हैं,,,जिनमे हमारी भूमिका,,महाभारत काल में पितामह भीष्म,,,गुरु द्रोणाचार्य,,और भी महान व्यक्ति जो द्रोपदी चीरहरण में सम्मिलित थे उन जैसी है,,,,वो भी अपनी मजबूरियों में बंधे होने के कारण एक नारी की अस्मिता को बचाने में असमर्थ साबित हुए,,,और हम भी धृतराष्ट्र की तरह आँखे होते हुए भी अंधे होने का ढोंग करते है

चाहे किसी बहन की इज्जत का सवाल हो,,
या किसी गरीब के हक़ की बात हो,,,
या किसी का बचपन बिक रहा हो,,,
या कोई किसी मजबूर की मजबूरियों से खेल रहा हो,,,
और अत्यंत ही दुःख की बात ये है कि हम धर्म के ठेकेदार तो बन जाते है,,,लेकिन उससे कोई सीख नही लेते,,,जिसमे सर्वप्रथम ये बात अंकित होती है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म,,,,नाकि ,,,हिन्दू ,,,मुस्लिम,,

दुःखद मन की व्यथा

निर्मल अवस्थी
Nirmal earthcarefoundation ngo

Thursday, August 17, 2017

इस आधुनिकता के दौर में दायरे कुछ कम हुए है,,,लेकिन सार्थक रूप में नही,, ये पाश्चत्य सभ्यता का मिलन,, और भारतीय संस्कृति का लोप होना ही हमारे विनाश का कारण बनती जा रही है कहा जाता है कि अति अंत का कारण होती है ,,,,यदि अब भी हम नही संभले,,,तो देर दूर नही होगी Nirmal earthcarefoundation ngo

इस आधुनिकता के दौर में दायरे कुछ कम हुए है,,,लेकिन सार्थक रूप में नही,,
ये पाश्चत्य सभ्यता का मिलन,, और भारतीय संस्कृति
का लोप होना ही हमारे विनाश का कारण बनती जा रही है
कहा जाता है कि अति अंत का कारण होती है
,,,,यदि अब भी हम नही संभले,,,तो देर दूर नही होगी

Nirmal earthcarefoundation ngo

Monday, August 14, 2017

छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, किसे ख़बर पंद्रह अगस्त की,,,व्हाट्सएप्प पर लोग मनाते है,, घर के रिश्ते धूमिल से अब,,,fb पर मित्र बनाते है सच्चे रिश्ते अब व्यर्थ हुए,,,क्योकि बनावटी दुनिया अब भारी है,,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, कोई लड़ता वन्दे मातरम पर हम कोई कहता राष्ट्रगान नही गाएंगे कोई कहता देशद्रोही है तू,, तेरे खून से तिलक लगाएंगे,, क्या इन्हें पता कैसे मिली आज़ादी,, भारत माँ की जय बोले थे,, था वन्दे मातरम जयकारा,, हम जन गण मन भी बोले थे,, था नही कोई हिन्दू,,,मुस्लिम,, सब थे तब भारतवासी,, थी नही यहाँ कोई असहिष्णुता,, बस आज़ादी की चिंगारी थी,, अब आजादी का मतलब है अलग,, अब अलग हुआ अब नारा है,,, सबका अलग है राग औ अलाप,, मोबाइल में संसार हमारा है,,, नही मात,,पिता के लिए समय,, अब कृत्रिम सा संसार सारा है,, धरती माँ शापित महसूस करे अब,, हर प्राणी बोझ सा भारी है,, छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,, खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,, बस इसी सुभेच्छा के साथ कि हमारे राष्ट्र की आज़ादी व्यर्थ ना जाए,,,जो शहीद हुए है उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी,,, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं Nirmal earthcarefoundation ngo

छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,
किसे ख़बर पंद्रह अगस्त की,,,व्हाट्सएप्प पर लोग मनाते है,,
घर के रिश्ते धूमिल से अब,,,fb पर मित्र बनाते है
सच्चे रिश्ते अब व्यर्थ हुए,,,क्योकि बनावटी दुनिया अब भारी है,,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,
कोई लड़ता वन्दे मातरम पर हम
कोई कहता राष्ट्रगान नही गाएंगे
कोई कहता देशद्रोही है तू,,
तेरे खून से तिलक लगाएंगे,,
क्या इन्हें पता कैसे मिली आज़ादी,,
भारत माँ की जय बोले थे,,
था वन्दे मातरम जयकारा,,
हम जन गण मन भी बोले थे,,
था नही कोई हिन्दू,,,मुस्लिम,,
सब थे तब भारतवासी,,
थी नही यहाँ कोई असहिष्णुता,,
बस आज़ादी की चिंगारी थी,,
अब आजादी का मतलब है अलग,,
अब अलग हुआ अब नारा है,,,
सबका अलग है राग औ अलाप,,
मोबाइल में संसार हमारा है,,,
नही मात,,पिता के लिए समय,,
अब कृत्रिम सा संसार सारा है,,
धरती माँ शापित महसूस करे अब,,
हर प्राणी बोझ सा भारी है,,
छिप बैठे है लोग हिन्द के,,,घर की चारदीवारी में,,
खिड़की दरवाजे बंद हुए,, सहमी सहमी सी नारी है,,,

बस इसी सुभेच्छा के साथ कि हमारे राष्ट्र की आज़ादी व्यर्थ ना जाए,,,जो शहीद हुए है उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी,,,
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Nirmal earthcarefoundation ngo

Sunday, August 13, 2017

जो कर्मो से अपनी किश्मत लिखते है वो स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करते है,, जो किश्मत के भरोसे बैठे रहते हैं,,,वो सिर्फ अपना ही बेड़ा पार करते है

जो कर्मो से अपनी किश्मत लिखते है वो स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करते है,,
जो किश्मत के भरोसे बैठे रहते हैं,,,वो सिर्फ अपना ही बेड़ा पार करते है

Nirmal earthcarefoundation ngo

आज भी हम गुलाम है,,क्योंकि,, अमीर अपने मद में चूर,, और गरीब अपनी परिस्थितियों से मजबूर,, स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई Nirmal earthcarefoundation ngo जय हिंद जय भारत वन्दे मातरम

आज भी हम गुलाम है,,क्योंकि,,
अमीर अपने मद में चूर,,
और गरीब अपनी परिस्थितियों से मजबूर,,
स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई
Nirmal earthcarefoundation ngo

जय हिंद
जय भारत
वन्दे मातरम

Sunday, July 2, 2017

सब्र का ना होना ही आज कई दुखों का कारण है,,, इसी की कमी से हमारा विवेक शून्य हो जाता है,,, और हम अपनी अतिवादी सोंच के साथ हिंसक हो जाते है,, इसीलिए अंग्रेजी में कहा गया है Be patience

सब्र का ना होना ही आज कई दुखों का कारण है,,,
इसी की कमी से हमारा विवेक शून्य हो जाता है,,,
और हम अपनी अतिवादी सोंच के साथ हिंसक हो जाते है,,
इसीलिए अंग्रेजी में कहा गया है

Be patience

जिन्दगी में आज सब कुछ है,, लेकिन सब्र नही है,, Nirmal Earthcarefoundation Ngo

जिन्दगी में आज सब कुछ है,,
लेकिन सब्र नही है,,
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

पहले भारतीय बने,,,,,

कैसा विद्रोह है मन में,,,
क्यूँ सहमा सा है ये मन,,,
जाने क्यूँ क्रोध है मन में,,
ये किस मोड़ पर है जीवन,,
कल तक हम संग खेले थे,,,
आज क्यों बन गए दुश्मन,,,
जब तक ना पता था हमे,,
हमारा कौन सा है धर्म,,,
ना हिन्दू जानते थे हम,,
ना मुसलमाँ जानते थे हम,,,
दिलों में तब मुहब्बत थी,
जब तक था बीच में नही धर्म,,,
कल तक जो दिल हमारा था,,,
टूटा टुकड़ो सा,,हो गया बेदम,,,
कौन है माँ भारती का लाल,,
ये कोई ना कहता है
बस कुछ भीड़ का ही फैसला,,
अब सड़कों पे चलता है,,,
इससे तो अच्छे छोटे ही थे
जाने कहाँ खो गया बचपन,,,
कैसा विद्रोह है मन में,,,
क्यूँ सहमा सा है ये मन,,,
जाने क्यूँ क्रोध है मन में,,
ये किस मोड़ पर है जीवन,,
कल तक हम संग खेले थे,,,
आज क्यों बन गए दुश्मन,,,

Nirmal Earthcarefoundation Ngo

इस भीड़ को इंसानों की हम कह नही सकते,,जिसमे एक अपना,अपने की जिंदगी का दुश्मन है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

इस भीड़ को इंसानों की हम कह नही सकते,,जिसमे एक अपना,अपने की जिंदगी का दुश्मन है
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

कब तक धर्म के चश्मो से मरते मारते रहेंगे। जाने क्यों कश्मीर,केरल और बंगाल में चुप चुप से रहते है #notinmynamemeaningless

कब तक धर्म के चश्मो से मरते मारते रहेंगे।
जाने क्यों कश्मीर,केरल और बंगाल में चुप चुप से रहते है
#notinmynamemeaningless

कोई दुनिया में हो तो ढूंढकर ले आओ,, जो खून के रंग से पहचान जाए,,हिन्दू औ मुसलमान #stoplinching

कोई दुनिया में हो तो ढूंढकर ले आओ,,
जो खून के रंग से पहचान जाए,,हिन्दू औ मुसलमान
#stoplinching

Friday, June 30, 2017

NOW GST PHOBIA INCREASING VERY FAST AND BP OF ALL INDUSTRIALIST CROSSED OVER 300MM/HG HEART NERVES NOT ABLE TO BEAR PRESSURE THEY WAIT FOR TIME,,,THAT CAN CONVERT THEIR LIFE AND RINGING BELL OF WATCH SHOWING TIME 12 O CLOCK ,,,,,,AFTER DEMONITISATION AGAIN MODIJI SAY Bhaiyo aur bahno GST BOMB EXPLODE BUMMMMMMMM HA HA HA,,,,,,,,,

NOW GST PHOBIA INCREASING VERY FAST AND BP OF ALL INDUSTRIALIST CROSSED OVER 300MM/HG
HEART NERVES  NOT ABLE TO BEAR PRESSURE THEY WAIT FOR TIME,,,THAT CAN CONVERT THEIR LIFE AND RINGING BELL OF WATCH SHOWING TIME 12 O CLOCK ,,,,,,AFTER DEMONITISATION AGAIN MODIJI SAY

Bhaiyo aur bahno

GST BOMB EXPLODE

BUMMMMMMMM

HA HA HA,,,,,,,,,

Thursday, June 29, 2017

How To Survive Lightning● ●आसमानी बिजली से कैसे बचें●

●How To Survive Lightning●
●आसमानी बिजली से कैसे बचें●

विश्व में प्रति सेकंड लगभग 100 बार बिजली कही ना कही गिरती है...
और अगर आपकी उम्र लगभग 80 वर्ष मानी जाए तो...
आपको प्रति सेकंड 100 बिजलिया बरसाते इस आसमान के नीचे... जिन्दगी के 2522880000 सेकण्ड्स बिताने हैं  .
ईस बरसाती मौसम में
अगर कभी किसी तूफ़ान में आपको बिजली की चमक दिखाई दे... तो 30 तक गिनिये
अगर... 30 तक पहुचने से पहले ही आपको बादलो की गर्जना सुनाई दे जाती है तो... आप खतरे में हो सकते है
करोडो वोल्ट इलेक्ट्रिकल चार्ज और सूर्य की सतह से 5 गुना ज्यादा तापमान वाला प्रकृति का खुबसूरत पर बेहद विनाशकारी करिश्मा "आकाशीय बिजली" आपके बहुत करीब है
सिर्फ 10 किलोमीटर के दायरे में
.
अपने घरो में रहना सेफ है
लेकिन इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए की... पानी (not pure water) बिजली का सुचालक है
और... इन्सान का शरीर 70% पानी से बना है
तो... अगर ऐसे किसी तूफ़ान में आप खुले मैदान में हो तो... दूसरी चीजो के मुकाबले.. आपके खोपडिया पर बिजली गिरने की संभावना बहुत हाई हो जाती है
.
तो... अगर हाईवे पर जाते हुए कभी आपकी कार खराब हो जाए
और... सर के ऊपर बिजलिया चमकने लगे
तो क्या करना चाहिए
.
जमीन पर लेट जायेगे?
या किसी पेड़ के नीचे जा कर खड़े हो जायेगे?
या मेटल की बनी अपनी कार में जा के बैठ जायेगे?
.
well... अगर ये जानते हुए की "मेटल बिजली को आकर्षित करता है" आपके दिमाग में ये आया है की हमें मेटल की बनी कार में जा कर बैठ जाना चाहिए?
तो..
In fact... You are right..!!!
Why??
.
Because your car acts like a "FARADAY CAGE"
अब चूँकि बिजली और कुछ नहीं... "इलेक्ट्रिकल चार्ज" से युक्त इलेक्ट्रॉन्स का प्रवाह मात्र है... धातु के बिजली के सुचालक होने के कारण ये इलेक्ट्रॉन्स धातु की उपरी सतह से टकरा कर अब्सोर्ब हो जाते हैं
"बिजली धातु की चादर के अन्दर नहीं घुस जाती" बल्कि चादर की सतह पर ही रहती है
अर्थात आप गाडी में है तो बिजली गाडी के चारो तरफ टकराएगी
पर... गाडी को चीर आपके अन्दर नहीं घुस जायेगी
आई बात समधन में?
आपकी गाड़ी, हवाई जहाज वगेरह "फैराडे केज" के जीते जागते उदहारण है.. अर्थात आपके चारो तरफ मौजूद एक मेटल कोटिंग आपकी जान बचा सकती है
(But don't touch any metal in car... stay at your seat...switch off the engine and don't use mobile phones... and you are safe)
.
अब फर्ज करो की आपके पास गाडी भी नहीं है... तो???
सबसे पहले... अपनी जेब के सिक्को, धातु के आभूषण, बेल्ट वगेरह से निजात पाए
श्याना भगत बन मोबाइल पर अपने प्रिय को मौसम के ताजे हाल का प्रसारण ना करें
आपका फोन आकाशीय बिजली को आकर्षित करने का सबसे धांसू जुगाड़ है और किसी भी पल एक हैण्डग्रेनेड बन कर आपके पुर्जे पुर्जे कर सकता है
तो फोन से दूर रहिये... वही ठीक है
.
अब आभूषण और मोबाइल को ठिकाने कैसे लगाया जाए... ये मत पूछना

.
बिना गाड़ी के किसी खुली जगह फंस जाने पर लम्बी चीजो से परहेज करे। लम्बे पेड़ो पर ही बिजली गिरा करती है। बेहतर हो किसी छोटे पेड़ के नीचे खड़े रहिये।
.
अगर आस पास कोई पेड़ भी नहीं है..
तो जमीन पर सीधे खड़े रहेगे तो बिजली को आप अपने सर पे गिरने की दावत दे रहे है
जमीन पर लेटना भी खतरे से खाली नहीं.. क्युकी अगर आस पास कही जमीन पर बिजली गिरी तो जमीन से सटे रहने के कारण बिजली के आपके शरीर में घुसने की ये खुल्ली दावत हो जायगी
अब आप कहेगे की...
खड़ा नहीं रहना... लेटना भी नहीं
तो का त्रिशंकु बन हवा में लटक जाए?
नहीं... नहीं...
इस स्थिति में बेस्ट होगा की आप "मुर्गा" बन जाए
या कम से कम उकडू बैठ कर अपना सर घुटनों के बीच में रख लीजिये
इससे अगर बिजली आपके आस पास गिरती है तो उम्मीद की जा सकती है की पॉइंट a यानी आपके एक पाँव से शरीर में ऊपर चढ़ने से पहले वो पॉइंट b यानी दुसरे पैर की तरफ आकर्षित हो जायगी
और बिजली का आवेश अगर अपेक्षाकृत कम हुआ तो...
आपके पाँव के पैरालिसिस के शिकार हो जाने की कीमत पर दिल बच जाना...? महंगा सौदा नहीं
.
और अगर आपको गठिया है
आप झुक भी नहीं सकते
तो... सबसे बेहतर उपाय है की अपने घर में रहिये
मौसम विभाग को हलके में ना लें
और आवारागर्दी कम करें
लेकिन... अगर बिजली कड़क रही है तो "लैंडलाइन फोन" का इस्तेमाल ना करे
और... अगर आपका घर बाबा आदम के जमाने का है... और उसमे पानी के पाइप की फिटिंग तब हुई थी जब "PVC" का ज़माना नहीं था
तो तूफ़ान के वक़्त "पानी की टोंटी" छुने से परहेज करे
Follow these 2 rules and you are almost safe...
.but.. still..
You might not be lucky... always...!!!